बिजनेस स्टैंडर्ड - एचडीआईएल की राह नहीं आसान
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एचडीआईएल की राह नहीं आसान

देव चटर्जी और राघवेंद्र कामत / मुंबई 08 06, 2020

अदाणी प्रॉपर्टीज, सनटेक रियल्टी और दिलीप सांघवी की फर्म सुरक्षा ऐसेट रीकंस्ट्रक्शन कंपनी जैसी दिग्गजों का ध्यान आकर्षित करने वाली रियल एस्टेट फर्म एचडीआईएल को शायद ही अच्छी पेशकश मिल सकती है क्योंकि रियल एस्टेट क्षेत्र में मंदी है, कानूनी प्रक्रिया चल रही है और उसके प्रवर्तक हिरासत में हैं।

अपने साथ पीएमसी बैंक का मटियामेट करने वाली कंपनी कानूनी कार्रवाई का सामना कर रही है क्योंकि उसकी ज्यादातर परियोजनाएं या तो डीएचएफएल या पीएमसी बैंक के पास बंधक है, जो खुद भी वित्तीय संकट का सामना कर रही है। समूह की कई रियल एस्टेट परियोजना व जमीन मुंबई में है, जिसे नई कंपनियां ले सकती हैं लेकिन इसके लिए जरूरी है कि वह कानूनी कार्यवाही से मुक्त हो।

एक बोलीदाता ने कहा, पूरी प्रक्रिया शुरुआती चरण में है और हमने अभी सिर्फ अभिरुचि पत्र दिया है। आंकड़ों तक पहुंच के बाद हमेंं काफी हद तक स्पष्टता मिल जाएगी। हम यह देखना चाहते हैं कि कंपनी में क्या बचा हुआ है। एचडीआईएल, डीएचएफएल और पीएमसी बैंक के विभिन्न प्रवर्तक व निदेशक (जो एक दूसरे से संबंधित हैं) पहले ही प्रवर्तन निदेशालय, सीबीआई और स्थानीय पुलिस की जांच का सामना कर रहे हैं। जांच तब शुरू हुई जब कई भारतीय बैंकों/म्युचुअल फंडों और पीएफ निकाय ने डीएचएफएल में 88,000 करोड़ रुपये गंवा दिए और जमाकर्ताओं की पूरी बचत पीएमसी बैंक में डूब गई। फॉरेंसिक ऑडिट से जुड़े एक अंकेक्षक ने कहा, तीन इकाइयों एचडीआईए, डीएचएफएल और पीएमसी बैंक के बीच कई जटिल लेनदेन हुए हैं, जिसकी जांच में एजेंंसियों को कई माह लग जाएंगे।

रियल एस्टेट के एक कंसल्टेंट ने कहा, मौजूदा कानूनी जटिलताओं के कारण एचडीआईएल की परियोजनाओं के लिए किसी मूल्यांकन पर पहुंचना मुश्किल है। ज्यादातर परियोजनाएं डीएचएफएल के पास बंधक है, जो खुद दिवालिया कार्यवाही का सामना कर रही है। बोलीदाताओं ने अभिरुचि पत्र सिर्फ यह जानने के लिए जमा कराई है कि परियोजना में कितनी जान बाकी है।

एचडीआईएल और पीएमसी बैंक के संबंधों का खुलासा तब हुआ जब आरबीआई ने सितंबर 2019 में बैंक पर मोरेटोरियम लगा दिया। आरबीआई की जांच में पाया गया कि बैंक ने एचडीआईएल को 6,500 करोड़ रुपये उधार दिए हैं, जो पहले ही कर्ज के भुगतान में चूक कर चुकी है। उसके बाद मोरेटोरियम लगा दिया गया।

एचडीआईएल ने डीएचएफएल व पीएमसी बैंक से रकम जुटाए। जांच में पाया गया कि इन इकाइयों के एकसमान निदेशक थे। पीएमसी बैंक के पूर्व चेयरमैन वरयम सिंह एचडीआईएल के पूर्व निदेशक थे और सितंबर 2017 तक एचडीआईएल में उनकी 1.91 फीसदी हिस्सेदारी भी थी। इसके कुछ महीने बाद रियल एस्टेट कंपनी को लेनदारों ने दिवालिया अदालत में घसीट लिया।

अप्रैल 2015 में सिंह एचडीआईएल के बोर्ड से निकल गए और बैंक के चेयरमैन बन गए, जिसने एचडीआईएल को अंधाधुंध तरीके से कर्ज देना शुरू कर दिया। अगस्त 2019 में पीएमसी बैंक ने एचडीआईएल को 100 करोड़ रुपये अतिरिक्त कर्ज दिया ताकि कंपनी बैंक ऑफ इंडिया का कर्ज एकमुश्त भुगतान योजना के तहत चुका सके। अगर एकमुश्त भुगतान को मंजूरी मिल गई होती तो एचडीआईएल बैंक ऑफ इंडिया की आईबीसी प्रक्रिया से बाहर होती। दिलचस्प रूप से इस साल फरवरी में एयॉन कैपिटल, अदाणी कैपिटल, हीरो फिनकॉर्प और केकेआर क्रेडिट एडवाइजर्स व ब्लैकस्टोन समेत कई स्थानीय व विदेशी वित्तीय संस्थानों डीएचएफएल के लिए अभिरुचि पत्र जमा कराए। लेकिन कानूनी जटिलताओं व कोविड महामारी के कारण किसी ने बोली नहीं लगाई।


अदाणी गैस का कर पूर्व लाभ घटा

अदाणी गैस का कर पूर्व लाभ जून 2020 तिमाही में 49 फीसदी घटकर 62.58 करोड़ रुपये रह गया। कोविड-19 की रोकथाम के लिए किए गए देशव्यापी लॉकडाउन के कारण कंपनी के कारोबार को झटका लगा। एक साल पहले की अप्रैल से जून की अवधि के लिए कंपनी का कर पूर्व लाभ 122.7 करोड़ रुपये रहा था। तिमाही के दौरान कंपनी का कर बाद लाभ भी 42 फीसदी घटकर 46.33 करोड़ रुपये रह गया। जबकि एबिटा 41 फीसदी घटकर 86 करोड़ रुपये रह गया। तिमाही के दौरान शहरी गैस वितरण को भी झटका लगा और मात्रात्मक बिक्री 53 फीसदी घट गई। बीएस

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