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आपके स्वास्थ्य का होगा डिजिटल कार्ड

सोहिनी दास और साई ईश्वर /  August 07, 2020

कोविड-19 ने दुनिया को कई सबक दिए हैं जिनमें से एक वृहद डेटा का तेजी से इस्तेमाल कर उसका विश्लेषण करने से जुड़ी जरूरत भी शामिल है। स्वास्थ्य से जुड़े ब्योरे का डिजिटलीकरण करने से इन आंकड़ों को व्यापक स्तर पर एकत्र करने के साथ-साथ इनका विश्लेषण भी किया जा सकता है जिससे सरकार को नीति बनाने में मदद मिल सकती है। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने इसी मकसद से राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन (एनडीएचएम) की शुरुआत की है जिसके तहत प्रत्येक नागरिक को एक अलग तरह का स्वास्थ्य पहचान पत्र (आईडी) देने का प्रस्ताव है। प्रधानमंत्री इसकी घोषणा 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कर सकते हैं।

एक निजी अस्पताल के प्रमुख जिन्हें राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य योजना के विचार-विमर्श की जानकारी थी उन्होंने बताया, 'मान लीजिए कि एनडीएचएम को लागू कर दिया गया है। ऐसे में आप कल्पना कर सकते हैं कि नीति निर्माता कितनी तेजी से उन आंकड़ों का इस्तेमाल कर इस बात का आकलन कर सकते हैं कि किसी विशेष इलाज को लेकर मरीजोंं की कैसी प्रतिक्रिया है। हमें इसका अंदाजा उसी वक्त हो जाएगा किकितने मरीजों को दवा (मिसाल के तौर पर रेमडेसिविर) दी गई है, उनमें से कितने की मौत हो गई, कितने की सेहत में सुधार हुआ, इन मरीजों की उम्र कितनी है, इनमें कितने स्त्री-पुरुष हैं और पहले से किसी अन्य बीमारी से ग्रस्त लोगों की इलाज को लेकर क्या प्रतिक्रिया है?'

ऐसे वक्त में जब महामारी व्यापक पैमाने पर फैल रही है और मरीजों की सहमति से प्रयोगात्मक इलाज हो रहा है तो इससे संभवत: क्लीनिकल परीक्षणों के डेटा के लिए लंबे समय तक इंतजार करने की जरूरत कम हो सकती है। एनडीएचएम की योजना एक पूर्ण डिजिटल स्वास्थ्य तंत्र के रूप में तैयार की गई है जिसमें विशिष्ट स्वास्थ्य आईडी (स्वैच्छिक भागीदारी के जरिये) व्यक्तिगत स्वास्थ्य का डिजिटल रिकॉर्ड और डॉक्टरों, अस्पतालों, डायग्नॉस्टिक लैब और दवा के दुकानों के लिए एक पंजीकरण शामिल होगा। इसमें चार प्रमुख आधार होंगे मसलन स्वास्थ्य से जुड़ी आईडी (जो सरकारी अधिकारियों के मुताबिक आधार शैली की संख्या के बजाय यूपीआई आईडी से मिलता-जुलता होगा) निजी स्वास्थ्य रिकॉर्ड (पीएचआर), डिजी-डॉक्टर और स्वास्थ्य केंद्रों के लिए पंजीकरण। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, 'एक बार ई-फ ार्मेसी के कानूनी और नियामक ढांचे को अंतिम रूप दे दिया जाए तो वे भी इस तंत्र का हिस्सा होंगे। एनडीएचएम अनिवार्य नहीं होगा लेकिन सरकार का मानना है कि इस तंत्र का हिस्सा होने का लाभ यह है कि सब इसकी वजह पर एक मंच पर जुड़ सकते हैं।' लेकिन इस योजना की खास बात यह है कि किसी व्यक्ति के निजी स्वास्थ्य रिकॉर्ड को देखने की अनुमति पाने के लिए उस व्यक्ति की सहमति जरूरी होगी। अधिकारी ने कहा, 'अगर कोई मेरे डेटा तक पहुंचना चाहता है तो एनडीएचएम के साथ पंजीकृत किसी संगठन या व्यक्ति को मेरी अनुमति लेनी होगी।  मुझे एक नोटिफि केशन मिलेगा और यह एक ऐप नोटिफि केशन हो सकता है, एसएमएस के माध्यम से ओटीपी या इंटरैक्टिव वॉयस रिस्पॉन्स भी मिल सकता है।'  कोई व्यक्ति अपनी कुछ जानकारी देखने का ही विकल्प दे सकता है या इसे किसी खास समय तक ही देखने की अनुमति दे सकता है। साथ ही इन ब्योरों तक पहुंच बनाने के विकल्पों को बंद भी किया जा सकता है। बुजुर्र्गों, बच्चों या बेहोश मरीजों से जुड़ी जानकारी के लिए इनसे संबद्ध लोगों की सहमति भी जरूरी होगी। सरकारी अधिकारियों ने यह आश्वासन दिया कि डेटा को कूट रूप में बदला जाएगा और इसे किसी भी केंद्रीय सर्वर में नहीं डाला जाएगा। वरिष्ठ अफ सर इंदु भूषण के नेतृत्व में राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण इसे लागू करेगा।

