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आसान नकदी की लहर पर सवार है शेयर बाजार

समी मोडक और सुंदर सेतुरामन / मुंबई July 22, 2020

दुनिया भर के केंद्र्रीय बैंकों के बड़े प्रोत्साहन उपायों से उत्साहित वैश्विक शेयर बाजार सुनहरे दौर से गुजर रहे हैं। ज्यादातर वैश्विक बाजार मार्च में कोरोनावायरस के डर से आई भारी गिरावट की भरपाई कर चुके हैं। अब बाजार इस साल की शुरुआत के मुकाबले बढ़त पर हैं। बेंचमार्क निफ्टी बुधवार को 11,133 पर बंद हुआ। यह कोविड महामारी और उसके बाद लॉकडाउन के कारण लगे अप्रत्याशित आर्थिक झटके के बावजूद अपने सर्वकालिक उच्च स्तर से महज 10 फीसदी दूर है। भारतीय बाजार मार्च के निचले स्तर से करीब 47 फीसदी चढ़ चुका है। पिछले दो महीनों के दौरान इसमें 27 फीसदी तेजी आई है।

शेयर बाजारों में अचानक बड़ी तेजी इसलिए आई है क्योंकि जी4 देशों के केंद्रीय बैंकों ने बैलेंस शीट का विस्तार किया है, जिससेे वैश्विक वित्तीय प्रणाली में नकदी की उपलब्धता में भारी इजाफा हुआ है। हालांकि इस बारे में चिंता पैदा हुई है कि क्या यूएस फेडरल रिजर्व इस साल तेज विस्तार के बाद अपनी बैलेंस शीट के विस्तार को रोकेगा। फेडरल रिजर्व के इस साल बैलेंस शीट का विस्तार करने से बाजारों को चढऩे में मदद मिली है। हालांकि ऐसा लगता है कि धन की आसान उपलब्धता बनी रहेगी।

यूरोपीय संघ ने मंगलवार को 850 अरब डॉलर के सुधार फंड की घोषणा की। कमजोर आर्थिक माहौल को मद्देनजर फेडरल रिजर्व, बैंक ऑफ जापान और बैंक ऑफ इंगलैंड समेत जी4 के अन्य सहयोगी देशों के भी ऐसा ही कदम उठाने की संभावना है।

मॉर्गन स्टैनली ने एक नोट में अनुमान जताया है कि जी4 देशों के केंद्रीय बैंक वर्ष 2021 के अंत तक अपनी बैंलस शीट में 12 लाख करोड़ डॉलर का इजाफा करेंगे। मॉर्गन स्टैनली ने 15 जुलाई को एक नोट में कहा, 'जी4 देशों के केंद्रीय बैंकों ने धन उपलब्धता में भारी बढ़ोतरी की घोषणा की है। हमारा अनुमान है कि इस चक्र में केंद्रीय बैंक 12 लाख करोड़ डॉलर की परिसंपत्तियां खरीदेंगे। अकेला फेडरल रिजर्व ही 2021 के अंत तक के मौजूदा चक्र में कुल 6.2 लाख करोड़ डॉलर की परिसंपत्तियां खरीदेगा।'

विशेषज्ञों ने कहा कि नोटों की छपाई से वैश्विक वित्तीय बाजारों को एक आधार मिलेगा और विकासशील देशों में तरलता में इजाफा होगा।

मार्सेलस इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के संस्थापक सौरभ मुखर्जी ने कहा, 'केंद्रीय बैंक यह तय कर चुके हैं कि वे अगले दो साल के लिए नोटों की छपाई करेंगे। उनके अर्थव्यवस्थाओं के वित्त पोषण के लिए नोटों की छपाई से पूंजी की लागत में और कमी आएगी। हमारे देश को और अधिक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश मिलेगा, जिससे आर्थिक सुधार में मदद मिलेगी। यह तीन साल का आर्थिक सुधार होगा और यह लगभग पूरे विश्व के लिए सत्य है। बाजारों को अगले तीन साल में आर्थिक सुधार की उम्मीद नजर आ रही है।'

एफपीआई ने मार्च में रिकॉर्ड आठ अरब डॉलर की बिकवाली की थी। उसके बाद इस साल अब तक के निवेश में काफी सुधार आया है। इस समय एफपीआई की निकासी करीब दो अरब डॉलर है। विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी प्रवाह और इक्विटी बाजारों के लिए इस साल अब तक की बढ़त साल के अंत तक धनात्मक स्तर पर आ सकती है।

डाल्टन कैपिटल के निदेशक यूआर भट्ट ने कहा, 'जब मौद्रिक नीति में नरमी से बढऩे वाली नकदी शेयर बाजार में आएगी तो उनके बीच सीधा सह-संबंध स्थापित करना मुश्किल है। मगर अप्रत्यक्ष रूप से धन आर्थिक प्रणाली में आता है, इसलिए शेयरों की कीमतों में तेजी बरकरार रहेगी।' न केवल जी4 बल्कि ब्रिक्स देशों (जिसमें भारत भी शामिल है) के भी आगे और राजकोषीय और मौद्रिक उपायों की घोषणा करने की संभावना है।

भट्ट ने कहा, 'मौद्रिक नीतियो में ढील स्थिति सामान्य होने तक जाारी रहेगी। केंद्रीय बैंकों की ओर से इसमें और नरमी आ सकती है। भारत में केंद्रीय बैंक ने उतनी नरमी नहीं की है लेकिन हमारी वित्तीय स्थिति को देखते हुए यह काफी अहम हैं।'

Keyword: Central Banks, Stimulus Measures, Global Stock Market, केंद्रीय बैंक, प्रोत्साहन उपाय, वैश्विक शेयर बाजार,
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