बिजनेस स्टैंडर्ड - ई-चौपाल को बेहतर बना रही आईटीसी
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ई-चौपाल को बेहतर बना रही आईटीसी

ईशिता आयान दत्त / कोलकाता June 23, 2020

आईटीसी के चेयरमैन वाईसी देवेश्वर के समक्ष एक युवा मैनेजर एस शिवकुमार ने ई-चौपाल स्थापित करने के लिए 50 लाख रुपये का एक प्रस्ताव रखा। यह एक ऐसा मॉडल था जो इंटनेट की मदद से लघु एवं सीमांत किसानों को सशक्त बनाता है। लेकिन काफी विचार-विमर्श के बाद इसके लिए 10 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी गई जो प्रस्तावित रकम से काफी अधिक थी। इस प्रकार ई-चौपाल प्लेटफॉर्म की स्थापना हुई थी।

पिछले 20 वर्षों के दौरान यह महज दिखावे की परियोजना नहीं रही बल्कि यह आईटीसी के कृषि-सोर्सिंग बुनियादी ढांचे का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा रहा है। साथ ही इससे किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ई-चौपाल मॉडल के कारण किसानों की आय में 70 से 300 फीसदी तक की वृद्धि हुई है जबकि आईटीसी के लिए जिंसों की सोर्सिंग लागत में करीब 5 फीसदी की कमी आई है। जबकि ये 2016 तक के नतीजे हैं।

अपने विकास का एक लंबा सफर तय करने वाला यह मॉडल कृषि आपूर्ति शृंखला को एक प्लेटफॉर्म में बदलकर वस्तुओं एवं सेवाओं की दोतरफा आपूर्ति सुनिश्चित की है। किसानों और ग्रामीण उपभोक्तओं के फायदे के लिए इसने एक माहौल तैयार किया है लेकिन तकनीकी उन्नयन और सरकार के कृषि सुधारों के साथ यह अपने चौथे संस्करण में कहीं बेहतर प्रदर्शन के लिए तैयार है। ई-चौपाल के चौथो संस्करण में मुख्य तौर पर मोबाइल फोन और डिजिटल प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया गया है और परीक्षण के तौर पर इसकी शुरुआत 2019 में हुई थी।

आईटीसी के समूह प्रमुख (कृषि एवं आईटी कारोबार) शिवकुमार ने कहा कि अपने मौजूदा प्रारूप के ताजा संस्करण के तहत इसने एग्री सर्विसेज एग्रीगेटर मॉडल के जरिये कृषि उद्यमिता और कृषि तकनीकी स्टार्टअप को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया है। उन्होंने कहा कि इसके जरिये किसानों को आधुनिक तकनीक एवं जानकारी के जरिये बहुआयामी तरीके से सशक्त बनाने, फसल के बारे में सलाह देने, फसल संबंधी समस्याओं का आकलन करने, मौसम की भविष्यवाणी करने आदि पर ध्यान दिया गया है ताकि किसानों की आय को बेहतर किया जा सके। ई-चौपाल 4.0 के तहत व्यक्तिगत सेवाओं को बेहतर करने और डेटा एनालिटिक्स के जरिये संचालन पर जोर दिया गया है। शिवकुमार ने कहा, 'कृषि तकनीकी स्टार्टअप के लिए यह एक प्रमुख प्लेटफॉर्म होगा।' आईटीसी अपनी पहुंच और परिचालन दायरे में विस्तार कर रही है और इसलिए कृषि संबंधी सुधार उसे एक अलग मुकाम देगा। दूसरी ओर, आवश्यक वस्तु अधिनियम (ईसीए) से छूट मिलने के कारण मात्रात्मक वृद्धि का कोई जोखिम नही होगा। इसके अलावा किसानों से सीधे तौर पर सोर्सिंग के लिए मंडी उपकर का भुगतान नहीं करने से निवेश की वित्तीय व्यवहार्यता में सुधार होगा।

ई-चौपाल को महज छह इंस्टॉलेशन के साथ जून 2000 में लॉन्च किया गया था और शुरू में ही ई-चौपालों की संख्या में तेजी से वृद्धि दर्ज की गई। अप्रैल 2003 तक इनकी संख्या करीब 1,900 हो गई थी इसके जरिये 11,000 गांवों के करीब 12 लाख किसानों को सेवाएं उपलब्ध कराई गई। साल 2007 तक इनकी संख्या बढ़कर 6,500 हो गई। उस दौरान रोजाना करीब छह चौपाल खुल रहे थे लेकिन 2007-08 के दौरान निर्यात पर प्रतिबंध लगने, सब्सिडी, स्टॉक नियंत्रण, वायदा पर निषेध और कृषि उत्पाद विपणन समिति (एपीाएमसी) अधिनियम में संशोधन की धीमी रफ्तार से इसे तगड़ा झटका लगा। इसके बाद सेवाओं का दायरा बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है। ई-चौपाल का दायरा बढ़कर अब करीब 40 लाख किसानों तक पहुंच गया है।

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