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प्रतिफल बढ़ाना चाहें तो स्वैच्छिक भविष्य निधि अपनाएं

बिंदिशा सारंग /  June 22, 2020

शेयर बाजार कुछ सुधरता दिख रहा है, लेकिन वैश्विक बाजारों की उठापटक और कोविड-19 के डर के बीच इसके बारे में पुख्ता तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता। डेट म्युचुअल फंडों को परिसंपत्ति गुणवत्ता जोखिम के कारण निकासी (रिडेंप्शन) का दबाव झेलना पड़ रहा है और बैंक सावधि जमाओं (एफडी) की दरें घट रही हैं। संक्षेप में यह हर सामान्य निवेशक के पोर्टफोलियो की कहानी है। मगर ऐसे समय में आपके लिए कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) की राह पकडऩा मददगार साबित हो सकता है। चालू वित्त वर्ष शुरू हुआ ही है, इसलिए आप इस योजना को अपनाकर अपने पोर्टफोलियो का प्रतिफल बढ़ा सकते हैं।

एक कर्मचारी के रूप में आपको अपने मूल वेतन के कम से कम 12 फीसदी हिस्से का ईपीएफ में योगदान देना पड़ता है। इसके अलावा आप अपना 100 फीसदी मूल वेतन (एवं महंगाई भत्ता, अगर है) कर्मचारी भविष्य निधि में निवेश कर सकते हैं। इसमें 12 फीसदी से अतिरिक्त हिस्सा स्वैच्छिक भविष्य निधि (वीपीएफ) में जाता है।

वेल्थ360 के मुख्य वित्तीय योजनाकार अनुज शाह ने कहा, 'यह डेट में निवेश का सबसे अच्छा मौका है। इस समय वीपीएफ में निवेश करना बहुत अच्छा विचार है। आप वीपीएफ की तुलना इक्विटी से नहीं कर सकते। फिर भी अगर आप इसकी अन्य डेट योजनाओं से तुलना करते हैं तो यह विशेष रूप से मुश्किल दौर में बहुत अच्छा विकल्प साबित हो सकता है।' हालांकि ईपीएफ विकल्प से इतर वीपीएफ में आपकी कंपनी का कोई योगदान नहीं होता है।

आनंद राठी वेल्थ मैनेजमेंट के मुख्य कार्याधिकारी (डिजिटल संपत्ति प्रबंधन) श्रीराम अय्यर ने कहा, 'आप निवेश करते समय जिन तीन-चार आवश्यक पहलुओं पर ध्यान देते हैं, उनमें ब्याज दर जोखिम, क्रेडिट जोखिम, कर के लिहाज से लाभ और तरलता शामिल हैं। इनमें वीपीएफ तीन मापदंडों पर खरे उतरता है। इसमें सरकार समर्थित होने की वजह से क्रेडिट जोखिम शून्य है, इसलिए इसे जोखिम मुक्त निवेश माना जाता है।' शाह ने कहा, 'ब्याज दर के लिहाज से यह एफडी की तुलना में काफी बेहतर है। ब्याज दर में सालाना बदलाव के बावजूद यह दर काफी आकर्षक है।' इस समय ब्याज दर सालाना 8.5 फीसदी के आकर्षक स्तर पर है। इसमें कर लाभ भी मिलता है। वीपीएफ योगदान पर धारा 80सी के तहत कटौती हासिल की जा सकती है। धारा 80सी के तहत कुल कटौती की सीमा 1.5 लाख रुपये है। एनए शाह एसोसिएट्स में पार्टनर गोपाल बोहरा ने कहा, 'स्वैच्छिक योगदान पर कर का ईईई तरीका लागू होता है। यानी योगदान पर धारा 80सी के तहत छूट मिलती है, ब्याज आमदनी पर भी छूट है और पांच साल बाद निकासी पर भी कोई कर नहीं है। इससे यह कर बचत का शानदार विकल्प बन जाता है।' हालांकि तरलता के स्तर पर वीपीएफ खरा नहीं उतरता है। अय्यर ने कहा, 'हालांकि वीपीएफ तीन मापदंडों पर बहुत अच्छा है। मगर इसमें तरलता नहीं है क्योंकि यह लंबी अवधि के लिए है और आप इस पैसे को पहले छू नहीं पाएंगे।' हालांकि आप आंशिक निकासी कर सकते हैं। 

बोहरा कहते हैं, 'अगर पांच साल तक योगदान के बाद निकासी की जाती है तो वीपीएफ कर मुक्त है। हालांकि अगर राशि को पांच साल से पहले निकाला जाता है तो ऐसे स्वैच्छिक योगदान पर प्राप्त होने वाला ब्याज कर योग्य होता है। पांच साल बाद इसके कर लाभ और तरलता को देखते हुए यह कर बचत के लिहाज से शानदार निवेशों में से एक है मगर वेतनभोगी वर्ग में बहुत अधिक लोकप्रिय नहीं है।' वीपीएफ का ग्राहक बनने के लिए आपको वित्त वर्ष में किसी भी समय अपने नियोक्ता को लिखित में बताना होगा। ऐसे में क्या आपको निवेश करना चाहिए? अय्यर ने कहा, 'जब संपत्ति बढ़ाने का सवाल आता है तो आपको तरलता और अन्य मापदंड देखने चाहिए। इन्हें देखते हुए म्युचुअल फंडों को संपत्ति बढ़ाने का सबसे अच्छा जरिया माना जाता है। मौजूदा हालात में अगर पैसा लंबी अवधि (8-10 साल) के लगाना चाहते हैं और यह लंबी अवधि में डेट आवंटन का हिस्सा है तो आपको आगे बढऩा चाहिए। इसमें निवेश करते समय तरलता के बारे में जरूर विचार कर लें।'

अन्य लंबी अवधि का कर बचत वाला विकल्प सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ) है। लेकिन शाह कहते हैं कि आपके डेट हिस्से में वीपीएफ पहली योजना होनी चाहिए। वहीं खुद का काम करने वाले लोगों को पीपीएफ का विकल्प चुनना चाहिए। इस समय भारत और पूरे विश्व में स्थितियां अनिश्चित नजर आ रही हैं, इसलिए ऊंची ब्याज दरों के लिए वीपीएफ में कुछ पैसा लगाना खराब विचार नहीं होगा।

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