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यूपी ने मांगा डिस्कॉम के लिए 20,940 करोड़ रुपये ऋण

ज्योति मुकुल / नई दिल्ली July 16, 2020

केंद्र की ओर से घोषित राहत पैकेज में से एक बड़े हिस्से की मांग करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने अपनी बिजली वितरण कंपनियों के लिए पॉवर फाइनैंस कॉर्पोरेशन और ग्रामीण विद्युतीकरण निगम (आरईसी) के समक्ष 20,940 करोड़ रुपये के ऋण के लिए औपचारिक मांग रख दी है। आत्मनिर्भर भारत योजना के तहत ऋणों के लिए राज्यों से कुल सांकेतिक मांग 98,066 करोड़ रुपये पर पहुंच चुकी है।

पैकेज के तहत केंद्र सरकार की स्वामित्व वाली बिजली क्षेत्र की ऋणदाता पीएफसी और आरईसी उन राज्यों को समान रूप से ऋण दे रही हैं जो इनके द्वारा सुझाए गए सुधार करने के प्रति समर्पित हैं। ऋण की इस रकम का इस्तेमाल बिजली उत्पादन कंपनियों के बकाये का भुगतान करने के लिए किया जाना है। 

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सभी राज्यों से मिले औपचारिक ऋण आवेदनों की कुल रकम अब 87,320 करोड़ रुपये हो चुकी है। इन दो ऋणदाताओं ने अब तक 34,246 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है जिसमें से 11,222 करोड़ रुपये का वितरण किया जा चुका है। आरईसी ने अब तक जहां 6,436 करोड़ रुपये दिए हैं, वहीं पीएफसी ने 4,786 करोड़ रुपये का वितरण किया है।  

कुछ राज्य धन लेने के लिए गारंटी की मंजूरी देने की प्रक्रिया में लगे हैं। पीएफसी और आरईसी समान अनुपात ऋण का वितरण करेंगी। 

भले ही आत्मनिर्भर योजना का लक्ष्य मौजूदा तरलता संकट से निपटना है, घाटों और डिस्कॉम के स्तर पर बढ़ते ऋण का सामना करने के केंद्र के प्रयास पहले भी बहुत सफल नहीं हुए हैं। डिस्कॉम में सुधार की पिछली योजना उदय के तहत एटीऐंडसी घाटा का राष्ट्रीय औसत मार्च 2019 तक घटकर 15 फीसदी पर आने की उम्मीद जताई गई थी। हालांकि, तब यह 22 फीसदी थी। आईडीएफसी सिक्योरिटीज की एक रिपोर्ट के मुताबिक डिस्कॉम का कुल ऋण 3.76 लाख करोड़ रुपये हो चुकी है।

आत्मनिर्भर योजना के लिए ऋण अवधि के तहत राज्यों को सरकारी बिजली कनेक्शनों में प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने की आवश्यकता है। इसके अलावा, राज्य सरकार की ओर से डिस्कॉम को किए जाने वाले सब्सिडी और बिजली बिलों के भुगतान के लिए राज्यों के पास एक ऋणमुक्ति योजना होनी चाहिए। भविष्य में सब्सिडी और बिजली बिलों के समय पर भुगतान की प्रणाली की भी जरूरत है।

अगले तीन से चार वर्षों में एटीऐंडसी घाटा और आपूर्ति तथा राजस्व की औसत लागत को भी नीचे लाने की जरूरत है। दिसंबर 2019 में देश भर में डिस्कॉम का सकल तकनीकी और वाणिज्यिक घाटा (एटीऐंडसी) या (अपर्याप्त प्रणाली के कारण बिजली आपूर्ति घाटा) 20.8 फीसदी पर था और इसका वित्तीय घाटा 18,316 करोड़ रुपये था। 

हालांकि, उद्योग की कंपनियों का कहना है कि ऐसी तरलता निवेश को अस्थायी उपाय के तौर पर ही देखा जाना चाहिए और संघर्षरत बिजली वितरण क्षेत्र के उद्धार के लिए इसे स्थायी समाधान नहीं समझा जाना चाहिए। 

टाटा पावर-डीडीएल के मुख्य वित्त अधिकारी हेमंत गोयल ने कहा, 'लघु और मध्यम अवधि के लिए पैकेज के माध्यम से ऋण देने से कोविड-19 महामारी के कारण उपजे तरलता संबंधी समस्या के समाधान और नियामकीय परिसंपत्तियों के गैर परिसमापन में मदद मिलेगी।'


निवेश के अवसर बढ़ाने पर चर्चा

भारत और अमेरिका के शीर्ष मुख्य कार्यपालक अधिकारियों (सीईओ) ने मंगलवार को स्वास्थ्य, एयरोस्पेस, रक्षा, बुनियादी ढांचा, आईसीटी और वित्तीय सेवा समेत अन्य क्षेत्रों में द्विपक्षीय निवेश बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की। वाणिज्य मंत्रालय ने बुधवार को जारी एक बयान में यह जानकारी दी। भारत-अमेरिका सीईओ मंच के टेलीफोन के जरिये आयोजित सम्मेलन में यह चर्चा की गयी। मंच की सह-अध्यक्षता टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन और लॉकहीड मार्टिन के अध्यक्ष एवं सीईओ जेम्स टेसलेट ने की। बयान के अनुसार चंद्रशेखरन ने मजबूत होते द्विपक्षीय रिश्तों के साथ मुक्त व्यापार समझौते की जरूरत को रेखांकित किया और अमेरिकी सरकार से भारत के मानव संसाधन के योगदान को स्वीकार करने का आग्रह किया। भाषा

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