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शिलान्यास में समावेशी हिंदुत्व के दर्शन

अर्चिस मोहन /  08 03, 2020

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार दोपहर अयोध्या में प्रस्तावित राम मंदिर का शिलान्यास और भूमि पूजन करेंगे। कोविड-19 के साये में हो रहे इस कार्यक्रम में शिरकत नहीं कर पाने वाले राजनेताओं की फेहरिस्त लंबी होती जा रही है क्योंकि वे  क्वारंटीन हैं।

इस कार्यक्रम के लिए 175 लोगों को आमंत्रित किया गया है और 2,000 स्थानों की मिट्टी तथा 1,500 स्रोतों का जल लाया गया है। इनका चयन बहुत सोच समझकर किया गया है, ताकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की भारतीय इतिहास की व्याख्या और उसकी समावेशी हिंदुत्व को उजागर करने की कोशिश को दर्शाया जा सके।

यह मौका कुछ लोगों को उस मुहिम के कमजोर पडऩे की फिर से याद दिलाएगा, जो धर्मनिरपेक्ष भारत के निर्माण के लिए 1947 में शुरू हुई थी। वहीं संघ परिवार के समर्थकों के लिए राम मंदिर का निर्माण 492 साल के 'राष्ट्रीय अपमान और शर्म' के अंत का प्रतीक होगा, जो इस जगह पर 1528-29 में मुगल शासक बाबर के सेनापति के बाबरी मस्जिद के निर्माण से शुरू हुआ था। हिंदू भीड़ ने 6 दिसंबर, 1992 को यह मस्जिद ढहा दी थी। सर्वोच्च न्यायालय ने पिछले साल 9 नवंबर के अपने आदेश में राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ कर दिया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को अयोध्या पहुंचकर तैयारियों का जायजा लिया। वह बुधवार दोपहर इस धार्मिक शहर में होने वाले कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के साथ मंच साझा करेंगे। मोदी राम मंदिर के निर्माण की प्रतीकात्मक शुरुआत के लिए चांदी 40 किलोग्राम की सिल्ली से शिलान्यास करेंगे। राम मंदिर 1989 से ही भाजपा के मुख्य एजेंडे में शामिल रहा है। राम मंदिर आंदोलन भाजपा की वैचारिक सहयोगी विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने 1984 में शुरू किया था।  आदित्यनाथ प्रभावशाली गोरखनाथ मठ के महंत हैं। उनके दो पूर्ववर्तियों, विशेष रूप से महंत दिग्विजय नाथ (1894-1969) ने राम जन्मभूमि आंदोलन में अहम भूमिका निभाई। वर्ष 1949 में उन्होंने अयोध्या में एक सप्ताह तक रामायण का पाठ कराया और कुछ दिनों के भीतर ही राम लला की मूर्ति बाबरी मस्जिद में प्रकट हो गई। आदित्यनाथ के समर्थक पहले ही उन्हें मोदी के उत्तराधिकारी के रूप में देखते हैं। राम मंदिर निर्माण की शुरुआत के साथ ही उनका मार्च 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में फिर से जीत हासिल करने का चुनावी अभियान शुरू हो जाएगा। मंच पर मोदी और योगी के अलावा उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत और राम मंदिर ट्रस्ट के प्रमुख महंत नृत्य गोपाल दास मौजूद रहेंगे।

रोचक बात यह है कि भारतीय जनता पार्टी का अन्य कोई मुख्यमंत्री या केंद्रीय मंत्री कार्यक्रम में शामिल नहीं होगा। करीब तीन दशकों तक राम लला के वकील केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने खुद को क्वारंटीन कर लिया है। उन्होंने कहा कि वह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिले थे। गृह मंत्री को कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद रविवार को अस्पताल में भर्ती कराया गया। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा भी अस्पतालों में क्वारंटीन हैं।

राम जन्मभूमि आंदोलन के अन्य अगुआ भी कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे। भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी के कार्यक्रम में ऑनलाइन शामिल होने की संभावना है। उमा भारती ने कहा कि वह उस दिन अयोध्या में मौजूद रहेंगी, लेकिन कार्यक्रम में शिरकत नहीं करेंगी। हालांकि यह पता नहीं चला कि उन्हें आमंत्रित किया गया था या नहीं।

विहिप के चंपत राय ने कहा कि कार्यक्रम में 135 संतों समेत 175 लोगों को आमंत्रित किया गया है। राय राम मंदिर न्यास के महासचिव भी हैं। अहम बात यह है कि सिख, जैन और बौद्ध, कबीर पंथी, रविदास, लिंगायत और आदिवासी परंपराओं के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रण पत्र भेजे गए हैं। इसका मकसद सभी जातियों, विशेष रूप से दलित और अन्य पिछड़े वर्गों की परंपराओं को गले लगाकर समावेशी हिंदुत्व को दर्शाना है।

राय ने कहा कि अयोध्या मामले में मुस्लिम पक्षकारों में से एक रहे इकबाल अंसारी को पहला न्योता भेजा गया था जिस मामले में उच्चतम न्यायालय ने पिछले साल 9 नवंबर को फैसला सुनाया था। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने बुधवार को मूर्ति को हरे रंग का कपड़ा पहनाने को लेकर हुए विवाद को खारिज कर दिया। राय ने कहा कि यह पुरानी परंपरा है कि मूर्ति को सप्ताह के दिन के हिसाब  से रंग-बिरंगे कपड़े पहनाए जाते हैं और बुध (बुध ग्रह) का रंग हरा होता है। आयोजन और उसके बाद होने वाले समारोहों के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। विहिप ने दुनिया भर के हिंदुओं से कहा है कि वे बुधवार को दीया जलाकर इस दिन को दिवाली के उत्सव के रूप में मनाएं। अयोध्या में रहने वाले लोग सोमवार से दीया जलाकर रोशनी करेंगे।

