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भारत में शेयर बाजार ही सिर्फ आर्थिक मजबूती का पैमाना नहीं

पुनीत वाधवा /  July 26, 2020

बीएस बातचीत

फर्स्‍ट ग्लोबल के वाइस-चेयरमैन एवं संयुक्त प्रबंध निदेशक शंकर शर्मा ने पुनीत वाधवा के साथ साक्षात्कार में कहा कि भारतीय निवेशकों के लिए यह समय दुनियाभर में मौजूद अवसरों के तौर पर वैश्विक बाजारों पर विचार करने और बदलाव लाने का है। पेश हैं उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश:

मार्च के निचले स्तरों से आई भारी तेजी के बाद क्या भारतीय बाजार अब मजबूत होंगे?

दरअसल, भारतीय बाजारों में कुछ वैश्विक प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले कम तेजी आई है। भारत वैश्विक तेजी का हिस्सा रहा है और अभी भी अपने सर्वाधिक ऊंचे स्तरों से नीचे बना हुआ है। ताइवान और अमेरिका तथा स्विटजरलैंड जैसे कुछ अन्य बाजार आगे हैं। इसके अलावा तेजी की अच्छी गुंजाइश है। लेकिन मैं नहीं मानता कि भारत वैश्विक बाजारों में सामान्य बढ़त बनाए रखेगा। तेजी को घरेलू घटनाक्रम के बजाय वैश्विक कारकों से मदद मिलेगी। हालांकि तेजी की रफ्तार वैश्विक बाजारों की तुलना में अलग हो सकती है।

घरेलू तौर पर, तेजी आय वृद्घि के अभाव में दर्ज की गई। क्या इसे लेकर आप चिंतित हैं?

भारत पिछले कई वर्षों से वैश्विक बाजार के सूचकांकों के मुकाबले कमजोर रहा है। 2019 में, वैश्विक बाजार औसत करीब 30 प्रतिशत ऊपर थे। हम उत्साहित बने रहेंगे, लेकिन कई वर्षों से भारतीय इक्विटी से दीर्घावधि प्रतिफल सावधि जमा (एफडी) प्रतिफल से नीचे रहा है। हालांकि यह मानना सही है कि बाजारों ने अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन यदि आप बारीकी से देखें तो पता चलता है कि यहां प्रतिफल एफडी दर से नीचे रहा है। यह एक प्रमुख समस्या है। प्रदर्शन के संदर्भ में भारत कई वैश्विक प्रतिस्पर्धियों (रुपये और डॉलर, दोनों के संदर्भ में) से पीछे रहा है।

इसलिए, निवेशक को कहां निवेश करना चाहिए?

यह समय वैश्विक बाजारों पर विचार करने और विविधता लाने का है। दुनियाभर में अवसर मौजूद हैं। ऐसा नहीं है कि भारत में अवसर नहीं हैं, लेकिन इनमें कुछ समय से कमी आई है, खासकर पिछले चार-पांच वर्षों में कई झटके लगे हैं। नीतिगत मोर्चे पर हाल के वर्षों के दौरान क्षेत्रों ने बड़े झटकों का अनुभव देखा है। निवेशकों को अपनी पूंजी का कम से कम 30 से 50 प्रतिशत हिस्सा विभिन्न बाजारों, परिसंपत्ति वर्गों, और दुनियाभर में मौजूद निवेश योजनाओं में आजमाना चाहिए। न सिर्फ दूसरे देश के ईटीएफ या अन्य फंड ही न खरीदें। यह उचित मार्गदर्शन और सलाह के साथ करें। वैश्विक निवेश बेहद जटिल है, लेकिन यदि आप सही तरीके से इसे करते हैं तो वाकई फायदेमंद है। निवेशकों को अपना पूरा निवेश एक देश में नहीं लगाना चाहिए। निवेशकों को एससीसीएआरएस (एक देश, एक मुद्रा, एक परिसंपत्ति जोखिम) से बचने की जरूरत है।

क्या ग्रामीण अर्थव्यवस्था हमें आर्थिक दबाव से निकालने में पूरी तरह सक्षम है?

ग्रामीण अर्थव्यवस्था ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया है और हमें इसकी सराहना करनी चाहिए। यह अर्थव्यवस्था का ऐसा सेगमेंट है जिसने 2008 की मंदी में भारत की मदद की। शहरी भारत हाई बीटा बाजार है, क्योंकि यह प्रत्यक्ष रूप से आर्थिक चक्रों से जुड़ा हुआ है। दूसरी तरफ, ग्रामीण भारत की रफ्तार मजबूत है और इसमें शहरी सेगमेंट जैसी बड़ी कमजोरी नहीं आती है। मेरा मानना है कि ग्रामीण भारत हमें इस दौर से बचाएगा।

क्या आप कोविड-19 महामारी को देखते हुए बाजारों में कुछ ही कंपनियों के लिए आर्थिक वद्घि की उम्मीद कर रहे हैं?

आर्थिक वृद्घि कोविड-19 से पूर्व के समय में भी कुछ ही कंपनियों तक केंद्रित थी। सभी के लिए पर्याप्त वृद्घि नहीं दिख रही है। वृद्घि कुछ कंपनियों तक सीमित है। इसलिए, भारतीय बाजारों का उभार सिर्फ आर्थिक वृद्घि के लिए मापक नहीं माना जा सकता। दरअसल, भारत में शेयर बाजार आर्थिक संक्रेदण के मापक से कहीं आगे है।

महामारी से आय सुधार की रफ्तार कितनी प्रभावित हुई है?

इस साल आय वृद्घि के बारे में बात करना अभी जल्दबाजी है। पिछले कुछ वर्षों से कई अनुमान गलत साबित हुए हैं। हम दरअसल, आय कटौती/अनुमान में कमी पर नजर लगाए हुए हैं, लेकिन यह सब लॉकडाउन और उसके पूरी तरह खुलने की रफ्तार पर निर्भर करेगा।

पिछले कुछ महीनों के दौरान आपकी निवेश रणनीति कैसी रही है?

भारत मेंहमारी पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवा (पीएमएस) योजनाएं देश में साल में अब तक (वाईटीडी) आधार पर श्रेष्ठ प्रदर्शन वाली पीएमएस योजनाएं रही हैं। हमारी योजनाएं बाजार में कमजोरी के बावजूद मजबूत रही हैं। इसकी वजह यह थी कि हमने मार्च 2020 के ज्यादातर नुकसान से दूरी बनाई, क्योंकि हम संकट की कुछ हद तक आशंका थी। अप्रैल से, हमने भारत के साथ साथ वैश्विक तेजी में पूरी तरह से हिस्सा लिया। हमारे फंडों में, क्षेत्रों के संदर्भ में रसायन और फार्मा ने हमें अच्छा प्रतिफल दिया है। एफएमसीजी क्षेत्र कुछ नरम रहा है। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने सफलता की रफ्तार बरकरार रखी है। मार्च 2020 में, मिड-कैप में तीन साल पहले के ऊंचे स्तरों से करीब 50 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। इसलिए मिड-कैप सूचकांक में तेजी आनी बाकी है। बाजार इस महामारी के दौरान मजबूती से उभरी कंपनियों पर ध्यान दे रहे हैं और हम इन शेयरों पर दांव लगा रहे हैं।

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