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अमेरिका के खेमे में भारतीय कंपनियां!

पीरजादा अबरार /  July 19, 2020

चीन-भारत के बीच सीमा विवाद की वजह से बढ़े तनाव के कारण भारतीय कंपनियां अब निवेश और रणनीतिक साझेदारियों के लिए अमेरिकी खेमे की ओर बढ़ रही है। उद्योग के अंदरूनी सूत्रों और विश्लेषकों के अनुसार इन कंपनियों में अमेरिका की दिग्गज तकनीकी कंपनियां मसलन गूगल और फेसबुक के साथ-साथ कई अन्य बड़ी कंपनियों और प्राइवेट इक्विटी फर्म की तरफ  से बड़े निवेश के लिए दिलचस्पी दिखाई गई है। यह हाल के रुझान के बिल्कुल उलट है जब चीन के निवेशक भारत के प्रौद्योगिकी क्षेत्र में गहरी पैठ बना रहे थे। साल 2019 में भारत के तकनीकी स्टार्टअप में करीब 10 अरब डॉलर का पूंजी निवेश किया गया था। विशेषज्ञों के अनुसार इस पूंजी का लगभग 30 फीसदी हॉन्गकॉन्ग सहित चीन के निवेशकों की तरफ  से मिला था। हालांकि, अब इस रुझान में बदलाव आने वाला है क्योंकि उद्योग के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार लद्दाख की गलवान घाटी में जून महीने में भारत-चीन के सैनिकों के बीच झड़प होने के बाद से ही चीन के निवेशक भारत में अपनी निवेश योजनाओं को फि लहाल टाल सकते हैं। इससे पहले भारत ने चीन से निवेश को लेकर पूर्व मंजूरी देने की प्रणाली भी शुरू की थी।

विदेश नीति थिंक टैंक गेटवे हाउस के कार्यकारी निदेशक मंजीत कृपलानी ने कहा, '15 जून (सैनिकों के बीच झड़प वाला दिन) ने सब कुछ बदल दिया है। चीन की इस कार्रवाई की वजह से भारत अब अमेरिका के खेमे में जाने के साथ ही पश्चिमी गठबंधन की ओर बढ़ रहा है। अमेरिका की कंपनियां भारत में तेजी से आ रही हैं ताकि यहां की कंपनियों में निवेश किया जा सके। देश में चीन के बढ़ते पैठ के मुकाबले अमेरिका से मोल-तोल करना बेहतर सौदा है।'

हाल ही में भारत में अमेरिकी कंपनियों द्वारा कई बड़े निवेश किए गए हैं। इसमें गूगल का 10 अरब डॉलर का इंडिया डिजिटाइजेशन फंड और खुदरा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी वॉलमार्ट द्वारा इस महीने ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट में 1.2 अरब डॉलर का अतिरिक्त निवेश शामिल है। फेसबुक ने रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) की डिजिटल इकाई जियो प्लेटफ ॉम्र्स लिमिटेड में अप्रैल महीने में 5.7 अरब डॉलर का निवेश किया था। गूगल ने बुधवार को जियो प्लेटफाम्र्स में 4.5 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की। कुल मिलाकर जियो ने सिल्वर लेक और केकेआर जैसी अमेरिका के प्राइवेट इक्विटी फ र्मों सहित इन निवेशकों से महज 3 महीने में 20 अरब डॉलर जुटाए हैं।  शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी तकनीकी कंपनी बायजू हाल ही में 10 अरब डॉलर से भी ज्यादा की हैसियत वाली कंपनी बन गई और इसने सिलिकॉन वैली की निवेशक मैरी मीकर के बॉन्ड कैपिटल से 10 करोड़ डॉलर से भी कम की नई फ ंडिंग जुटाने के बाद 10.5 अरब डॉलर के मूल्यांकन को पाने में कामयाबी हासिल कर ली। इससे पहले बायजू ने 20 करोड़ डॉलर टाइगर ग्लोबल से और 20 करोड़ डॉलर जनरल अटलांटिक से जुटाए।

