बिजनेस स्टैंडर्ड - बैंक वसूली को आएं तो क्या करें उपाय
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बैंक वसूली को आएं तो क्या करें उपाय

संजय कुमार सिंह और बिंदिशा सारंग /  06 22, 2020

पिछले कुछ समय में आई खबरों में कहा जा रहा है कि बैंक और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) अगले कुछ महीनों में यह सुनिश्चित करने की कोशिशें बढ़ाने जा रही हैं कि खुदरा ऋणों की किस्तें आने में देरी न हो। बहुत से बैंकों एवं एनबीएफसी ने अन्य विभागों के कर्मचारियों को वसूली के काम में लगा दिया है। जिन खुदरा कर्जदारों के पास पैसे की कमी है मगर कर्जदाता उन पर कर्ज लौटाने के लिए दबाव बना रहे हैं, उन्हें घबराने की या आक्रामक रुख अख्त्यार करने की जरूरत नहीं है। उसके बजाय उन्हें उचित जवाब देना चाहिए।

ऋणदाताओं के पास आने वाली किस्तें बाउंस होने की दर आजकल 2-3 गुना बढ़ गई है। बाउंस दर का मतलब कर्जदाताओं का वह अनुपात है, जो अपनी ईएमआई समय से नहीं चुकाते हैं। बैंकों को डर है कि बाउंस दर इसी तरह ऊंची बनी रही तो आगे जाकर फंसे हुए कर्जों (एनपीए) में अच्छी खासी बढ़ोतरी हो सकती है। बैंक इस बात से भी चिंतित हैं कि कर्ज लौटाने में छह महीने की मोहलत से कर्जदारों के व्यवहार में बदलाव आ सकता है। बहुत से ऋणी यह मान सकते हैं कि अगर वे डिफॉल्ट करेंगे तो उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी। उच्चतम न्यायालय में दायर एक याचिका में आग्रह किया गया था कि मोहलत की अवधि के दौरान ब्याज माफ किया जाए। इस पर अपने जवाब में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने एक हलफनामे में कहा कि  वह छह महीनों के लिए पूरी तरह ब्याज माफ करने के खिलाफ है क्योंकि इससे ऋणदाताओं की वित्तीय सेहत प्रभावित होगी और जमाकर्ताओं के हितों पर भी जोखिम पैदा होगा।


मॉरेटोरियम से बचें

आरबीआई की तरफ से मुहैया गए आंकडों के मुताबिक अभी तक करीब 39 फीसदी ऋण मोहलत यानी मॉरेटोरियम के तहत हैं। जिन लोगों ने अभी तक यह विकल्प नहीं अपनाया है, उन्हें इसके नफे-नुकसान के बारे में ठीक से विचार कर लेना चाहिए। जिन लोगों को नकदी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है, उन्हें इससे बड़ी राहत मिलेगी। ट्रांसयूनियन सिबिल की उपाध्यक्ष और प्रमुख (ग्राहक से सीधा संवाद) सुजाता अहलावत ने कहा, 'कर्ज भुगतान को टालने के विकल्प से ऋणदाता बाद में भुगतान के लिए बचत करने में सक्षम होंगे, जिससे उनकी क्रेडिट हिस्ट्री भी खराब नहीं होगी।'

जिन लोगों के पास पैसा है, उन्हें यह विकल्प इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। अहलावत ने कहा, 'ऋणदाताओं को आखिर भुगतान करना ही होगा। इससे उनका कर्ज का बोझ बढ़ेगा क्योंकि बकाया राशि पर छह महीने तक ब्याज जुड़ेगा।' यह असर उन लोगों पर अधिक पड़ेगा, जिनके ऋण को शुरू हुए कुछ समय ही हुआ है। अहलावत ने कहा, 'ऋण की शुरुआती अवधि के दौरान ईएमआई में ब्याज का बड़ा हिस्सा होता है। इसलिए अगर ऐसे ऋणी अपनी ईएमआई टालते हैं तो उनके ऋण पर उस व्यक्ति से अधिक असर होगा, जिसके ऋण की अवधि जल्द खत्म होने जा रही है।' क्रेडिट कार्ड के बकाये पर मोहलत का विकल्प चुनने का मतलब है कि ब्याज की ऊंची दर चुकानी होगी और यह दर किसी नए खर्च पर तत्काल लागू होगी। मोहलत लेने का कर्जदार की भविष्य में ऋण लेने की क्षमता पर भी असर पड़ सकता है। मुंबई में रिपेयरिंग बोरोअर्स क्रेडिट स्कोर्स के विशेषज्ञ अरुण रामामूर्ति ने कहा, 'क्रेडिट ऑफिसर यह देखेंगे कि आप उस चुनौतीपूर्ण दौर में अपनी किस्त चुका पाए या नहीं। जो अपनी ईएमआई चुकाते रहें हैं, उन्हें जाहिर तौर पर दूसरा ऋण मिलने की संभावना होगी।'


