बिजनेस स्टैंडर्ड - बिजली के बढ़े बिल से उपभोक्ता परेशान
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बिजली के बढ़े बिल से उपभोक्ता परेशान

श्रेया जय एवं अमृता पिल्लई /  July 03, 2020

लोकप्रिय हास्य कलाकार वीर दास ने पिछले सप्ताह ट्विटर पर पूछा कि क्या किसी अन्य व्यक्ति को भी 'सामान्य राशि से तिगुना' बिजली का बिल मिला है? इसके जबाव में कई मशहूर हस्तियों समेत अनेक लोगों ने बढ़े बिल को लेकर अपनी प्रतिक्रियाएं साझा कीं। अभिनेत्री तापसी पन्नू ने भी अपने बिल की तस्वीरें भी साझा कीं जिसमें उनका बिल 36,000 रुपये बताया गया है। सिर्फ मुंबई ही नहीं बल्कि दिल्ली, बेंगलूरु, नोएडा, लखनऊ, कोच्चि, चेन्नई और विभिन्न राज्यों के कई शहरों के उपभोक्ताओं ने बिजली के बिलों में सामान्य दिनों के मुकाबले तेज बढ़ोतरी को लेकर सोशल मीडिया का सहारा लिया है। ये शिकायतें सरकारी एवं निजी बिजली वितरण कंपनियों दोनों के खिलाफ हैं। संबंधित बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) ने उपभोक्ताओं को यह बताने की कोशिश की है कि ये बिल अंतिम नहीं हैं क्योंकि कोविड-19 की रोकथाम के लिए लगाए गए लॉकडाउन के कारण मीटरों की रीडिंग नहीं ली जा सकी है।

सामान्य परिस्थितियों में बिजली कंपनियां बिलिंग चक्र (मासिक या दो माह में एक बार) के आधार पर बिजली मीटर की रीडिंग लेने के लिए एक व्यक्ति को घर-घर भेजती हैं। हालांकि, संबंधित राज्य बिजली नियामकों के निर्देशों के तहत, 22 मार्च से शुरू हुए लॉकडाउन के दौरान डिस्कॉम कंपनियों ने मीटर रीडिंग लेने पर रोक लगा दी है। मीटर रीडिंग के अभाव में उपभोक्ताओं को पिछले तीन महीनों (दिसंबर, जनवरी तथा फरवरी) की औसत खपत के आधार पर अनुमानित बिजली बिल प्राप्त हो रहे हैं।

टाटा पावर ने शनिवार को एक बयान में कहा, 'बेतहाशा गर्मी के महीनों में भी, जब उपभोक्ताओं ने काफी अधिक बिजली खर्च की, ऐसे में भी फरवरी/मार्च की खपत के आधार पर ही बिल भेजे गए।' पंखे, एयर कंडीशनर आदि के अधिक उपयोग के कारण अप्रैल से अगस्त-सितंबर तक बिजली की खपत बढ़ जाती है। हालांकि, कई उपभोक्ताओं, विशेष रूप से वाणिज्यिक एवं औद्योगिक उपभोक्ताओं का कहना है कि जब लॉकडाउन के दौरान उनकी दुकानें बंद रही हैं तो हजारों रुपयों में बिजली बिल आने का कोई औचित्य नहीं हैं। ट्विटर एवं कई व्हाट्सऐप ग्रुपों पर साझा की गई शिकायतों के अनुसार मार्च माह से बंद रेस्तरां मालिक, छोटे दुकानदार, औद्योगिक इकाइयां बढ़े हुए बिल के चलते सदमे में हैं।

ऐसी भी शिकायतें हैं कि औसत के आधार पर आया इस बार का बिल उपभोक्ताओं द्वारा किए गए पिछले भुगतान के आसपास भी नहीं हैं। अभिनेत्री तथा निर्देशक रेणुका शहाणे ने ट्विटर पर लिखा कि उनसे मई माह के लिए दो बार शुल्क वसूला गया और यह राशि काफी ज्यादा रही। मुंबई शहर में आम निवासी तथा स्थानीय राजनेता बिजली के बढ़े हुए बिलों के खिलाफ राज्य सरकार को पत्र लिख रहे हैं। कई उपभोक्ता अधिकार कार्यकर्ता बिजली के बिलों के भुगतान का बहिष्कार करने के लिए व्हाट्सऐप पर संदेश प्रसारित कर रहे हैं। ऐसे ही एक कार्यकर्ता ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि वे डिस्कॉक कंपनियों को उपभोक्ताओं को छूट देने के लिए कहें। कई डिस्कॉम कंपनियां उपभोक्ताओं से मीटर रीडिंग संबंधी अपनी चिंता को बताने का आग्रह कर रही हैं।

दिल्ली में, दो निजी डिस्कॉम कंपनियों ने उपभोक्ताओं को अस्थायी बिल के बारे में शिक्षित करने के लिए विभिन्न अभियान शुरू किए हैं। बीएसईएस दिल्ली ट्वीट एवं ट्यूटोरियल वीडियो के माध्यम से राज्य की जनता को अस्थायी बिल की गणना करने संबंधी जानकारी दे रही है। कंपनी ने उपभोक्ताओं से स्वयं मीटर रीडिंग लेने तथा कंपनी के मोबाइल ऐप पर उसे अपलोड करके सही बिल प्राप्त करने का आग्रह किया है। बीएसईएस ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा, 'शारीरिक दूरी कोरोना से इलाज के लिए एकमात्र तरीका है। आप स्वयं मीटर रीडिंग ले सकते हैं और ऐसा करके पुरस्कृत भी हो सकते हैं।' महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी अनंतिम बिलों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए पैम्फलेट वितरित कर रही है। हरियाणा और उत्तर प्रदेश में भी डिस्कॉम इसी तरह की कवायद कर रही हैं। केंद्र एवं विभिन्न राज्यों द्वारा अनलॉक की घोषणा के साथ सरकारी एवं निजी बिजली कंपनियां अब वास्तविक मीटर रीडिंग लेना शुरू कर रही हैं। कंपनियों ने बताया कि अब वास्तविक मीटर रीडिंग लेकर पिछले तीन महीनों के बिल की पुनर्गणना की जा रही है। अभी तक औसत गणना के लिए उपयोग में लिए गए तीनों महीने (दिसंबर, जनवरी और फरवरी) सर्दियों के महीने हैं और इन महीनों में अप्रैल-जून के मुकाबले औसत खपत कम है।

डिस्कॉम के एक अधिकारी ने कहा कि जून में मीटर की वास्तविक रीडिंग मिलने पर उपभोक्ताओं को समायोजित बिल प्राप्त होंगे और बिल राशि पर डेबिट / क्रेडिट आधार पर गणना की जाएगी। उन्होंने कहा, हालांकि गर्मियों के महीनों में अधिक खपत के साथ ही लॉकडाउन में घर से काम करने के बढ़ते चलन के कारण कारण अप्रैल-मई में भेजे गए बिलों को थोड़ा बढ़ाया गया था।

एक प्रमुख अधिकारी ने कहा, 'लॉकडाउन तथा कुछ उपभोक्ताओं की बढ़ती खपत के पैटर्न को देखते हुए कुल उपभोग में तेजी देखी गई है। कुछ जगह खपत में दो से तीन गुना तेजी भी देखी गई है। लोग घर से बाहर नहीं निकल रहे और महामारी के दौरान घर बैठे ही काम तथा अध्ययन कर रहे हैं।'

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