विशेषज्ञों ने कहा कि ये निवेश दर्शाते हैं कि वैश्विक भू-राजनीति अब कंपनियों और देशों को एक पक्ष तय करने के लिए मजबूर कर रही है कि वे अमेरिका की तरफ  हैं या चीन की तरफ । इसी फैसले के आधार पर निवेशकों और कंपनियों का प्रौद्योगिकी क्षेत्र में स्वागत किया जा रहा है। भारत में प्रौद्योगिकी निवेश में विशेषज्ञता रखने वाले एक उद्यम विकास निवेशक आयरन पिलर में प्रबंध अधिकारी आनंद प्रसन्ना ने कहा, 'यह स्पष्ट है कि भारत का रुझान अमेरिका की तरफ  है। चीन के खिलाफ  कई बातें पहले से हीं काम कर रही थीं और मौजूदा वैश्विक घटनाओं और सीमा तनाव ने इन पर अमल करने के लिए एक मौका दे दिया है। अमेरिका की कंपनियां अब भारत के बड़े बाजार का इस्तेमाल करने के अवसर के रूप में देख रही हैं जहां उन्हें चीन की प्रतिस्पर्धा के खतरे से भी नहीं जूझना पड़ेगा।'

गेटवे हाउस के निदेशक ब्लेज फ र्नांडिस के अनुसार भारत के डिजिटल बाजार में 45 करोड़ स्मार्टफ ोन उपयोगकर्ता शामिल हैं और कम डेटा खपत लागत तथा तेजी से बढ़ते मध्यम वर्ग की वजह से 2025 तक इनकी तादाद बढ़कर 90 करोड़ होने जा रही है। विश्व आर्थिक मंच की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 2030 तक भारत में उपभोक्ता खर्च 1.5 लाख करोड़ डॉलर से बढ़कर 6 लाख करोड़ डॉलर हो जाएगा जिससे भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार बन जाएगा।

चीन ने पिछले पांच सालों में भारत के प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अपने लिए एक महत्त्वपूर्ण स्थान बनाया था। गेटवे हाउस के मुताबिक भारत को अपनी बेल्ट ऐंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) पर हस्ताक्षर करने के लिए राजी करने में असमर्थ रहने के बाद  चीन ने स्टार्टअप में वेंचर निवेश के माध्यम से भारतीय बाजार में प्रवेश किया था और अपने लोकप्रिय स्मार्टफोन और उनके ऐप्लिकेशन के जरिये ऑनलाइन क्षेत्र में पैठ बनाई थी। अलीबाबा, टेनसेंट और श्याओमी  जैसे चीनी निवेशक भारत के स्टार्ट अप क्षेत्र में सक्रिय हैं और उन्होंने सामूहिक रूप से अरबों डॉलर का निवेश किया है। गेटवे हाउस के मुताबिक भारत के एक अरब डॉलर से अधिक की वैल्यू वाले 30 स्टार्टअप में से 18 चीन की फंडिंग से चलती हैं। चीनी शॉर्ट वीडियो ऐप टिकटॉक के 20 करोड़ सबस्क्राइबर थे और यह भारत में यूट्यूब से आगे निकल गई थी। चीन की दूसरी कंपनियां मसलन अलीबाबा, टेनसेंट और बाइटडांस भारत में फेसबुक, एमेजॉन और गूगल जैसी अमेरिकी कंपनियों की प्रतिद्वंद्वी हैं। पेइचिंग की तकनीकी कंपनी बाइटडांस के स्वामित्व वाली, टिकटॉक  अब अलीबाबा के यूसी ब्राउजऱ और टेनसेंट के वीचैट के साथ उन 51 चीनी ऐप में से एक है जिसे हाल ही में सरकार ने सुरक्षा चिंता का हवाला देते हुए प्रतिबंधित कर दिया था। यह कदम भारत-चीन के बीच तनाव बढऩे के बाद उठाया गया है। इससे चीन के उत्पादों का बहिष्कार करने के अभियान में भी तेजी आई।

टेकलेजिस एडवोकेट्स ऐंड सोलिसिटर्स के प्रबंध अधिकारी सलमान वारिस ने कहा कि प्रौद्योगिकी निवेश और साझेदारी के लिए अमेरिकी खेमे की ओर भारत का बढ़ता रुझान मौजूदा सरकार के 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' के साथ अच्छी तरह से फिट बैठता है। वारिस ने कहा, यह चीनी निवेशकों के उन रुझानों के विपरीत है जिनका भारत में निवेश का प्राथमिक रणनीतिक हित चीन के उत्पादों के लिए लंबी अवधि के लिए बड़ा बाजार सुरक्षित करना था।'

Keyword: Indo-US, Collaboration, Partnership, Dispute, Investment, चीन-भारत, सीमा विवाद, अमेरिका, निवेश, रणनीतिक साझेदारी,
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