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आखिरकार कांग्रेस ने याद किया नरसिंह राव को

अर्चिस मोहन /  July 24, 2020

पूर्व प्रधानमंत्री पी वी नरसिंह राव की जन्मशती के अवसर पर साल भर चलने वाले समारोह की तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की घोषणा के करीब एक महीने बाद कांग्रेस ने भी आजीवन कांग्रेसी रहे अपने दिवंगत नेता को याद करने की योजना बनाई है।

के चंद्रशेखर राव ने गत 28 जून को नरसिंह राव के 99वें जन्मदिवस पर शताब्दी समारोह की घोषणा करने के साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री को भारत रत्न से सम्मानित करने का अनुरोध केंद्र सरकार से किया था। कांग्रेस की तेलंगाना इकाई ने नरसिंह राव को याद करने के लिए 24 जुलाई का तारीख चुनी है जो देश में आर्थिक सुधारों की आधारशिला रखने वाले 1991 के आम बजट की 29वीं सालगिरह भी है। इस बजट को नरसिंह राव सरकार में वित्त मंत्री मनमोहन सिंह ने 24 जुलाई 1991 को शाम पांच बजे लोकसभा में पेश किया था। उसी दिन सरकार ने लाइसेंस एवं परमिट राज का दौर खत्म करने वाली नई औद्योगिक नीति की भी घोषणा की थी।

तेलंगाना कांग्रेस के हैदराबाद में आयोजित एक समारोह में मनमोहन सिंह ने नरसिंह राव को भारत के आर्थिक सुधारों के जनक के साथ ही उन्हें दोस्त, दार्शनिक एवं मार्गदर्शक भी बताया।

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि 1991 के बजट ने भारत को कई मायनों में बदल दिया और यह नरसिंह राव की तरफ से नीतिगत निर्णय लेने के लिए दी गई छूट की ही वजह से संभव हो पाया था। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी इस अवसर पर संदेश भेजे थे जिन्हें कार्यक्रम में पढ़ा गया। सोनिया ने कहा कि कांग्रेस पार्टी नरसिंह राव के योगदानों एवं उपलब्धियों में गर्व महसूस करती है। राहुल ने अपने लिखित संदेश में कहा, 'मुझे आशा है कि यह समारोह हमारे युवाओं के बीच भारत की प्रगति की कहानी एवं इसे संभव बनाने वाले विलक्षण लोगों के बारे में जानने की ललक पैदा करेगा।' तेलंगाना के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष उत्तम कुमार रेड्डी ने राहुल का यह संदेश पढ़कर सुनाया।

पूर्व राष्ट्रपति एवं राव सरकार के अहम मंत्री रहे प्रणव मुखर्जी ने भी इस कार्यक्रम में अपना रिकॉर्ड किया हुआ संदेश भेजा। मुखर्जी ने क्रांतिकारी सुधारों के मामले में राव को जवाहरलाल नेहरू के बाद महज दूसरा प्रधानमंत्री बताते हुए कहा कि चीन के साथ सीमा विवाद के समाधान की दिशा में उठाए गए ठोस कदम भी उनकी बड़ी उपलब्धि थे। इस अवसर पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं पी चिदंबरम एवं जयराम रमेश ने उदारीकरण की राह तैयार करने वाले बजट से जुड़े वाकयों का जिक्र किया। चिदंबरम ने राव के वाणिज्य मंत्री के तौर पर नई व्यापार नीति को दिशा दिखाई थी। जयराम रमेश ने ऑनलाइन संबोधन में कहा कि नरसिंह राव कुछ फैसलों से पूरी तरह सहमत नहीं थे लेकिन मनमोहन सिंह के प्रति उन्हें गहरा विश्वास था। नरसिंह राव सरकार बनने के बाद भाजपा के अटल बिहारी वाजपेयी, समाजवादी नेता चंद्रशेखर और वामपंथी नेता सोमनाथ चटर्जी ने नई सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए थे। उस समय नरसिंह राव ने संस्कृत के अपने गहन ज्ञान का इस्तेमाल इन विपक्षी दिग्गजों को मनाने के लिए किया था। रमेश ने इस वाकये का जिक्र करते हुए कहा कि राव के उस भाषण के बाद विपक्षी नेताओं का अंदाज ही बदल गया था।

रमेश ने कहा कि नरसिंह राव उदारीकरण एवं सुधारों की जड़ें भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता में निहित मानते थे जबकि मनमोहन एवं चिदंबरम समकालीन संदर्भों में बात करते थे। कांग्रेस के भीतर इन नीतियों से असहमत लोगों से राव ने कहा था कि सरकार की नीति निरंतरता के साथ परिवर्तन की है। रमेश ने अपने भाषण में कहा, 'निरंतरता के साथ बदलाव राव का मंत्र बन गया था जिसके मूल में मध्यम मार्ग था। राव ने 1992 की दावोस बैठक में इसका जिक्र भी किया था।' हालांकि राव सरकार ने कभी भी सार्वजनिक क्षेत्र के प्रति निष्ठा नहीं छोड़ी और वित्तीय क्षेत्र के दरवाजे खोलने में सजग रवैया अपनाए रखा।

जयराम रमेश ने वित्त मंत्री के रूप में मनमोहन सिंह के चयन को नरसिंह राव की सबसे बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि दोनों लोगों की बाजार-अनुकूल छवि न होने से उनके द्वारा उठाए गए कदमों को तमाम राजनीतिक घटकों ने स्वीकार किया। दरअसल ये नेता वामपंथी रुझान वाली मध्यमार्गी राजनीति एवं अर्थशास्त्र में यकीन रखते थे। उन्होंने नरसिंह राव और मनमोहन सिंह को 'जुगलबंदी' में काम करने वाले नेता बताते हुए कहा कि राव जहां सुधारों के राजनीतिक पहलुओं का ध्यान रखते थे वहीं मनमोहन इसके तकनीकी पहलुओं को आकार देते थे।

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