बिजनेस स्टैंडर्ड - 'स्वदेशी ना खरीदना पड़ेगा महंगा'
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'स्वदेशी ना खरीदना पड़ेगा महंगा'

शुभायन चक्रवर्ती / नई दिल्ली 06 22, 2020

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा देश के लोगों को स्वदेशी वस्तुओं की खरीदारी पर अधिक जोर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि आयातित वस्तुएं भले ही सस्ती क्यों न हो, लेकिन घरेलू विनिर्माता और ग्राहक दोनों के लिहाज से स्वदेशी वस्तुओं की खरीदारी सकारात्मक एवं लाभप्रद साबित होगी। उन्होंने कहा कि सस्ता आयात घरेलू विनिर्माण उद्योग को प्रभावित करता है और इससे उपभोक्ता भी प्रभावित होते हैं।

गोयल ने 12वें होरासिस इंडिया मीटिंग में कहा कि घरेलू विनिर्माताओं के अस्तित्व के लिए भारतीय उत्पाद खरीदना बेहद जरूरी है। इस बैठक का आयोजन स्विटजरलैंड स्थित संस्था होरासिस और भारतीय उद्योग परिसंघ  ने किया था। गोयल ने कहा, 'अगर घरेलू उत्पाद बाहर से आई वस्तुओं के मुकाबले थोड़ी बहुत महंगी होती है तब भी भारतीय उत्पाद खरीदना बेहतर विकल्प है। इसकी वजह यह है कि लघु अवधि में बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनियां काफी कम कीमतों पर अपने उत्पाद घरेलू बाजार में खपा सकती हैं और दीर्घ अवधि में अगर देसी विनिर्माता अपना कारोबारी अस्तित्व नहीं बचा पाते हैं या प्रतिस्पद्र्धा का सामना नहीं कर पाते हैं तो उस स्थिति में हमें एक बड़ी कीमत चुकानी होगी।'

मंत्री ने कहा कि देश में कई क्षेत्रों में देसी विनिर्माण की पैठ नहीं होने का बड़ा खमियाजा भुगतना पड़ा है। कोविड-19 के बाद सरकार ने स्वदेशी पर जोर दिया है। इससे पहले जनवरी में गोयल ने कारोबारियों को स्वदेशी वस्तुओं को बढ़ावा देने और इनकी बिक्री करने का आह्वान किया था। हालांकि गोयल ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री के आत्म निर्भर बनने के आह्वान का मतलब संरक्षणवादी रवैया अपनाना नहीं है।

सहारे की जरूरत नहीं

गोयल ने घरेलू उद्योग को विशेष रियायत देने के खिलाफ भी दिखे। उन्होंने कहा कि उनके मंत्रालय ने सतत एवं निरंतर वृद्धि पर ध्यान दिया है न कि निर्यात के बदले कुछ विशेष लाभ देने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा, 'सब्सिडी से कभी किसी कारोबार का भला नहीं हुआ है। इसका उलटा असर यह हुआ हम रियायतों पर निर्भर हो गए हैं और पूरी ताकत के साथ दुनिया में प्रतिस्पद्र्धा नहीं कर पा रहे हैं।'

वैश्विक स्तर पर मांग कमजोर होने और कई सौदे रद्द होने के बीच देश में कई निर्यात क्षेत्रों ने सरकार से लगातार प्रोत्साहनों की मांग की है।

विदेशी पूंजी

गोयल ने कहा कि सरकार देश को विनिर्माण केंद्र के तौर पर विकसित करने के लिए विदेशी निवेशकों को आमंत्रित करने में सक्रिय रही है। उन्होंने कहा कि इससे देश में विनिर्माण को बढ़ावा तो मिलेगा ही, साथ ही देश निर्यात का बड़ा केंद्र बनने की दिशा में भी अग्रसर हो जाएगा। उन्होंने कहा कि वाहन कल-पुर्जा, परिधान, खेल सामग्री, सोलर सेल विनिर्माण और इलेक्ट्रॉनिक वाहन आदि क्षेत्रों में सुधार करने उपाय किए गए हैं। गोयल ने कहा कि इन क्षेत्रों में विदेशी और घरेलू निवेशकों के लिए कई बड़े अवसर मौजूद हैं।


महाराष्ट्र में चीन के निवेश पर यथास्थिति

महाराष्ट्र सरकार 15 जून को चीन की तीन कंपनियों के साथ किए गए 5,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश समझौतों पर यथास्थिति रखेगी। प्रदेश के उद्योग मंत्री सुभाष देसाई ने सोमवार को यह जानकारी दी। हालांकि उन्होंने साफ किया कि यथास्थिति का मतलब यह नहीं है कि इन परियोजनाओं के समझौतों को रद्द कर दिया गया है। राज्य सरकार के इस कदम को लद्दाख में सीमा पर भारत और चीन के बीच झड़प के आलोक में देखा जा रहा है। सैन्य झड़प के कुछ घंटे पहले ही ग्रेट वॉल मोटर्स ने 3,770 करोड़ रुपये, पीएमआई इलेक्ट्रो मोबिलिटी सॉल्यूशंस व फोटॉन के संयुक्त उपक्रम ने 1,000 करोड़ और हेंगली इंजीनियरिंग ने 250 करोड़ रुपये के निवेश के समझौते किए थे। बीएस

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