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जब न दे पाए कोई साथ तभी ईपीएफ को लगाएं हाथ

संजय कुमार सिंह /  08 16, 2020

कोविड-19 के कारण अन्य गतिविधियों समेत लोगों के रोजगार पर भी बुरा असर हुआ है। कई लोगों को नौकरियों से हाथ धोना पड़़ा है और बड़ी संख्या में लोगों के वेतन पर कैंची चली है। इन वजहों से लोगों की आमदनी पूरी तरह थम गई या इसमें कमी आई है।

इसका नतीजा यह हुआ है कि वित्तीय तंगी का शिकार होकर कई लोगों ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) से जमकर रकम निकाली है। मीडिया में आई खबरों के अनुसार ईपीएफओ के करीब 80 लाख उपभोक्ता अप्रैल से जुलाई के तीसरे सप्ताह के बीच 30,000 करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। देश में लॉकडाउन की घोषणा के बाद 28 मार्च को श्रम मंत्रालय ने कोविड-19 से उत्पन्न आर्थिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए ईपीएफ खाते से रकम निकालने के नियम आसान कर दिए थे। चूंकि, ईपीएफ विशुद्ध रूप से सेवानिवृत्ति कोष है, इसलिए इससे रकम निकालने का निर्णय सोच-समझ कर लिया जाना चाहिए।


सेवानिवृत्ति कोष

ईपीएफ का मुख्य मसकद कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद जीवन-यापन के लिए एक कोष तैयार करने में मदद करना है। बजाज कैपिटल में समूह निदेशक (फाइनैंशियल वेलबीइंग) अनिल चोपड़ा कहते हैं,'जीवन प्रत्याशा बढऩे से सेवानिवृत्ति के बाद लोगों की जरूरतें भी लंबी हो गई हैं। इस वजह से उन्हें अधिक रकम की दरकार होती है। ईपीएफ रकम को एक अपवाद के तौर पर देखा जाना चाहिए और कठिन परिस्थितियों में ही इसे हाथ लगाना चाहिए।'

कई ऐसे कारण हैं, जिनसे ईपीएफ में जमा रकम सेवानिवृत्ति के बाद के जीवन के लिए एक अति महत्त्वपूर्ण बचत मानी जाती है। सबसे पहले तो किसी अन्य सरकारी योजना के मुकाबले इस पर अधिक ब्याज (2019-20 में 8.5 प्रतिशत) मिलता है। दूसरी बात यह कि ईपीएफ में जमा रकम पर सरकार की गारंटी होती है, इसलिए किसी तरह का जोखिम भी नहीं रहता है। नौकरी के दौरान धीरे-धीरे ईपीएफ में बड़ी रकम जमा हो जाती है। इक्विरस वेल्थ मैनेजमेंट के मुख्य कार्याधिकारी अंकुर माहेश्वरी कहते हैं 'वित्तीय व्यवहार के दृष्टिकोण से भी ईपीएफ अहम है, क्योंकि इससे लोगों में नियमित और स्वत: हरेक महीने बचत करने की आदत पड़ जाती है।' ईपीएफ के साथ एक खास बात यह है कि इसमें निवेश पर किसी भी चरण में (निवेश के समय या निकासी के दौरान) कर नहीं लगता है। अंत में एक और फायदे की बात यह है कि इस पर चक्र वृद्धि ब्याज (ब्याज पर ब्याज) मिलता है, जिससे लंबे समय बाद एक मोटी रकम हाथ लगती है।

ऋण लेने से करें परहेज

जिन लोगों को इस समय आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, उन्हें कर्ज लेने से परहेज करना चाहिए। माहेश्वरी कहते हैं,'मौजूदा हालात में कब किसे दूसरी नौकरी देखनी पड़ जाए इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता। ऐसे में अधिक महंगा कर्ज लेने से परहेज करें और जहां तक संभव हो अपने मौजूदा निवेश निकाल कर ही काम चलाएं।'

अत्यधिक जरूरी हो तभी निकालें रकम

ईपीएफ से रकम अंतिम विकल्प के तौर पर ही निकालना चाहिए। चोपड़ा कहते हैं 'जब आपके पास आय के सभी स्रोत बंद बंद चुके हैं तभी आपात जरूरतों के लिए ईपीएफ से रकम निकालने के बारे में सोचें।' आपको अपनी साख के बारे में भी सोचना होगा। प्लान अहेड वेल्थ एडवाइजर्स के मुख्य वित्तीय अधिकारी विशाल धवन कहते हैं 'कर्ज भुगतान से छूट की अवधि समाप्त होने के बाद भुगतान नहीं करने या इसमें देरी होने से वित्तीय संस्थानों की नजर में आपकी साख खराब हो सकती है। इससे भविष्य में आपको कर्ज हासिल करने में मशक्कत करनी पड़ सकती है। ऐसी नौबत से बचने के लिए ईपीएफ रकम का इस्तेमाल कर सकते हैं।'

