बिजनेस स्टैंडर्ड - एमएसएमई को ऋण पुनर्गठन का एक और मौका
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एमएसएमई को ऋण पुनर्गठन का एक और मौका

सोमेश झा और शुभायन चक्रवर्ती / नई दिल्ली August 06, 2020

सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) को गुरुवार को आरबीआई से एक अन्य राहत मिली। आरबीआई ने कोविड-19 महामारी से प्रभावित छोटे व्यवसायियों के लिए ऋणों के पुनर्गठन की अनुमति दी है। 1 मार्च 2020 तक गैर-निष्पादित आस्तियों (एनपीए) से बचे रहे और 'स्टैंडर्ड' अकाउंट के तौर पर चिन्हित एमएसएमई को अब उस योजना का लाभ मिलेगा, जिसे 1 मार्च 2021 से लागू किया जाएगा। यह 31 दिसंबर 2020 तक योजना का विस्तार है, जो 1 जनवरी 2020 तक स्टैंडर्ड खातों के लिए मान्य थी।

यह कदम महत्वपूर्ण है क्योंकि एमएसएमई ऋण खातों के एनपीए में फंसने की आशंका अन्य की तुलना में काफी ज्यादा बढ़ गई है। पिछले महीने जारी अपनी वित्तीय स्थायित्व रिपोर्ट में आरबीआई ने कहा था कि एमएसएमई सेक्टर महामारी के दौरान नकदी प्रवाह के अभाव से प्रभावित हुआ है।

भारतीय उद्योग परिसंघ के अध्यक्ष उदय कोटक ने कहा, 'पुनर्गठन से एमएसएमई क्षेत्र को जरूरी राहत मिलेगी। एमएसएमई को कोविड-19 की वजह से व्यापक प्रभाव का सामना करना पड़ा है। उन्हें आपूर्ति शृंखला और कारोबारी समस्याओं से जूझना पड़ा।'

हालांकि, सिर्फ जीएसटी के तहत पंजीकृत और 1 मार्च, 2020 तक 25 करोड़ रुपये तक की उधारी वाले एमएसएमई को ही इस योजना में शामिल किया जाएगा।

आरबीआई द्वारा 6 अगस्त को जारी सर्कुलर में कहा गया है, 'स्टैंडर्ड के तौर पर वर्गीकृत कर्जदारों के परिसंपत्ति वर्गीकरण को बरकरार रखा जा सकता है, जबकि 2 मार्च 2020 और क्रियान्वयन की तारीख के बीच एनपीए श्रेणी में शामिल हुए खातों को पुनर्गठन योजना के क्रियान्वयन की तारीख को 'स्टैंडर्ड ऐसेट' के तौर पर अपग्रेड किया जा सकेगा।'

मौजूदा पुनर्गठन योजना करीब 900,000 एमएसएमई के लिए लागू थी। 31 जनवरी, 2020 तक 6 लाख से ज्यादा एमएसएमई खातों को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा पुनर्गठित किया गया था। ये खाते 22,650 करोड़ रुपये की राशि से जुड़े हुए थे।

आरबीआई के एक ताजा विश्लेषण से पता चलता है कि एमएसएमई का मोरेटोरियम सुविधा (यानी ऋण अदायगी स्थगन) पाने के संदर्भ में ऋण सेगमेंट में सर्वाधिक योगदान था। एमएसएमई के लिए करीब 65 प्रतिशत बकाया ऋण 30 अप्रैल तक मोरेटोरियम के तहत शामिल थे।

यूनियन बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी राजकिरण राय जी ने कहा कि आरबीआई के इस कदम से एमएसएमई अगले एक-दो वर्षों में सामान्य हालात में लौटने में सक्षम हो जाएंगे। राय ने कहा, 'नीतिगत निर्णय एमएसएमई की कार्य प्रणाली की अच्छी समझ को दर्शाते हैं और पुनर्गठन से एमएसएमई क्षेत्र में एनपीए नियंत्रित करने में बड़ी मदद मिलेगी। इस कदम के साथ साथ सरकार की आपात ऋण व्यवस्था से भी छोटे उद्योगों को ऋण अदायगी के त्वरित दबाव के बगैर अपना व्यवसाय पुन: शुरू करने में मदद मिलेगी।' उन्होंने कहा कि हालांकि कॉरपोरेट खातों का पुनर्गठन कई सुरक्षात्मक उपायों से जुड़ा होगा, वहीं एमएसएमई के लिए यह योजना ज्यादा उदार है। भारतीय सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम संघ (एफआईएसएमई) का कहना है कि कई लेनदारों के प्रतिस्पर्धी दावों की वजह से पुनर्गठन या परिसमापन प्रक्रिया नुकसान में चल रहे एमएसएइर्म के लिए कठिन हो जाएगी, क्योंकि वे भागीदार कंपनियों में दिवालिया नियमों के अभाव में एमएसएमई परिसंपत्तियों पर नियंत्रण चाहेंगे।

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