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विधायकों को बचाने की जुगत

आदिति फडणीस /  07 31, 2020

राजस्थान में बढ़ते सियासी संकट के बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के समर्थक विधायकों को जयपुर से लगभग 500 किलोमीटर दूर जैसलमेर में चार्टर्ड विमान के जरिये भेजा गया है। ये विधायक 13 जुलाई से जयपुर के एक लक्जरी रिसॉर्ट में रह रहे थे। हालांकि इस बारे में कोई स्पष्टता नहीं है कि चार्टर्ड विमान या सूर्यगढ़ रिसॉर्ट के बिल का भुगतान कौन कर रहा है जहां वे रह रहे हैं । इन विधायकों को 14 अगस्त से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र की पूर्व संध्या तक जैसलमेर में रखा जाएगा।

गहलोत ने गुरुवार की रात संवाददाताओं से कहा, 'विधानसभा सत्र की घोषणा के बाद खरीद.फरोख्त की दरों में वृद्धि हुई है । पहले यह किस्त 10 करोड़ रुपये थी और दूसरी 15 करोड़ रुपये थी। अब उनसे पूछा जा रहा है कि हमें बताएं कि आप क्या चाहते हैं । इसका मतलब यह है कि अब दर 25 ;करोड़ रुपयेद्ध से भी ज्यादा हो गई  है।'

अब तक 54 विधायकों को भेजा जा चुका है और बाकी को भी भेजा जाएगा। हालांकि मंत्री जयपुर में ही रहेंगे। विधायकों के जैसलमेर रवाना होने से पहले गहलोत ने जयपुर में विधायक दल की बैठक बुलाई और विधायकों से कहा कि उन्हें कई तरह की पेशकश की जाएगी लेकिन उन्हें उनकी अनदेखी करनी चाहिए क्योंकि उनकी सरकार बनी रहेगी। विधायक प्रशांत बैरवा ने बताया, 'हम जैसलमेर थोड़ा बदलाव के लिए जा रहे हैं।' पूर्व विधायक बद्रीराम जाखड़ ने जैसलमेर में संवाददाताओं से बातचीत में सचिन पायलट खेमे के सभी विधायकों के लिए अपील जारी कि वे वापस लौट आएं। जाखड़ ने कहा, 'अब भी देर नहीं हुई है। पायलट अब भी वापस आ सकते हैं।'

विधायकों को दूसरी जगह भेजने का तत्काल कदम इस आशंका से उठाया गया कि गहलोत खेमे के कम से कम 10 विधायक पायलट के संपर्क में हैं। इनमें महेंद्र विश्नोई (जोधपुर के नजदीक लुनी के विधायक), प्रशांत बैरवा (निवाई के विधायक), दानिश अबरार (सवाई माधोपुर के विधायक) और चेतन दुडी (डिडवाना के विधायक) शामिल हैं। इन सबमें एक सामान्य बात यह है कि इन्हें 2018 के विधानसभा चुनावों में सचिन पायलट के उम्मीदवार के तौर पर चुना गया था और इन्होंने बड़े अंतर से अपने निर्वाचन क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी को हराया था। मिसाल के तौर पर दानिश अबरार ने भाजपा की आदिवासी उम्मीदवार आशा मीणा को 25,000 लोटों के अंतर से हराया था जो विधानसभा चुनाव के लिहाज से बड़ा अंतर है। अबरार पूर्व केंद्र मंत्री अबरार अहमद के बेटे हैं और इन्होंने ब्रिटेन के एक विश्वविद्यालय से एमबीए किया है। चेतन दुडी ने भाजपा के एक मुस्लिम उम्मीदवार को 40,000 वोटों के अंतर से हराया था। प्रशांत बैरवा ने भाजपा के अपने प्रतिद्वंद्वी को 43,000 वोटों के अंतर से हराया।

इन सभी लोगों ने पहले इस बात से इनकार किया था कि वे सचिन के खेमे से जुड़ रहे हैं। लेकिन गहलोत खेमे के लोग इनकी वफ ादारी को लेकर हमेशा संदेह में रहे हैं। जब पहली बार राजस्थान संकट शुरू हुआ तब गहलोत ने इनसे बात की थी और कहा था कि पायलट भाजपा से जुड़ रहे हैं और अगर वे पायलट से जुड़ते हैं तो उनका राजनीतिक भविष्य अधर में लटक जाएगा। जैसलमेर में विधायकों को भेजना एक सोची समझी रणनीति है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि गहलोत खेमा एकजुट रहे।

राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र और मुख्यमंत्री गहलोत के बीच हाल में गतिरोध और गहरा गया जब राज्यपाल ने गहलोत के 31 जुलाई को विधानसभा का सत्र बुलाने के अनुरोध को नकार दिया। राज्यपाल ने कहा कि राजस्थान विधानसभा के नियमों के मुताबिक सभी विधायकों को 21 दिन का नोटिस दिया जाना चाहिए। उन्होंने राज्य सरकार से कहा कि वह इतने कम समय में विधानसभा सत्र बुलाने के पीछे के कारण बताए। हालांकि इसके बाद उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में 21 दिन के नोटिस के साथ मॉनसून सत्र बुलाना ही उचित होगा।


विधायक अयोग्यता मामले में जोशी शीर्ष अदालत पहुंचे

राजस्थान के बर्खास्त उपुख्यमंत्री सचिन पायलट सहित कांग्रेस के 19 बागी विधायकों के मामले में उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ राजस्थान कांग्रेस के मुख्य सचेतक महेश जोशी ने शुक्रवार को शीर्ष अदालत में याचिका दायर की। उच्च न्यायालय ने इन विधायकों के मामले में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। पार्टी के मुख्य सचेतक महेश जोशी ने विधान सभा अध्यक्ष सी पी जोशी द्वारा उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने के दो दिन बाद याचिका दायर की है। अधिवक्ता वरुण चोपड़ा के माध्यम से दायर इस याचिका में कहा गया है कि संविधान की शीर्ष अदालत के किहोता होलोहान प्रकरण में 1992 में दी गई व्यवस्था के आलोक में उच्च न्यायालय की यह कार्यवाही असंवैधानिक और गैर कानूनी थी। उच्चतम न्यायालय ने 1992 को अपने फैसले में कहा था कि अयोग्यता की कार्यवाही पर निर्णय लेने का अधिकार अध्यक्ष को है और इसमें न्यायिक हस्तक्षेप की इजाजत नहीं है।

राज्य में कांग्रेस की सरकार बर्खास्त उपमुख्यमंत्री पायलट और 18 अन्य विधायकों की बगावत के बाद राजनीतिक संकट से जूझ रही है। कांग्रेस सरकार का कहना है कि वह विधानसभा सत्र आयोजित कराना चाहती है ताकि सरकार अपना बहुमत साबित कर सके। राज्य के राज्यपाल कलराज मिश्र ने भी कहा था कि वह संवैधानिक मर्यादा का पालन करेंगे और किसी प्रकार के दबाव में वह कोई कदम नहीं उठाएंगे।

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