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रिटायर होने के बाद ब्रांड की दुनिया में कायम रहेगा धोनी का जलवा?

ध्रुव मुंजाल /  08 17, 2020

हाल में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने वाले मशहूर क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी अपनी शानदार लोकप्रियता की बदौलत ही पिछले साल जनवरी से नवंबर के बीच भारतीय क्रिकेट टीम के मौजूदा कप्तान विराट कोहली से ज्यादा ब्रांड करार करने में सफल रहे। जनवरी में जारी की गई एडेक्स इंडिया और टैम मीडिया रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक कोहली 43 ब्रांडों से जुड़े थे जबकि इसके मुकाबले धोनी इसी अवधि के दौरान 44 ब्रांडों का चेहरा थे। यह बात किसी को सामान्य लग सकती है लेकिन ऐसा नहीं है। अपने करियर में एक मुकाम हासिल कर चुके और क्रिकेट की दुनिया से लगभग रिटायर होने के कगार पर पहुंचे धोनी के लिए भारतीय क्रिकेट के पोस्टर बॉय का तमगा हासिल करने वाले कोहली को ब्रांड करार में चुनौती देने में सक्षम होना कोई सामान्य बात नहीं होनी चाहिए।

हालांकि धोनी की सभी चीजों की तरह ही इसके पीछे भी एक रणनीति काम कर रही थी। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ  ह्यूमन ब्रांड्स के मुख्य संरक्षक और मोगे मीडिया के संस्थापक संदीप गोयल कहते हैं कि पूर्व भारतीय कप्तान ने अपनी मौजूदगी सब जगह दर्ज कराने के लिए ब्रांड करार की फीस जानबूझकर कम कर दी। उद्योग के अनुमान के मुताबिक धोनी पिछले कुछ सालों से ब्रांड करार की फीस के तौर पर एक दिन के लिए 1 करोड़ से 2 करोड़ रुपये तक वसूल रहे हैं जबकि पहले वह इसकी चार गुना रकम लेते थे। गोयल का मानना है कि ब्रांड करार के क्षेत्र में धोनी की शानदार कामयाबी की वजह यह है कि उन्हें एक भरोसेमंद चेहरे के रूप में देखा जाता है और यह खासियत किसी भी सफल ब्रांड अभियान का मुख्य बिंदु होता है। गोयल कहते हैं, 'वह हमेशा विनम्र और ईमानदार दिखते हैं। इसके अलावा, उनके जमीनी होने की छवि से भी दर्शक एक जुड़ाव महसूस करते हैं।'

 अब जब धोनी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा करने का फैसला किया है तो इसमें कितना बदलाव दिख सकता है? वह पहले से ही लगभग रिटायर होने के कगार पर पहुंच चुके थे और भारत के लिए उनका आखिरी खेल पिछले साल जुलाई में न्यूजीलैंड के खिलाफ  था लेकिन इसके बावजूद ब्रांड करार क्षेत्र में धोनी की संभावनाओं में कोई बदलाव नहीं दिखता है। मैदान में उनका जलवा कम होने के बावजूद भी इस 39 वर्षीय खिलाड़ी के खाते में ब्रांडों की कमी नहीं आई। धोनी इस वक्त 25 ब्रांडों से जुड़े हैं और वह पिछले साल फ ोब्र्स इंडिया सेलेब्रिटी की 100 लोगों की सूची में पांचवें पायदान पर थे और उनकी कमाई लगभग 136 करोड़ रुपये है। डफ  ऐंड फेल्प्स ने उन्हें 2019 के अपने सेलेब्रिटी ब्रांड मूल्यांकन अध्ययन में नौवें पायदान पर रखा और धोनी की ब्रांड हैसियत 310 करोड़ रुपये आंकी गई थी जो इससे पिछले साल के 202 करोड़ रुपये से अधिक थी।

साफतौर पर इस बात से भी मदद मिलती है कि धोनी अब भी चेन्नई सुपरकिंग्स (सीएसके) के कप्तान हैं और इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में उन पर बड़ा दांव लगाया जाता है जो अगले महीने देर से ही सही संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में शुरू होने जा रहा है। ब्रांड विशेषज्ञ हरीश बिजूर कहते हैं, 'वह अब भी क्रिकेट के सबसे सक्रिय प्रारूपों का एक अहम हिस्सा हैं। ऐसे में उनकी ब्रांड पहचान भी बरकरार रहने वाली है।' लेकिन आने वाले दिनों में बहुत कुछ धोनी, उनकी बल्लेबाज वाली भूमिका और सीएसके का प्रदर्शन आईपीएल में कैसा रहता है, इस बात पर निर्भर करेगा। बिजूर कहते हैं, 'धोनी के लिए अब क्रिकेट का पहलू पहले से ज्यादा महत्त्वपूर्ण है।'

