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जून तिमाही में प्रत्यक्ष कर रिफंड 16 प्रतिशत कम

दिलाशा सेठ / नई दिल्ली July 03, 2020

कोविड-19 को देखते हुए सरकार ने रिफंड तेज किया है, इसके बावजूद चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में प्रत्यक्ष कर रिफंड 16 प्रतिशत कम हुआ है। रिफंड या आयकर विभाग की ओर से नकदी प्रवाह जून के अंत तक 64,428 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की समान अवधि के दौरान 76,575 करोड़ रुपये था। कर अधिकारियोंं का कहना है कि लॉकडाउन के कारण उपस्थिति कम रहने और बड़े रिफंड को मंजूरी मिलने में देरी की वजह से हुआ, जिसके लिए अधिकारियों की अनुमति की जरूरत होती है।

कोविड के आर्थिक असर से निपटने के लिए नीतिगत पहल के तहत सरकार ने 5 लाख रुपये तक के रिफंड में तेजी लाने की घोषणा की थी। शुक्रवार को केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने एक बयान में कहा कि 8 अप्रैल से 30 जून के बीच कर रिफंड के प्रति मिनट 76 मामले निपटाए गए। बयान के मुताबिक, 'इस अवधि के दौरान सिर्फ 56 कार्यदिवस मेंं सीबीडीटी ने 20.4 लाख मामलों से ज्यादा निपटाए हैं, जिनकी कुल राशि 62,361 करोड़ रुपये है।' 30 जून को समाप्त तिमाही में कॉर्पोरेशन कर रिफंड 40,482 करोड़ रुपये रहा और इसमें से आयकर 23,828 करोड़ रुपये रहा। विज्ञप्ति में कहा गया है, 'करदाताओं ने महसूस किया कि आईटी विभाग न सिर्फ करदाताओं के प्रति मित्रवत है, बल्कि कोविड-19 महामारी के कठिन दौर में नकदी सुविधा मुहैया कराने वाला भी है।' रिफंड पूरी तरह से इलेक्ट्रॉनिक तरीके से जारी किया गया और यह करदाताओं के खाते में जमा कर दिया गया है।

सीबीडीटी ने विज्ञप्ति में कहा है, 'करदाताओं को विभाग की ओर से भेजे गए ई मेल का तत्काल जवाब देना चाहिए, जिससे कि उनके मामलों के रिफंड पर भी काम शुरू हो सके और उसे जारी किया जा सके। आईटी विभाग के इस तरह के ई मेल में करदाताओं से उनके बकाया मांग, बैंक खाता संख्या और चूक या मिलान न होने संबंधी पुष्टि की जाती है। इस तरह के सभी मामलों मेंं करदाताओं की त्वरित प्रतिक्रिया से आईटी विभाग उनके रिफंड की प्रक्रिया में तेजी लाने में सक्षम होता है।'

एक कर अधिकारी ने कहा, 'छोटे रिफंड सिस्टम द्वारा जारी किएगए हैं, उन्हें तेजी से निपटा दिया गया है। वहीं बड़े रिफंड लंबित हैं, जिनमें अधिकारियों की मंजूरी की जरूरत होती है। कोविड के कारण अधिकारियों की उपस्थिति महज 15-20 प्रतिशत रही है।' एकेएम ग्लोबल के पार्टनर अमित माहेश्वरी ने कहा, 'रिफंड में कमी दो वजहों से हो सकती है। पहला, जिन मामलों में मानवीय हस्तक्षेप की जरूरत है, कोविड के कारण उन्हें जारी करने की रफ्तार सुस्त हो। जिन मामलों में नोटिस जारी किया गया है, उसमें आकलन अधिकारियों को धारा 241ए के तहत आयुक्त की पूर्व अनुमति मिलने तक रिफंड रोकने का अधिकार है।'

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