बिजनेस स्टैंडर्ड - भारत में कंपनी जगत का लाभांश भुगतान 6.5 फीसदी बढ़ा
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भारत में कंपनी जगत का लाभांश भुगतान 6.5 फीसदी बढ़ा

कृष्ण कांत / मुंबई 07 07, 2020

बिजनेस स्टैंडर्ड भारत में कंपनी जगत का लाभांश भुगतान 6.5 फीसदी बढ़ाचौथी तिमाही और मार्च 2020 में समाप्त वित्त वर्ष में भारतीय कंपनी जगत के कमजोर प्रदर्शन के बावजूद लाभांश का मौजूदा सीजन इक्विटी प्रतिभागियों के लिए अप्रत्याशित रूप से उदार रहा है।

बीएसई 500 इंडेक्स में शामिल भारत की अग्रणी सूचीबद्ध कंपनियों की तरफ से लाभांश का संयुक्त भुगतान वित्त वर्ष 2020 में 6.5 फीसदी ज्यादा रहा और इस तरह से यह रफ्तार पिछले तीन साल की सबसे तेज रही। इक्विटी निवेशकों को इसके लिए नकदी संपन्न बड़ी कंपनियों मसलन टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, आईटीसी, हिंदुस्तान यूनिलीवर, नेस्ले और बजाज ऑटो का शुक्रगुजार होना चाहिए।

हालांकि रक्षात्मक क्षेत्रों मसलन उपभोक्ता व सॉफ्टवेयर सेवा से जुड़ी फर्मों को छोड़ दें तो लाभांश भुगतान सालाना आधार पर 17.6 फीसदी घटकर 1,12 लाख करोड़ रुपये रही, जो एक साल पहले 1.36 लाख करोड़ रुपये रही थी। इसकी तुलना में इन फर्मों ने वित्त वर्ष 2019 में भुगतान में 5.3 फीसदी का इजाफा किया था।

पारंपरिक तौर पर लाभांश भुगतान वाली बड़ी कंपनियोंं मसलन निजी क्षेत्र के बैंक, बीमा कंपनियां, तेल व गैस क्षेत्र की दिग्गज और धातु व खनन कंपनियों ने वित्त वर्ष 2020 में या तो लाभांश भुगतान में कटौती की या फिर उसे टाल दिया। बैंक व बीमा कंपनियों ने लाभांश भुगतान टाल दिया क्योंकि उनके नियामक ने कोविड-19 महामारी के कारण फंसे कर्ज में संभावित बढ़ोतरी को देखते हुए ऐसी सलाह दी थी। शेयरधारकों से लाभांश आय पर कर चुकाना अनिवार्य किए जाने के बाद लाभांश का यह पहला सीजन है जबकि पहले कंपनियों को अपने लाभांश भुगतान पर 20.56 फीसदी लाभांश वितरण कर चुकाना होता था। विशेषज्ञों ने ज्यादा लाभांश भुगतान की वजह कानून में बदलाव और कंपनी आय कर में कटौती को इसकी वजह बताया। डाल्टन कैपिटल एडवाइजर्स के निदेशक यू आर भट्ट ने कहा, चूंकि अब लाभांश पर शेयरधारकों को कर देना होता है, लिहाजा कई कंपनियां लाभांश वितरण कर पर होने वाली बचत प्रति शेयर ज्यादा लाभांश के जरिये शेयरधारकों को दे रही हैं। इक्विनॉमिक्स रिसर्च ऐंड एडवाइजरी के संस्थापक व प्रबंध निदेशक जी चोकालिंगम ने कहा, सितंबर में कंपनी आय कर में हुई कटौती का लाभ मोटे तौर पर नकदी संपन्न कंपनियों को हुआ है और उनमें से कई ने ज्यादा लाभांश के जरिये अपनी बचत शेयरधारकों को दी है।

यह विश्लेषण वित्त वर्ष 2020 के नतीजे घोषित कर चुकी बीएसई 500 कंपनियों की तरफ से वित्त वर्ष 2020 के लिए प्रस्तावित या पहले ही दिए जा चुके अंतरिम या अंतिम लाभांश पर आधारित है। इस नमूने में शामिल 456 कंपनियोंं ने अब तक अपने नतीजे घोषित किए हैं। इनमें से 359 कंपनियों ने वित्त वर्ष 2020 के लिए अंतरिम या अंतिम लाभांश का भुगतान किया है। वित्त वर्ष 2019 में ऐसी कंपनियों की संख्या 379 थी। कुल मिलाकर बीएसई 500 कंपनियों की योजना लाभांश के जरिए शेयरधारकों के बीच 1.91 लाख करोड़ रुपये वितरित करने की है, जो एक साल पहले 1.8 लाख करोड़ रुपये थी। अवरोध के बावजूद कंपनियों ने पिछले वित्त वर्ष में लाभांश भुगतान में इजाफा किया। बीएसई 500 कंपनियों का संयुक्त शुद्ध लाभ वित्त वर्ष 2020 में सालाना आधार पर 25.6 फीसदी कम रहा, वहींं उनका राजस्व 1.4 फीसदी घटा। यह पिछले छह साल का सबसे खराब प्रदर्शन है।

इसके परिणामस्वरूप कई कंपनियों की बचत कम हो गई या उन्होंने शेयरधारकों को खुश करने के लिए लाभ का छोटा हिस्सा बनाए रखने का फैसला लिया।

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