जब धोनी पहली बार भारतीय क्रिकेट के तेजतर्रार और लंबे बालों वाले सितारा के रूप में उभरे तो उन पर सबकी निगाहें थम गईं। वह मशहूर क्रिकेट खिलाड़ी सचिन तेंडुलकर की मौजूदगी में ही प्रमुख व्यक्तित्व वाले खिलाड़ी की छवि स्थापित करने में सफल रहे। गोयल कहते हैं, 'तेंडुलकर को एक मध्यमवर्गीय लड़के के रूप में देखा गया था जिन्होंने एक बड़ा मुकाम हासिल किया। धोनी भी ऐसे ही थे लेकिन उन्होंने इस छवि को सबसे बेहतर तरीके से स्थापित की।'

 शुरुआत में जो ब्रांड उनसे जुड़े उनमें मैसूर चंदन साबुन,  टीवीएस, पेप्सी जैसे ब्रांड थे और वीडियोकॉन के लिए शाहरुख खान के साथ उनका एक यादगार विज्ञापन भला कौन भूल सकता है। इसके अलावा वह बूस्ट ब्रांड से भी जुड़े थे। बाद में वह उन्हीं ब्रांडों से जुड़े जो उनके व्यक्तित्व के अनुरूप थे। स्नीकर्स ने उन्हें चुना क्योंकि उनके व्यक्तित्व से हंसी-मज़ाक का पुट भी जुड़ा था जिसकी तलाश में मार्केटिंग वाले थे। इसी तरह, फैंटेसी क्रिकेट मंच ड्रीम 11 भी पूरी तरह से उनकी इन विशेषताओं से मिलता जुलता था कि वह खेल के मैदान में आक्रामक हैं और सही रणनीति के साथ जोखिम लेते हैं। 

एक ब्रांड गुरु ने नाम न बताने की शर्त पर कहते हैं, 'जब विज्ञापन करार की बात हो तब तेंडुलकर का उसमें एकाधिकार था। धोनी कड़ी प्रतिस्पर्धा से घिरे हुए थे इसलिए उन्होंने खुद में बदलाव करने की कोशिश की। कुछ मायनों में धोनी तेंडुलकर के परंपरावाद और कोहली की साहसिक मुखरता के बीच के सेतु थे।' बिजूर कहते है, 'तेंडुलकर ने जो किया उसे धोनी ने बेहतर किया और अब कोहली उसमें और सुधार ला रहे हैं।' इसका एक कारण यह भी है कि धोनी की मौजूदगी ब्रांड की दुनिया में कम होने लगी है और बड़े ब्रांडों का उनके प्रति आकर्षण नहीं बचा है। कुछ घरेलू नामों को छोड़कर उनके मौजूदा पोर्टफ ोलियो में नेटमेड्स, रेडबस, कार्स24 और इंडिगो पेंट्स शामिल हैं।

गोयल कहते हैं कि एक बार वह खेल को छोड़ देते हैं तो ब्रांड की दुनिया में प्रासंगिक बने रहने के लिए धोनी को अपने शांत, उदासीन व्यवहार को छोडऩा होगा। उन्हें आम जनता के लिए और अधिक सुलभ होना होगा। गोयल कहते हैं, 'तेंडुलकर धीरे-धीरे लोगों के बीच से हटे हैं। हालांकि उनकी कोशिश यही होती है कि वह ज्यादा देखें जाएं और अपने प्रशंसकों के साथ संवाद करें। धोनी को भी खुद को इसी तरह ढालना होगा।'

इतना तो तय है कि धोनी द्वारा बनाई गई अनगिनत यादें ही उनके पक्ष में हमेशा रहेंगी जिनमें मुंबई का वह छक्का लोगों के जेहन में रच-बस चुका है जिसकी वजह से 9 साल पहले भारत की झोली में विश्व कप का खिताब आया था। इसकी यादें उनके अनगिनत प्रशंसकों के मन में अब भी ताजा है। बिजूर कहते हैं, 'अब वह विशुद्ध रूप से क्रिकेट को लेकर जो करेंगे वह बेहद महत्त्वपूर्ण होगा। लेकिन भारत में उन्होंने जो यादें बनाई हैं उन्हें ताजा रखना भी उतना ही अहम होगा।'

Keyword: ब्रांड, क्रिकेट, संन्यास, महेंद्र सिंह धोनी, विराट कोहली, एडेक्स इंडिया, टैम मीडिया रिसर्च,
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