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अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करें देश : भारत

आदिति फडणीस /  June 24, 2020

भारत ने मंगलवार को संयम बरतते हुए विश्व के शीर्ष देशों से कहा कि वे अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करके तथा साझेदार मुल्कों के हितों को चिह्नित करते हुए अनुकरणीय ढंग से पेश आएं। उसने चीन के साथ चल रहे सीमा विवाद के कारण उपजे सैन्य तनाव के बारे में कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया।

रूस-भारत और चीन (आरआईसी) के त्रिपक्षीय मंच की एक वर्चुअल बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत की आहत भावनाओं को स्वर दिया लेकिन उन्होंने किसी देश का नाम नहीं लिया। रूस के विदेश मंत्री सेर्गेई लावरोव ने कहा कि भारत और चीन को अपने मतभेद दूर करने के लिए किसी की मदद की आवश्यकता नहीं है। बैठक में चीन के विदेश मंत्री ने क्या कहा इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। दोनों देशों के बीच हालिया सीमा संघर्ष के बाद यह विदेश मंत्री स्तर की पहली बैठक है। उक्त संघर्ष में भारत के 20 जवान शहीद हुए जबकि चीनी पक्ष से मरने वालों का कोई आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया गया। इसके चलते भारत में चीन को लेकर भारी विरोध की स्थिति बन गई है।

इससे पहले 17 जून को चीन के विदेश मंत्री वांग यी को फोन करके कहा था कि सीमा पर जो हिंसा हुई और जानें गईं वह चीन के सैनिकों की एलएसी पर यथास्थिति बदलने की सोची समझी पूर्वनियोजित हरकत की वजह से हुआ।

आज दोनों पक्षों के बीच कोर कमांडर स्तर की वार्ता 11 घंटे बाद समाप्त हुई। यह स्पष्ट है कि भारत सैन्य तनाव कम करना और आर्थिक मोर्चे पर आक्रामकता दिखाना चाहता है। भारत ने इस दिशा में प्रमुख तौर पर आर्थिक कदम ही उठाए हैं ताकि चीन को सीमा पर की गई हरकत की कीमत चुकानी पड़े। दिलचस्प बात यह है कि आसियान के 10 देशों को साथ लाने वाले संगठन क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक सहयोग (आरसेप) जिसका चीन प्रमुख अंग है, ने भारत से कहा है कि भारत को संगठन में लौट आना चाहिए। भारत नवंबर 2019 में वार्ता से अलग हो गया था लेकिन सदस्यों का कहना है कि भारत के लिए दरवाजे खुले हैं। चीनी समाचार पत्र ग्लोबल टाइम्स ने आरसेप के मंत्रिस्तरीय बैठक वक्तव्य के हवाले से कहा कि भारत सन 2012 में इसकी शुरुआत से ही आरसेप वार्ता का प्रमुख भागीदार रहा है। आरसेप में उसकी भागीदारी इस क्षेत्र के विकास में मदद करेगी और संगठन जोर देकर कहता है कि आरसेप के दरवाजे भारत के लिए खुले हैं।

मंगलवार की बैठक में जयशंकर ने जोर दिया कि भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता का तगड़ा दावेदार है। जयशंकर ने सन 1940 के दशक में दूसरे विश्वयुद्ध के विजेताओं द्वारा विश्व व्यवस्था को नए सिरे से निर्मित करने का उल्लेेख किया और कहा कि उस दौर की राजनीतिक परिस्थितियों ने भारत को जरूरी पहचान नहीं हासिल होने दी।

जयशंकर ने कहा, 'ऐतिहासिक अन्याय में 75 वर्षों में कोई सुधार नहीं हुआ जबकि इस बीच दुनिया बदल गई। इसलिए यह आवश्यक है कि दुनिया भारत का योगदान पहचाने और अतीत की गलती सुधारे।' उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 23 लाख भारतीयों ने जंग में शिरकत की थी और करीब 1.4 करोड़ लोग युद्ध से जुड़े उत्पादन में शामिल थे।

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मसलों में समकालीन हकीकत का ध्यान रखा जाना चाहिए। जयशंकर ने कहा, 'संयुक्त राष्ट्र की शुरुआत 50 सदस्यों के साथ हुई थी और आज 193 सदस्य हैं। यकीनन निर्णय प्रक्रिया में इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती। हम,आरआईसी के देश भी वैश्विक एजेंडे को आकार देने में सक्रिय साझेदार रहे हैं। आशा है कि हम भी सुधरी हुई बहुपक्षीयता के मूल्यों में शामिल होंगे।'

आरर्आइसी की बैठक पहले मार्च में होनी थी लेकिन कोविड-19 के कारण इसे टाल दिया गया। इसका आयोजन रूस की पहल पर दूसरे विश्व युद्ध के समापन के 75 वर्ष पूरे होने और संयुक्त राष्ट्र की बुनियाद रखे जाने के अवसर को रेखांकित करने के लिए किया गया।

जयशंकर ने कहा कि यह विशेष बैठक अंतरराष्ट्रीय संबंधों के जांचे परखे सिद्धांतों पर भारत के यकीन को दोहराती है। उन्होंने कहा कि आज चुनौती अवधारणाओं और मानकों की नहीं बल्कि उनके अमल में समता की है। उन्होंने कहा कि दुनिया के शीर्ष देशों को हर प्रकार से अनुकरणीय होना चाहिए।

जयशंकर ने कहा, 'अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान, साझेदारों के वैध हितों को मानना, बहुपक्षीयता का समर्थन और साझा हितों को आगे बढ़ाना ही टिकाऊ विश्व व्यवस्था बनाने की इकलौती राह है।' रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी मॉस्को में हैं जहां वे परेड में हिस्सा लेंगे और रूस के शीर्ष रक्षा नेतृत्व से मुलाकात करेंगे। एक भारतीय दल विजय दिवस परेड में भी हिस्सा लेगा।

कई विशेषज्ञों और राजनयिकों ने जयशंकर के चीन की आलोचना में संयम बरतने की तारीफ की है। पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल कहते हैं, 'चीन के उकसावे के बावजूद सरकार का सार्वजनिक वक्तव्य में संयम बरतना कदम समझदारी भरा है। इससे कूटनयिक हल तलाशने की राह बाधित नहीं होगी। चीन के अस्वीकार्य व्यवहार के समक्ष बिना जनभावनाएं भड़काए अपनी संप्रभुता की रक्षा करने की हमारी दृढ़ता स्पष्ट है।' उन्होंने कहा कि मौजूदा गतिरोध समाप्त होने पर भी हमें चीन को लेकर अपनी नीति की समीक्षा करनी होगी।

Keyword: अंतरराष्ट्रीय कानून, चीन, सीमा विवाद, सैन्य तनाव, आरआईसी, त्रिपक्षीय मंच, वर्चुअल बैठक, एस जयशंकर,
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