बिजनेस स्टैंडर्ड - बाजार पर कमजोर आंकड़ों का असर
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बाजार पर कमजोर आंकड़ों का असर

पुनीत वाधवा /  07 13, 2020

बीएस बातचीत

अपने मार्च 2020 के निचले स्तर से अच्छी तेजी के बाद बाजार अब भारतीय उद्योग जगत के जून तिमाही के वित्तीय प्रदर्शन पर नजर लगाए हुए हैं। अबेकस ऐसेट मैनेजर के संस्थापक सुनील सिंघानिया ने पुनीत वाधवा के साथ बातचीत में बताया कि दीर्घावधि निवेशकों को मार्च के निचले स्तरों पर खरीदारी का इंतजार करने के बजाय आगामी परिदृश्य को ध्यान में रखकर दांव लगाना चाहिए। मुख्य अंश:


क्या आप मानते हैं कि निवेशकों ने अवसर गंवाए हंै या फिर बाजार अगले कुछ महीनों में मार्च 2020 जैसा मौका फिर से देगा?

वैश्विक बाजारों में तरलता-केंद्रित मजबूत तेजी आई है और कई बाजारों ने हाल के वर्षों में अपना सबसे अच्छा त्रैमासिक सुधार दर्ज किया है। कई शेयर अपने निचले स्तरों से दोगुना भी हुए हैं और कई निवेशक अब महसूस कर रहे हैं कि उन्होंने अवसर गंवा दिया है। हालांकि बाजार में हमेशा 5-7 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है, लेकिन इसकी संभावना कम है कि हम जल्द ही मार्च 2020 की गिरावट के स्तर को देखेंगे। हालांकि दीर्घावधि निवेशकों के लिए अवसर हमेशा बरकरार रहेंगे और उन्हें मार्च के निचले स्तरों जैसी गिरावट का इंतजार करने के बजाय आगामी परिदृश्य को ध्यान में रखकर निवेश करना चाहिए।


एक कमजोर अर्थव्यवस्था में आय वृद्घि से पर्याप्त समर्थन के बगैर नकदी आधारित तेजी दिखी है। एक फंड प्रबंधक के तौर पर आप इसे लेकर कितने चिंतित हैं?

इसमें कोई संदेह नहीं है कि वैश्विक रूप से पर्याप्त तरलता है। ब्याज दरें सभी देशों में सर्वाधिक निचले स्तरों पर हैं और कोविड-19 की वजह से पैदा हुई अनिश्चितता भी घट रही है, ऐसे में आर्थिक मोर्चे के साथ साथ इक्विटी को लेकर भी उम्मीद दिख रही है। जून 2020 की तिमाही कई क्षेत्रों और कंपनियों के लिए कमजोर रहेगी और ऐसा लग रहा है कि सितंबर 2020 तक हालात सामान्य होंगे। हालांकि जो निवेशकों के लिए अल्पावधि घटनाक्रम को नजरअंदाज कर रहे हैं और हालात सामान्य होने के बाद वृद्घि पर ध्यान दे रहे हैं, उनके लिए उम्मीद बरकरार है। वित्त वर्ष 2021 निश्चित तौर पर भारत की जीडीपी पर दबाव वाला होगा, और संभव है कि कोविड-19 महामारी नियंत्रित हो जाए, तो वित्त वर्ष 2022 के लिए बढ़त दो अंक में रह सकती हैं।


क्या आप मानते हैं कि अर्थव्यवस्थाओं के सामान्य हो जाने पर वैश्विक केंद्रीय बैंक तरलता पर ध्यान देना बंद कर देंगे?

वैश्विक केंद्रीय बैंकों ने कोविड-19 महामारी की वजह से पैदा हुए अल्पावधि आर्थिक दबाव से मुकाबले के लिए बैलेंस शीट विस्तार पर जोर दिया है। वे कुछ हद तक इससे परहेज करेंगे। हालांकि यह धीरे धीरे संभव होगा, जैसा कि लीमन संकट के बाद देखा गया था। ब्याज दरों में नरमी के साथ मैं भारत जैसे देशों में बड़ा एफडीआई/एफआईआई प्रवाह आने को लेकर आशान्वित हूं। घरेलू निवेशकों ने ज्यादा निवेश के लिए हमेशा बड़ी गिरावट का इस्तेमाल किया है। हमारा मानना है कि यह रुझान बरकरार रहेगा।


क्या बाजार अर्थव्यवस्था में दबाव को कम आंक रहे हैं?

हम अर्थव्यवस्था की दो चुनौतीपूर्ण तिमाहियों और वित्तीय परिणाम सीजन की ओर बढ़ रहे हैं। बाजार पर इसका काफी असर दिखा है और वे इस साल के बाद भी इस तरह का दबाव बने रहने की आशंका जता रहे हैं। यदि कोविड-19 की गंभीर दूसरी लहर नहीं आती, तो अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2021 की दूसरी छमाही में पटरी पर आ सकती है। कुछ बाजार सेगमेंट काफी प्रभावित हुए हैं और निवेशकों को मेरी यही सलाह है कि वे गति का पीछा करने से परहेज करें।


क्या भारतीय उद्योग जगत में सुधार के संकेत दिखने लगे हैं?

भारतीय उद्योग जगत से प्रतिक्रिया मिश्रित है। ग्रामीण-केंद्रित क्षेत्र और कंपनियां अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। इनमें कृषि रसायन, बीज, उर्वरक, ट्रैक्टर, दोपहिया, स्टैपल्स और उपभोक्ता उत्पाद शामिल हैं। मल्टीप्लेक्स, लग्जरी कंज्यूमर्स, कार, रिटेल, और ट्रैवल जैसे कुछ डिस्क्रेशनरी खर्च वाले क्षेत्र ज्यादा प्रभावित हुए हैं और उनमें सुधार आने में लंबा वक्त लगेगा। ज्यादातर क्षेत्रों के लिए यह समझा जा रहा है कि उनमें मांग सितंबर 2020 तक पिछले साल के स्तर के 90-100 प्रतिशत पर पहुंच जाएगी। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) ईवे बिल नंबर/संग्रह, पथकर संग्रह, विद्युत खपत, सीमेंट बिक्री आदि से संकेत इस तथ्य का इशारा करते हैं कि मासिक दर मासिक सुधार आ रहा है।


कॉरपोरेट आय वृद्घि के लिए आपका क्या अनुमान है?

अप्रैल-जून 2020 की तिमाही के लिए कॉरपोरेट आय का अंदाजा लगभग हर कोई लगा सकता है, क्योंकि कोविड-19 की वजह से लागू लॉकडाउन का ज्यादातर प्रभाव इस तिमाही में स्पष्ट दिखेगा। अच्छी बात यह है कि बाजारों में कमजोरी तिमाही के आंकड़ों का असर पहले ही दिख चुका है। इन आंकड़ों के अलावा, कंपनियों द्वारा आगे के अनुमान के साथ साथ कोविड-19 के आंकड़ों की गति आदि से भी बाजार की दिशा तय होगी।

Keyword: Abacus Asset Management, Sunil Singhania, Share Market, अबेकस ऐसेट मैनेजर, सुनील सिंघानिया, दीर्घावधि निवेशक,
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