भूमि पूजन में 1,500 धार्मिक और ऐतिहासिक स्थानों की मिट्टी और 2000 स्रोतों के पानी का उपयोग किया किया जाएगा जिसमें सभी प्रमुख नदियां, झीलें और तालाब शामिल हैं। हल्दी घाटी जैसे स्थानों से मिट्टी एकत्र की गई है जहां 16वीं शताब्दी में राजपूत राजा राणाप्रताप और सम्राट अकबर के बीच जंग हुई थी। इसके अलावा  स्वर्ण मंदिर,  वाराणसी के रविदास मंदिर, भीमराव आंबेडकर से जुड़े स्थल और नागपुर में संघ के मुख्यालय की मिट्टी भी ली गई है। मंदिर निर्माण के लिए पूर्ववर्ती राम जन्मभूमि ट्रस्ट की ओर से नए मंदिर ट्रस्ट को 10 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए गए हैं। महंत कमल नयन दास ने बताया कि चंदा मिला है। ट्रस्ट से जुड़े एक संत ने कहा कि भवन के निर्माण की लागत सार्वजनिक नहीं की गई है लेकिन इसमें कई सौ करोड़ रुपये खर्च होंगे। बुधवार को भूमि पूजन के बाद विहिप कार्यकर्ता देश भर में 10 करोड़ परिवारों से 100 रुपये का चंदा मांगेंगे। अहमदाबाद के एक वास्तुकार परिवार ने इस मंदिर का डिजाइन तैयार किया है। तत्कालीन विहिप प्रमुख अशोक सिंघल ने चंद्रकांत सोमपुरा से संपर्क किया था जिन्होंने 30 साल पहले राम मंदिर का डिजाइन तैयार किया था। प्रस्तावित मंदिर के निर्माण के लिए अधिक भूमि उपलब्ध होने की वजह से उनके बेटे आशिष और निखिल सोमपुरा ने पिछले महीने मंदिर का विस्तारित डिजाइन प्रस्तुत किया जहां एक साल में 40 लाख से ज्यादा लोग आ सकेंगे और किसी भी वक्त वहां 10,000 से 15,000 लोगों के पहुंचने पर भी कोई परेशानी नहीं होगी।

इस नए संशोधित डिजाइन में मंदिर की ऊंचाई 161 फुट, लंबाई 313 फुट और चौड़ाई 118 फुट होगी। इसके फर्श का क्षेत्रफल 28,000 वर्ग फुट होगा। यह पूरा परिसर एक लाख वर्ग फुट क्षेत्र में फैला रहेगा। हिंदू मंदिरों की नागर शैली में निर्मित इस मंदिर में भूतल और दो मंजिलें होंगी जिसे राजस्थान में भरतपुर के बंसी पहाड़पुर कहे जाने वाले गुलाबी बलुआ पत्थर से निर्मित किया जाएगा। नागरिक और निर्माण कार्य का जिम्मा लार्सन ऐंड टुब्रो संभालेगी। यह मंदिर वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले पूरा किया जाना है। भूतल में राम मंदिर होगा, जबकि पहली मंजिल पर भगवान राम का दरबार, सीता, लक्ष्मण और हनुमान विराजेंगे। इसमें हिंदू देवताओं की छवियों वाले नक्काशीदार 360 स्तंभ भी होंगे। अयोध्या में 104 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले मंदिर के प्रारूप पर आधारित एक नए रेलवे स्टेशन को भी मंजूरी दी गई है। उत्तर प्रदेश के मंत्री श्रीकांत शर्मा ने कहा कि राम मंदिर से अयोध्या की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार पैदा पैदा होगा।

इस बीच छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार ने पिछले कुछ दिनों के दौरान मंदिरों के निर्माण और रामायण से जुड़े तीर्थ स्थलों के रूप में विकसित करने के लिए कई परियोजनाओं को मंजूरी दी है। राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रायपुर के पास भगवान राम की माता कौशल्या के मंदिर निर्माण की घोषणा की है। उन्होंने राम वन गमन पथ वाले स्थानों के विकास की भी घोषणा की है। ये वे स्थान हैं जहां राम, सीता और लक्ष्मण अपने वनवास के दौरान गए या ठहरे थे। इनमें से कई स्थान छत्तीसगढ़ में हैं।

कांग्रेस ने कहा है कि उसके नेता राजीव गांधी ने श्रद्धालुओं के लिए राम जन्मभूमि के द्वार खोले थे और वहां मंदिर के शिलान्यास की भी बात की थी।


इकबाल अंसारी को भी न्योता

अयोध्या में राम जन्मभूमि पर बनने वाले मंदिर के भूमि पूजन कार्यक्रम का न्योता बाबरी मामले के पक्षकार रहे हाजी इकबाल अंसारी को भी भेजा गया है। उडुपी मठ, मंदिर मामले में पक्षकारों से अलग राय रखने वाले महंत धर्मदास सहित कई अन्य को भी कार्यक्रम में आंमत्रित किया गया है। कार्यक्रम के आयोजक राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सोमवार सुबह हाजी इकबाल अंसारी को 5 अगस्त में होने वाले कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया है।

सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या पहुंचे और वहां की तैयारी का जायजा लिया। भूमि पूजन के लिए कई धार्मिक कार्यक्रमों का शुरुआत सोमवार से हो गई है। मुख्यमंत्री ने रामभक्तों से अपील भी की है कि वह इस कार्यक्रम को अपने घरों में रहकर टेलीविजन पर ही देखें और कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए अयोध्या में न जुटें। बीएस

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