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लक्ष्य से पीछे रह गया समुद्री खाद्य निर्यात

टीई नरसिम्हन / चेन्नई August 19, 2020

भारत का समुद्री खाद्य निर्यात वर्ष 2019-20 के लिए निर्धारित सात अरब डॉलर के लक्ष्य से चूक गया है, हालांकि यह अंतर बहुत ज्यादा नहीं है। वैश्विक स्तर पर कोरोनावायरस से संबंधित लॉकडाउन में अब राहत दिए जाने और खुदरा शृंखलाओं के मूल्य संवर्धित उत्पादों की बिक्री में इजाफे के मद्देनजर उम्मीद की जा रही है कि निर्यात में तेजी आएगी।

वर्ष 2019-20 के दौरान भारत ने 6.68 अरब डॉलर मूल्य का 12,89,651 टन समुद्री खाद्य निर्यात किया, जबकि पिछले साल 6.73 अरब डॉलर मूल्य का 13,92,559 टन समुद्री खाद्य निर्यात किया था। वर्ष के दौरान रुपये के हिसाब से समुद्री खाद्य निर्यात पिछले वर्ष की तुलना में 0.16 प्रतिशत अधिक रहा, लेकिन मात्रा और डॉलर के मूल्य के लिहाज से इसमें क्रमश: 7.39 प्रतिशत और 0.74 प्रतिशत तक की गिरावट आई है।

पिछले साल मात्रा और मूल्य के लिहाज से फ्रोजन झींगा निर्यात की प्रमुख वस्तु बना रहा और फ्रोजन फिश का दूसरा स्थान रहा। अमेरिका और चीन भारतीय समुद्री खाद्य के सबसे बड़े आयातक थे। समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एमपीईडीए) वर्ष 2030 तक देश का समुद्री खाद्य निर्यात बढ़ाकर एक लाख करोड़ तक करने का लक्ष्य बन रहा है। एमपीईडीए के चेयरमैन केएस श्रीनिवास का कहना है कि हम सात अरब डॉलर के लक्ष्य से थोड़ा-सा चूक गए हैं। लेकिन अब निर्यात में इजाफा नजर आना चाहिए क्योंकि हर जगह लॉकडाउन में ढील दी गई है।

श्रीनिवास ने कहा कि कोरोनोवायरस महामारी के मद्देनजर ऑडर्र रद्द होने से प्रमुख निर्यात बाजारों में नरम मांग के बावजूद भारत 12,89,651 टन समुद्री खाद्य निर्यात कर पाया है। इसके अलावा भुगतान में कमी व देरी, खेपों की धीमी आवाजाही तथा नए ऑर्डर प्राप्त करने में भी कठिनाई आ रही थीं। मछली पकडऩे के दिनों में कमी के बीच पश्चिमी तट पर मछली पकडऩे में गिरावट आना भी निर्यात में कमी का एक कारण रहा है।

फ्रोजन झींगा निर्यात ने 488.912 करोड़ डॉलर मूल्य के स्तर पर देश की समुद्री खाद्य निर्यात बास्केट में सबसे महत्त्वपूर्ण वस्तु के रूप में अपनी स्थिति बनाए रखी है। कुल मात्रा में इसका योगदान 50.58 प्रतिशत और डॉलर की कुल आमदनी में इसकी हिस्सेदारी 73.21 प्रतिशत रही। दूसरी सबसे ज्यादा निर्यात की जाने वाली वस्तु - फ्रोजन फिश ने 51.36 करोड़ डॉलर की कमाई की। कुल मात्रा में इसका योगदान 17.32 प्रतिशत और डॉलर के रूप में हुई कमाई में इसकी हिस्सेदारी 7.69 प्रतिशत रही। हालांकि मात्रा के हिसाब से फ्रोजन फिश के निर्यात में 34.11 प्रतिशत और मूल्य (डॉलर में) के लिहाज से 26.53 प्रतिशत की गिरावट आई है। फ्रोजन कटलफिश का निर्यात 70,906 टन के स्तर पर रहा जिसने मात्रा के हिसाब से 17.76 प्रतिशत, रुपये में 1.71 प्रतिशत और डॉलर के लिहाज से 1.45 प्रतिशत की सकारात्मक वृद्धि दिखाई है। इसने देश के लिए 28.64 करोड़ डॉलर की कमाई की है। मूल्य के लिहाज से सबसे बड़ा आयातक बने रहने वाले अमेरिका ने 256.254 करोड़ डॉलर मूल्य के भारतीय समुद्री खाद्य का आयात किया और मूल्य (डॉलर में) के लिहाज से इसकी हिस्सेदारी 38.37 प्रतिशत रही।


कैप्टन फ्रेश सी-फूड का करेगी विस्तार

सी-फूड की आपूर्ति करने वाली कंपनी कैप्टन फ्रेश ने अंकुर कैपिटल और अन्य निवेशकों से 23 लाख डॉलर या करीब 17 करोड़ रुपये जुटाए हैं। कंपनी ने सोमवार को यह जानकारी दी। वित्तपोषण के इस दौर में इन्कुबेट फंड इंडिया तथा सिलिकॉन वैली के ऐंजल निवेशकों ने भी भाग लिया। सी-फूड आपूर्ति शृंखला मंच कैप्टन फ्रेश रिटेलरों को ताजा मछली तथा समुद्री खाद्य उत्पादों की आपूर्ति करती है।

कंपनी ने कहा कि वह इस राशि का इस्तेमाल कंप्यूटर विजन, आईओटी, बॉट्स, डेटा एनालिटिक्स जैसी प्रौद्योगिकियों में करेगी।

कैप्टन फ्रेश का इरादा नए बाजारों में विस्तार तथा अपने कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने का भी है। कैप्टन फ्रेश की स्थापना पूर्व निवेश बैंकर उत्तम गौड़ा ने अप्रैल, 2019 में की थी। भाषा
Keyword: समुद्री खाद्य, निर्यात, लॉकडाउन, फ्रोजन झींगा, एमपीईडीए, ऑडर्र, फ्रोजन फिश,
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