रकम निकालने की रणनीति

दीर्घ अवधि में शेयर अधिक प्रतिफल दे सकते हैं, जबकि फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट कम, लेकिन एक निश्चित प्रतिफल देते हैं। किसी व्यक्ति को अपने पोर्टफोलियो से किस तरह रकम निकालनी चाहिए इस पर विशेषज्ञों की राय अलग-अलग है। माहेश्वरी कहते हैं,'इक्विटी एवं फिक्स्ड इनकम दोनों से निवेश इस तरह निकालें ताकि आपका परिसंपत्ति आवंटन अनुपात न बिगड़े।' जिन लोगों को यह तरीका पेचीदा लगता है उन्हें धवन इक्विटी एवं डेट दोनों में हिस्सेदारी इस तरह बेचने की सलाह देते हैं, जिससे दोनों से कुल जरूरत का आधा-आधा हिस्सा निकल आए। अब बाजार भी लगभग अपने पिछले स्तरों पर आ गया है, इसलिए इक्विटी बेचने से भी आपको बहुत नुकसान नहीं होने वाला है। धवन डेट योजनाएं बेचने और इक्विटी आधारित योजनाएं नहीं छूने की सलाह देते हैं, क्योंकि इक्विटी में निवेश दीर्घ अवधि के लक्ष्य पूरे करने के लिए किया जाता है। हालांकि ऐसा करने से आपके पोर्टफोलियो में इक्विटी का भारांश बढ़ सकता है और केवल उन्हीं लोगों को ऐसा करना चाहिए, जिनमें जोखिम लेने की भरपूर क्षमता है। फिक्स्ड इनकम योजनाओं के मामले में करोपरांत मुनाफे के आधार पर अपने सभी निवेश बढ़ते क्रम में सूचीबद्ध करें और इनमें कम प्रतिफल देने वाली योजनाएं बेच दें।

विभिन्न प्रतिफल देने वाली योजनाओं जैसे डेट फंड, शेयर आदि के मामले में भी ऐसा करें, लेकिन उनके संभावित प्रतिफल को ध्यान में रखते हुए कदम उठाएं। धवन कहते हैं,'मिसाल के तौर पर किसी गिल्ट फंड ने पिछले वर्ष 8 प्रतिशत प्रतिफल दिया है और इसके मुकाबले फिक्स्ड डिपॉजिट 6 प्रतिशत ब्याज दे रहा है। इसका यह कतई मतलब नहीं है कि आपको सबसे पहले एफडी तोडऩा चाहिए। अब ब्याज दरें कम हो गई हैं, इसलिए गिल्ट फंड में निवेश बनाए रखने का कोई तुक नजर नहीं आ रहा है।' बिकवाली के समय कराधान और एक्जिट लोड (रकम निकासी के समय लगने वाला शुल्क) पर भी विचार करें। मौजूदा समय में औसत एवं गुणवत्ता के लिहाज से खराब योजनाओं से पीछा छुड़ा सकते हैं।

युवा भी बरतें सावधानी

कई युवा कर्मचारियों ने कोविड-19 के बाद निकासी नियम आसान होने के बाद ईपीएफ से बड़ी मात्रा में रकम निकाली है। इसके पीछे एक वजह यह रही है कि उन्हें लगता है कि शेयर में निवेश से उन्हें कहीं अधिक प्रतिफल मिलेगा।

धवन कहते हैं 'युवा निवेशकों को भी अपने सेवानिवृत्ति के लिए किए जाने वाले निवेश में फिक्स्ड-इनकम में आवंटन करना चाहिए। शेयर बाजार लंबे समय तक कमजोर रह सकता है, इसलिए स्थिरता के लिए ऋण योजनाओं की जरूरत होती है।' कई युवा कर्मचारियों ने इसलिए भी ईपीएफ से रकम निकाली है क्योंकि उनकी उपभोग की जरूरत बचत की जरूरतों से काफी अधिक होती है। उन्हें अपने खर्च पर नियंत्रण रखना चाहिए। ईपीएफ से निकासी से वृद्धावस्था के समय वित्तीय सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।

अंत में, ईपीएस से इसलिए भी निकासी करने से यथासंभव परहेज करें क्योंकि इसकी भरपाई करनी मुश्किल होती है। राघव कहते हैं 'ईपीएफ और स्वैच्छिक भविष्य निधि में आपका अंशदान आपके मूल वेतन का 100 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता।'

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