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बाजार बेजार...कर रहे ग्राहकों का इंतजार

विवेट सुजन पिंटो, सुब्रत पांडा, अर्णव दत्ता और समरीन अहमद / मुंबई/नई दिल्ली/बेंगलूरु 07 12, 2020

मुंबई के बाशिंदों के लिए बांद्रा का हिल रोड खरीदारी का प्रमुख ठिकाना है। यहां के एक खाली शोरूम के बोर्ड का नजरों से बचना मुश्किल है। इस शोरूम की तरफ गली की ज्यादातर दुकानें बंद हैं। दूसरी तरफ के दुकानदारों का कहना है कि कारोबार मुश्किल से चल रहा है। हिल रोड पर हैंड बैग की एक छोटी सी दुकान के मालिक जय काम्बले ने कहा, 'मार्च में लॉकडाउन शुरू होने से पहले मेरे यहां कम से कम 50 से 100 ग्राहक आते थे। अब मुश्किल से कुछ खरीदार आते हैं। पिछले महीने अनलॉक शुरू होने के बाद यह स्थिति है। ऐसे में मैं अपना कारोबार कैसे चलाऊं?'

काम्बले के सामने जो दुविधा है, वह जून में अनलॉक कार्यक्रम शुरू होने के बाद लगभग हर छोटे-बड़े खुदरा विक्रेताओं की है। देश भर में खुदरा प्रतिष्ठानों और कारोबारों को चरणबद्ध तरीके से फिर से खोला गया है, लेकिन खरीदारों की आमद तेज नहीं हुई है।

ज्यादातर ग्राहक मुंबई में क्रॉफर्ड मार्केट, हिल रोड और लिंकिंग रोड, नई दिल्ली में कनॉट प्लेस तथा लाजपत नगर सेंट्रल मार्केट और बेंगलूरु में ब्रिगेड रोड और कॉमर्शियल स्ट्रीट से दूरी बनाए हुए हैं। खुदरा विक्रेताओं का कहना है कि इस समय वही ग्राहक आ रहे हैं, जिन्हें खरीदारी की अत्यधिक जरूरत है। वे अपनी जरूरत का सामान खरीदकर तुरंत निकल जा रहे हैं। साफ तौर पर चहल-पहल गायब है। कारोबार के घंटों पर बंदिश और एक दिन छोड़कर एक दिन दुकान और खुदरा प्रतिष्ठान खोलने का परिचालन पर भारी असर पड़ रहा है। क्राफर्ड मार्केट में रियल टेस्ट ड्राई फ्रूट्स के मालिक गोपाल राजपुरोहित ने कहा कि मौजूदा संकट के कारण कारोबार घट गया है। उन्होंने कहा, 'हम इस संकट से पहले की तुलना में केवल 10 से 20 फीसदी कारोबार कर रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान हमारे स्टॉक का एक बड़ा हिस्सा खराब हो गया और हमें वह नुकसान उठाना पड़ा। डॉकलाउन बढऩे से लोगों में भय बैठ रहा है, जिसका भी कारोबार पर असर पड़ रहा है।'

बेंगलूरु के ब्रिगेड रोड पर 125 से अधिक ब्रांडेड और गैर-ब्रांडेड स्टोर हैं। इनमें से करीब 25 शोरूम अब तक बंद हो चुके हैं। इनमें वे शोरूम भी शामिल हैं, जो वीआईपी बैग, वुडलैंड के जूते और फ्लाइंग मशीन के परिधान बेच रहे थे। ब्रिगेड शॉप्स ऐंड एस्टैब्लिशमेंट्स एसोसिएशन के सचिव सुहैल युसुफ ने कहा, 'कुछ दिन में 10 और दुकानें बंद हो जाएंगी।' मंगलवार रात से बेंगलूरु में फिर से एक सप्ताह का लॉकडाउन लगने जा रहा है, जिससे कारोबारियों के लिए मुश्किलें और बढ़ेंगी। मंगलवार से पुणे जैसे शहरों में भी लॉकडाउन होगा। महाराष्ट्र में औरंगाबाद और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में लॉकडाउन शुक्रवार से लगाया जा चुका है।

नई दिल्ली के लाजपत नगर सेंट्रल मार्केट में परिधान विक्रेता तरणदीप सिंह ने कहा कि बिक्री कोविड-19 से पहले की तुलना में 25 फीसदी भी नहीं पहुंची है। वह कहते हैं कि उन्हें नहीं पता कि आगे की महीनों में क्या स्थिति रहेगी। उन्होंने कहा, 'मुझे अपने आधे से अधिक कर्मचारियों को हटाना पड़ा, जिनमें से ज्यादातर अपने गांव लौट गए हैं।'

कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स और रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आरएआई) यह मानते हैं कि खुदरा कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। यह जून में 65 से 70 फीसदी घटा है। नियमों में एकरूपता के अभाव और ग्राहकों में खरीदारी को लेकर डर के कारण परिचालन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

आरएआई ने कहा कि कहा कि मॉल ने सालाना आधार पर 77 फीसदी गिरावट दर्ज की है क्योंकि उन्हें पूरे देश में खोलने की मंजूरी नहीं दी जा रही है। मुख्य मार्गों की खुदरा दुकानों को देश भर में खोलने की मंजूरी के बावजूद उनका कारोबार सालाना आधार पर 62 फीसदी कम रहा है। टिकाऊ उपभोक्ता और इलेक्ट्रॉनिक्स खुदरा विक्रेता एकमात्र अपवाद रहे हैं। उनमें कारोबार में केवल 19 फीसदी गिरावट आई है, जबकि कुल खुदरा कारोबार में गिरावट 67 फीसदी रही है।

इलेक्ट्रॉनिक्स शृंखला विजय सेल्स के प्रबंध निदेशक नीलेश गुप्ता ने कहा, 'पिछले एक महीने के दौरान कारोबार में तेजी आई है।' वह कहते हैं, 'लैपटॉप, फोन और होम अप्लायंस जैसी श्रेणियों में बिक्री अच्छी रही है। इस बढ़ोतरी की एक वजह वर्क फ्रॉम होम और लर्न फ्रॉम होम की संस्कृति पनपना है, जिसमें लॉकडाउन के बाद तेजी आई है। हालांकि माहौल निराशाजनक है। मेरा सर्तकता के साथ आशावादी नजरिया है।'

एचऐंडएम और लेवाइस जैसे जाने-माने आउटलेट के कार्याधिकारियों का कहना है कि जून की शुरुआत की तुलना में अब ज्यादा ग्राहक उनके स्टोरों में आ रहे हैं लेकिन कारोबार कोविड से पहले के 50 फीसदी पर भी नहीं पहुंचा है। मुंबई के क्रॉफर्ड बाजार में किचनवेयर और कटलरी डीलर ने कहा कि खरीदार उनकी दुकान पर ऑर्डर दे रहे हैं। उन्होंने कहा, 'लेकिन मेरे लिए सबसे बड़ी समस्या सामान को उनके घर तक पहुंचाना है। लोकल ट्रेन पूरी तरह नहीं चल रही हैं। इसका मतलब है कि मुझे सड़क परिवहन पर निर्भर रहना होगा, जो महंगा है।' बेंगलूरु में ब्रिज रोड से दो किलोमीटर दूर कॉमर्शियल स्ट्रीट में शादी की जरूरत के लिए खरीदारी करने वाले ग्राहकों को गड्ढों और रेत के टीलों से बचकर चलना पड़ रहा है। यह शहर में शादी की खरीदारी का मुख्य केंद्र है, लेकिन यहां निर्माण कार्य चल रहा है। इससे पार्किंग और खरीदारी के लिए मुश्किल से कोई जगह बची है। कॉमर्शियल स्ट्रीट एसोसिएशन के सचिव मयंक रोहतगी ने कहा, 'बेंगलूरु में रविवार के लॉकडाउन से भी हमारा कारोबार प्रभावित हो रहा है क्योंकि 80 फीसदी खरीदारी सप्ताहांत में होती है।'

रोहतगी इस केंद्र में एक सराफा दुकान के मालिक भी हैं। इस शॉपिंग एरिया में 600 से अधिक छोटी-बड़ी दुकानें हैं, जिनमें से 34 अब तक बंद हो चुकी हैं। रोहतगी ने कहा, 'ज्यादातर दुकानदार किराया और वेतन चुकाने में जद्दोजहद कर रहे हैं। अगर मौजूदा हालात कुछ महीने और बने रहे तो कॉमर्शियल स्ट्रीट की करीब 80 फीसदी दुकानें बंद हो जाएंगी।'मुंबई के लिंकिंग रोड की एक सैलून मालिक ने कहा कि उनके यहां रोजाना अब महज तीन ग्राहक आ रहे हैं, वह भी ग्राहक से बातचीत और अपॉइंटमेंट के बाद। कोविड-19 महामारी शुरू होने से पहले उनके यहां कम से कम 50 से 60 ग्राहक आते थे। सैलून प्रबंधक ने कहा, 'हम सुरक्षा के लिए भले ही कुछ भी उपाय करें, लेकिन मेरा मानना है कि खरीदारी और बाहर जाने को लेकर भरोसे की कमी है। इसके दूर होने में समय लगेगा।'
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