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महाराष्ट्र में होटल खुले लेकिन अभी नहीं लौटी रौनक

पवन लाल और सुशील मिश्र / मुंबई July 08, 2020

लॉकडाउन की वजह से महाराष्ट्र में पिछले चार महीने से करीब 10,000 होटलों के दरवाजे बंद थे, जिसे बुधवार को खोलने की अनुमति दी गई। हालांकि अभी इस बारे में स्थिति साफ नहीं है कि इन होटलों को बाहरी लोगों के लिए बार और रेस्टोरेंट चलाने की अनुमति कब से दी जाएगी। फिलहाल केवल होटल में ठहरने वालों के लिए खाने-पीने की सुविधा देने की इजाजत दी गई है। होटल कारोबार के राजस्व में खान-पान सेवा का योगदन करीब 10 से 15 फीसदी होता है।

इस बीच होटल कंपनियां मेहमानों को आकर्षित करने के लिए खास पैकेज बनाने में जुट गई हैं। आईएचसीएल के मुंबई होटल्स के वरिष्ठ उपाध्यक्ष तलजिंदर ने कहा कि मुंबई का प्रतिष्ठित ताज महल पैलेस फिलहाल केवल शामियाना और ताज सलून रेस्टोरेंट ही खोलेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार नियमों में धीरे-धीरे छूट दे रही हैं, ऐसे में हमें आने वाले दिनों में और सेवाएं शुरू करने की अनुमति मिलने की उम्मीद है। आईटीसी होटल्स में एरिया मैनेजर (वेस्ट) अतुल भल्ला ने कहा, 'फिलहाल होटलों को शुरू करना शुरुआत भर है। बैंक्वेट और रेस्टोरेंट को खोले जाने पर अभी चर्चा चल रही है। 33 फीसदी क्षमता वाले नियमों के तहत आईटीसी मुंबई के अपने होटलों में 200 कमरों के साथ परिचालन कर सकती है। इसके लिए बुकिंग शुरू हो चुकी है।'

बड़े होटल समूह आय के लिए अपने होटलों के दरवाजे खोलने की पूरी तैयारी कर ली है क्योंकि मार्च के बाद से उनकी आमदनी ठप है। नवी मुंबई के पार्क होटल के महाप्रबंधक राहुल मखीजा ने फैमिली और कपल स्पेशल पैकेज की पेशकश की है। उनके होटल में सप्ताहांत पर 10,000 रुपये (कर अलग से) में कमरा बुक करा सकते हैं, जिसमें खाना मुफ्त होगा। आईटीसी होटल्स सप्ताहांत के लिए पैकेज के साथ ही खाने-पीने के बिल में छूट की भी पेशकश कर रही है। इसके साथ ही सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक के लिए कमरा चाहने वालों के लिए विशेष किराया उपलब्ध कराया जा रहा है। ताज महल पैलेस ने अर्बन गेटवे ऑफर के साथ मेहमानों को आकर्षित करने में जुटा है। इसमें बुकिंग रद्द कराने की लचीली नीति रखी गई है।

आईटीसी के भल्ला ने कहा कि वह 25 से 30 फीसदी कर्मचारियों के साथ अपने होटल खोल रहे हैं। मैरियट ने पूरे महाराष्ट्र में अपने 19 होटल खोले हैं।

हालांकि राज्‍य में होटल खुलने लगे हैं और इसकी इजाजत मिलने से कारोबारी खुश भी हैं, लेकिन कारोबार के लिहाज से शुरुआत अच्‍छी नहीं कही जा सकती है। मुंबई और पड़ोसी शहरों में कोरोना के प्रकोप के कारण पहले दिन छोटे और मझोले होटलों में सन्नाटा ही पसरा रहा। शायद होटल मालिक इस बात को पहले ही भांप गए थे, इसलिए पहले दिन बामुश्किल 30 फीसदी होटल खुले और जो खुले, उनमें भी बोहनी के लाले ही रहे। दिन भर के इंतजार के बाद भी कमरों में ठहरने वाले मुश्किल से ही आए।

मुंबई और आसपास के इलाकों में करीब 50,000 बजट होटल और लॉज हैं। ज्यादातर कारोबारी कह रहे हैं कि चार महीने से बंद होटलों को ठहरने लायक बनाने में कम से कम एक हफ्ता लग जाएगा। एक-एक होटल पर लाखों रुपये का खर्च भी आएगा मगर कोरोना के डर से ग्राहक शायद ही यहां फटकें। इसीलिए आमदनी चवन्नी खर्च रुपैया वाली हालत रहेगी। शायद इसी वजह से ज्यादातर होटल बंद हैं।

होटल ऐंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया के अध्यक्ष गुरबख्श सिंह कोहली ने कहा कि बड़े होटल तो खुल गए हैं मगर बजट होटल धीरे-धीरे ही खुलेंगे। इन होटलों में काम करने वाले 70 फीसदी कर्मचारी अपने घरों को लौट चुके हैं। जो बचे हैं, वे भी यातायात व्यवस्था ठीक नहीं होने के कारण मुश्किल से ही पहुंच पा रहे हैं। हालांकि हफ्ते भर में 40-50 फीसदी होटल खुल जाएंगे मगर कोहली ने कहा कि लॉकडाउन की वजह से तगड़ी चोट खा चुके 20-30 फीसदी होटल शायद ही दोबारा खुल पाएं।

टी 24 होटल के मालिक भरत मलकानी ने कहा कि चार महीने से बंद पड़े होटलों को खुलने लायक बनाने को मजदूर ही नहीं हैं। फिर भी उन्होंने बुकिंग चालू कर दी थी मगर एक भी ग्राहक नहीं आया। मलकानी का कहना है कि मुंबई में घूमने की सब जगहें बंद हैं, कोरोना की हालत देखकर कबाहर से कोई यहां आ नहीं रहा, रेल-हवाई सेवा भी ठीक से चालू नहीं है। ऐसे में होटलों में कौन रहने आएगा।

बजट होटल मालिकों की यह शिकायत भी है कि सबसे ज्यादा घाटा झेलने के बाद भी उन्हें सरकारों से कोई मदद नहीं मिली है। कोहली संपत्ति कर, बिजली के बिल आदि में छूट मांग रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसा नहीं हुआ तो बड़े होटल तो खुल जाएंगे, जिनकी संख्या बमुश्किल 5 फीसदी है मगर बजट होटलों की कमर टूट जाएगी।

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