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आरकॉम की समाधान योजना पर विभाग को आपत्ति

सुब्रत पांडा / मुंबई August 19, 2020

दूरसंचार विभाग ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) मुंबई में रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) और उसकी सहायक इकाई रिलायंस टेलीकॉम (आरटीएल) की समाधान योजना पर आपत्ति जताई है।

ऋणदाताओं की तरफ से मंजूर समाधान योजना के मुताबिक दूरसंचार विभाग को कंपनियों के समाधान से प्राप्त होने वाली रकम में कुछ नहीं मिलेगा क्योंकि उसे परिचालन ऋणदाता माना गया है। एनसीएलटी ने इन कंपनियों की समाधान योजना पर सुनवाई 21 अगस्त तक टाल दी है। तब तक दूरसंचार विभाग अपनी लिखित आपत्ति पेश करेगा।

आरकॉम के ऋणदाताओं की समिति ने एक समाधान योजना को मंजूरी दी है, जिसमें ऋणदाताओं को 23,000 करोड़ रुपये मिलेंगे। इस समिति में भारतीय स्टेट बैंक लीड बैंकर है। आरकॉम की परिसंपत्तियों के लिए सबसे अधिक बोली जियो और यूवीएआरसी ने लगाई है। जियो ने रिलायंस इन्फ्राटेल लिमिटेड (आरआईटीएल) की टावर और फाइबर परिसंपत्तियों के लिए 4,700 करोड़ रुपये की बोली लगाई है। यूवीएआरसी ने आरकॉम और आरटीएल के स्पेक्ट्रम, रियल एस्टेट परिसंपत्तियों और एंटरप्राइज एवं डेटा सेंटर कारोबार के लिए 14,000 करोड़ रुपये की बोली लगाई है। समाधान योजना के मुताबिक आरकॉम के चीन के ऋणदाताओं को 5,500 करोड़ रुपये मिलेंगे।

समाधान योजना से 38 ऋणदाताओं का समूह 33,000 करोड़ रुपये के सिक्योर्ड (संपत्ति गिरवी रखकर दिए गए) ऋणों का एक अहम हिस्सा वसूलने की उम्मीद कर रहा था। ऋणदाताओं ने आरकॉम और उसकी सहायक कंपनियों की समाधान योजना को मंजूरी दे दी है, लेकिन एनसीएलटी ने योजना को अभी मंजूरी नहीं दी है।

इस बीच आरकॉम के स्पेक्ट्रम के मुद्दे पर शीर्ष अदालत में एक बड़ी जंग शुरू हो गई है। दूरसंचार विभाग दिवालिया दूरसंचार कंपनियों का स्पेक्ट्रम अपने पास रख सकता है। आरकॉम पर दूरसंचार विभाग के 25,199 करोड़ रुपये बकाया हैं, जिसमें स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क और लाइसेंस फीस भी शामिल है। यह राशि आरकॉम के बकाया में करीब आधी है।  विवाद की जड़ स्पेक्ट्रम लाइसेंस बेचने का मुद्दा है। आरकॉम ने तर्क दिया है कि अगर दिवालिया प्रक्रिया के तहत स्पेक्ट्रम को बेचने की मंजूरी नहीं दी गई तो उसे परिसमापन के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

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