भूषण ने कहा, 'भारत सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) का प्रमुख केंद्र है, ऐसे में यह काम तो बहुत पहले होना चाहिए था। हम एनडीएचएम को बड़ा सोच रखने, छोटे स्तर पर शुरुआत करने और दायरे में तेजी से विस्तार करने जैसे कदमों के साथ अमल करने की कोशिश कर रहे हैं। हम कुछ प्रायोगिक परीक्षण के साथ इसकी शुरुआत करेंगे और उसके अनुभवों के आधार पर इसके दायरे में विस्तार करेंगे।' उन्होंने कहा किबड़ी चुनौती 'प्रबंधन के बदलाव' की होगी। अस्पताल और डॉक्टरों को एक खास तरीके से काम करने की आदत होती है।

भूषण ने स्पष्ट किया कि आयुष्मान भारत एक अलग योजना है जबकि एनडीएचएम हर भारतीय के लिए है। हालांकि उन्होंने कहा कि पीएमजेएवाई योजना के तहत 1 करोड़ लोगों का इलेक्ट्रॉनिक मेडिकल रिकॉर्ड बन गया है और 23,000 से अधिक अस्पताल इससे जुड़े हुए हैं। इन ब्योरे को भी एनडीएचएम में शामिल किया जाए ताकि एनडीएचएम को शुरुआती गति देने में मदद मिल सके। व्यक्तिगत स्वास्थ्य रिकॉर्ड का ब्योरा एक साथ रखने की वजह से मरीजों को यह सुविधा होगी कि वे पहले के दस्तावेजों के बिना भी स्वास्थ्य केंद्र में जा सकते हैं। डॉक्टरों के लिए इलाज अब आसान हो जाएगा जो पिछले रिकॉर्ड को भी देख पाएंगे। ऐसे में फॉलोअप जांच को भी जरूरी न होने पर टाला जा सकता है।

सरकार के पास टीकाकरण, शिशु मृत्यु दर, प्रसव और मधुमेह, उच्च रक्तचाप और पोषक तत्त्वों की कमी से जुड़ी पुरानी बीमारियों का वृहद स्तर का आंकड़ा होगा जिससे नीति निर्माताओं को अपनी पहल को लक्षित करने में मदद मिलेगी। एनडीएचएम को लेकर अस्पताल और ई-फ ार्मेसी क्षेत्र भी उत्साहित हैं। मुंबई में पीडी हिंदुजा अस्पताल के मुख्य परिचालन अधिकारी जय चक्रवर्ती ने इसे 'प्रगतिशील कदम' बताते हुए  कहाए 'सभी सेवा प्रदाताओं और लाभार्थियों को एक ही मंच पर लाने से न केवल किसी बीमारी की जल्दी पहचान करने बल्कि विशेष रूप से पुरानी बीमारी के इलाज में भी फायदा मिलेगा और यह सबकी जीत होगी। मान लीजिए कि एक मरीज बिना किसी स्वास्थ्य रिकॉर्ड के किसी आपात स्थिति में अस्पताल पहुंचता है। ऐसे में डॉक्टर आसानी से विशिष्ट आईडी के जरिये उनके मेडिकल ब्योरे को देख सकते हैं।'

अधिकारियों ने कहा कि नागरिकों से जुड़े डेटा उनके ही पूर्ण नियंत्रण में होंगे। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी इस योजना के अंतिम संस्करण के अनुसार, इस योजना के प्रमुख स्तंभों में सहमति प्रबंधक, एनोनिमाइजर, निजता संचालन केंद्र (पीओसी) आदि शामिल हैं जिनकी मदद से इस योजना पर अमल किया जाएगा। सहमति प्रबंधक यह सुनिश्चित करेगा कि मरीजों का एकत्र किए गए डेटा पर पूर्ण नियंत्रण हो और वे यह तय कर पाएं कि इसे किसके साथ इसे साझा किया जा सकता है। एनोनिमाइजर स्वास्थ्य डेटा सेट से इसका मिलान करते हुए व्यक्ति की पहचान से जुड़ी सभी जानकारी को हटा देता है और इसे देखने वालों को अनाम डेटा मिलता है। अगर कोई निजी डेटा को देखता है तो पीओसी उसकी निगरानी करेगा, डेटा के लिए दी गई सहमति की समीक्षा करेगा, निजता के पालन के लिए ऑडिट सेवाएं देने के साथ ही गोपनीयता के नियमों के बारे में बताएगा ताकि डिजिटल स्वास्थ्य मिशन तंत्र तैयार किया जा सके। भूषण ने कहा कि इसे बाजार या फ ीस आधारित सेवाएं बनाने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि डेटा को लेकर काफी एहतियात बरती जाएगी और इसके व्यावसायिक मकसद के इस्तेमाल को लेकर सतर्कता बरती जाएगी।

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