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अर्थव्यवस्था सुस्त करने में जीएसटी व नोटबंदी अहम

दिलाशा सेठ /  June 30, 2020

बीएस बातचीत

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को पिछले 3 साल में जिस तरह से लागू किया गया है, उससे निराश पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने दिलाशा सेठ से बातचीत में केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था में पूरी तरह बदलाव पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि बदतर कर दरों के अलावा अनुपालन के हिसाब से यह दुनिया की सबसे कठिन कर व्यवस्था है। प्रमुख अंश...


वस्तु एवं सेवा कर व्यवस्था में अपनी स्वायत्तता को लेकर राज्य सरकारें थोड़ी भयभीत हैं। इस 3 साल के बारे में आपकी क्या राय है?

जीएसटी लागू होने के पहले मैंने कहा था कि जीएसटी न होने से बेहतर है कि किसी तरह का जीएसटी हो। मैं दिल से इस पर विश्वास करता हूं। लेकिन जिस तरह से जीएसटी लागू किया गया, मैंने अपनी सोच बदल दी है। एक भी समस्या ऐसी नहीं है, जो जीएसटी में न हो। यह नहीं कह रहा कि मैं इसके विरोध में हूं। एक भी राज्य ऐसा नहीं है, जो इस समय घाटे में न हो। कोविड के पहले जीएसटी और नोटबंदी ने अर्थव्यवस्था सुस्त करने में अहम भूमिका निभाई।


आपके मुताबिक जीएसटी को लेकर प्रमुख मसले क्या हैं?

तीन साल बीत गए और अभी भी रिटर्न को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका। मुझे लगता है कि अभी इसमें एक साल और लग जाएगा। हमारे यहां दुनिया की सबसे खराब कर दरें हैं। हम एएआर रूलिंग का विपरीत असर देख रहे हैं।  एएआर में मामले हारने वाले लोगों की संख्या देखें। गुजरात एएआर रूलिंग में कहा गया है कि जमीन की बिक्री पर कर की देयता है।

जीएसटी में समस्याओं के समाधान पर आपकी क्या सिफारिश है?

पंजाब ने जीएसटी को लेकर करीब 100 सुझाव दिए हैं और उन पर संज्ञान भी नहीं लिया गया। जीएसटी में परिषद के वाइस चेयरमैन का प्रावधान किया गया है। उन्होंने इसे लागू नहीं किया और राज्यों के बगैर ही एजेंडे को अंतिम रूप दिया जा रहा है।


क्या आप कह रहे हैं कि परिषद में वाइस चेयरमैन न होने से राज्यों के मसलों पर उचित ध्यान नहीं है?

जीएसटी सचिवालय काम कर रहा है, ऐसे में राज्यों में से एक वाइस चेयरमैन होना चाहिए, जो राज्यों के एजेंडे को रख सके। अगर आप हिस्सेदारों की नहीं सुनेंगे तो आपको इच्छित परिणाम नहीं मिलेंगे। अनुपालन के हिसाब से यह दुनिया का सबसे कठिन जीएसटी है।

क्या आपको उम्मीद थी कि दो साल में ही मुआवजा व्यवस्था बाधित हो जाएगी?

 

पंजाब को ज्यादा मुआवजे की जरूरत है क्योंकि हमारा एकचौथाई कर राजस्व खाद्यान्न पर आधारित है, जिसे जीएसटी में शामिल कर लिया गया है। इससे ढांचागत असर पड़ा है।

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