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दो समूह की कंपनी है टाटा संस: मिस्त्री

देव चटर्जी / मुंबई July 10, 2020

मिस्त्री परिवार ने कहा है कि टाटा संस दो समूह की कंपनी है जिसमें टाटा ट्रस्ट्स की 66 फीसदी हिस्सेदारी और उनकी 18.5 फीसदी हिस्सेदारी है। इस प्रकार टाटा संस में इन दोनों समूहों अर्ध-साझेदारी है।

सर्वोच्च न्यायालय में दायर अपनी याचिका में टाटा संस ने दावा किया है कि दोनों समूहों के बीच अर्ध-साझेदारी संबंधी कोई औपचारिक अथवा अनौपचारिक समझौता नहीं हुआ है। इसलिए टाटा संस दो समूह की कंपनी नहीं है।

टाटा संस पर अर्ध-साझेदारी के सिद्धांत को लागू करते हुए शापूरजी पलोनजी समूह ने कहा था कि इस कंपनी में दो समूह- टाटा ग्रुप और गैर-टाटा ग्रुप यानी एसपी ग्रुप- मौजूद हैं। लेकिन टाटा समूह ने कहा कि यह दलील अपने-आप में त्रुटिपूर्ण है और उनके मामले का शुरुआती आधार ही गलत है।

टाटा समूह के अनुसार, टाटा संस न तो कोई पारिवारिक स्वामित्व वाली कंपनी है और न ही वह दो समूह वाली कंपनी है। टाटा संस में बहुलांश हिस्सेदारी किसी परिवार अथवा कॉरपोरेट प्रोमोटर ग्रुप के पास नहीं बल्कि सात 'पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट्स' यानी सार्वजनिक धर्मादा ट्रस्टों की है। कंपनी में इनकी कुल हिस्सेदारी करीब 66 फीसदी है जबकि 12.87 फीसदी हिस्सेदारी टाटा समूह की सूचीबद्ध कंपनियों सहित अन्य कंपनियों की है।

मिस्त्री परिवार के करीबी सूत्रों ने कहा कि अर्ध-साझेदारी की अवधारणा साझेदारी की अवधारणा से भिन्न है। सर्वोच्च न्यायालय में टाटा समूह की दलील पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा, 'अर्ध-साझेदारी किसी कंपनी के शेयरधारकों के बीच व्यक्तिगत चरित्र एवं अच्छे विश्वास का संबंध है जो किसी भागीदारी में साझेदारों के अनुरूप है। अर्ध-साझेदारी दस्तावेजों में लिखित अनुबंधों तक सीमित नहीं है बल्कि यह कामकाज, आचरण, पारस्परिक विश्वास और भरोसे पर आधारित होती है।'

मिस्त्री परिवार ने दावा किया है कि दोनों समूहों के बीच हुए विभिन्न पत्र व्यवहार और लेनदेन से साफ तौर पर पता चलता है कि दोनों साझेदारों के बीच संबंध किस प्रकार आपसी विश्वास, भरोसे और व्यक्तिगत संबंध पर आधारित है जो टाट संस में इक्विटी निवेश से इतर है।

टाटा समूह के मानद चेयरमैन रतन टाटा द्वारा लिखे गए पत्रों को नैशनल कंपनी लॉ अपील ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) के सामने पहले ही प्रस्तुत किए जा चुके हैं।

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