वैकल्पिक योजना बनाएं

बहुत से वेतनभोगी लोग, जिनकी नौकरी नहीं रही है या ऐसे कारोबारी जिनकी आमदनी में भारी गिरावट आई है, वे अगस्त के अंत तक ईएमआई का भुगतान शुरू करने की स्थिति में नहीं होंगे। रामामूर्ति ने कहा, 'कर्जदारों को अगस्त के बाद की योजना बनानी चाहिए क्योंकि आर्थिक सुस्ती और इसलिए आमदनी से संबंधित चुनौतियां भी तब तक खत्म नहीं होने के आसार हैं।'

अगर आपको अपनी ईएमआई चुकाने में दिक्कतें नजर आ रही हैं तो जल्द से जल्द अपने बैंक के साथ अपनी समस्याओं पर बातचीत शुरू करें। रामामूर्ति ने कहा कि बैंकों के कर्जदारों की बात सुनने की उम्मीद है, विशेष रूप से अगर वे यात्रा, आतिथ्य, विमानन जैसे गहरी मुश्किल में फंसे क्षेत्रों से जुड़े हैं। इक्विफिक्स में बिज़नेस डेवलपमेंट लीडर (भारत एवं एमईए) मनु सहगल ने कहा, 'आप आपके ऋण को पुनर्गठित करने के लिए तैयार हो सकते हैं ताकि आपकी ईएमआई कम हो जाए।' इस तरह अगर कोई कार ऋण पांच साल के लिए लिया गया था तो उसकी अवधि बढ़ाकर सात साल की जा सकती है। डीएसके लीगल में पार्टनर अंजन दासगुप्ता ने कहा, 'अभी तक बैंक और एनबीएफसी खुदरा ऋणों के पुनर्गठन को लेकर ज्यादा सख्त रहे हैं। हालांकि हम जिन हालात में हैं, उसमें वे खुदरा ऋणों के लिए भी इस विकल्प को तलाशने को तरजीह दे सकते हैं।' डिफॉल्ट से पहले ऋणदाता से संपर्क करने से ऋणदाता को यह संदेश जाएगा कि आप कर्ज लौटाना चाहते हैं और हालात से बचने की कोशिश नहीं कर रहे हैं।


अन्य स्रोतों का इस्तेमाल

अगर आपका ऋणदाता कोई राहत नहीं मुहैया कराता है तो आपको अपने संसाधनों का सहारा लेना पड़ेगा। सहगल ने कहा, 'वेतनभोगी कर्मचारी अपने कर्मचारी भविष्य निधि कोष से निकासी कर सकते हैं। जिन लोगों के पास सोने के गहने हैं, वे गोल्ड लोन ले सकते हैं।' वित्तीय शिक्षक एवं विमन्त्रा में मनी मेंटर मरिन अग्रवाल का कहना है कि कर्जदारों को अपने निवेश की निकासी करनी चाहिए या अपने परिवार से मदद लेनी चाहिए।

किसी भी कीमत पर डिफॉल्ट से बचें। सहगल ने कहा, 'कोई भी डिफॉल्ट आपकी क्रेडिट हिस्ट्री में जुड़ जाता है। इससे भविष्य में आपके लिए ऋण के विकल्प खत्म हो जाएंगे। अगले 5 से 10 साल बाद भी कोई आपको कर्ज देने के लिए तैयार नहीं होगा।'


अधिकारों का ध्यान रखें

अगर ईएमआई का 30 दिन तक भुगतान नहीं होता है तो ऋण को देरी से भुगतान के रूप में वर्गीकृत कर दिया जाता है। इससे ऋणी के क्रेडिट स्कोर पर प्रतिकूल असर पड़ता है। ऋणदाता कर्जदार को किस्त चुकाने के लिए फोन कॉल करने और ईमेल भेजना शुरू कर देता है। नब्बे दिन के बाद ऋण को फंसे हुए (एनपीए) की श्रेणी में डाल दिया जाता है। उसके बाद ऋणदाता अपने वसूली एवं संग्रह एजेंट भेजता है, जो कर्जदार से आमने-सामने बातचीत कर उसे कर्ज चुकाने के लिए सहमत करते हैं। परिसंपत्ति पर कब्जे को अंतिम तरीके के रूप में इस्तेमाल किया जाता है और यह लंबी प्रक्रिया है।

रिकवरी एजेंट का नाम सुनते ही बहुत से लोगों के दिल में डर बैठ जाता है। हालांकि कर्जदारों को यह बात याद रखनी चाहिए कि रिकवरी एजेंटों के लिए भी एक आचार संहिता है। सहगल ने कहा, 'कर्ज में देरी करने वाले कर्जदारों के भी कुछ अधिकार हैं, जिनकी उन्हें जानकारी होनी चाहिए।' अगर कोई कलेक्शन एजेंट दुव्र्यवहार करता है तो कर्जदार संबंधित बैंक को शिकायत कर सकते हैं। अगर बैंक कोई कार्रवाई नहीं करता है तो कर्जदार बैंकिंग लोकपाल के पास शिकायत दर्ज करा सकते हैं। वह अदालत में भी जा सकता है। पीएसएल एडवॉकेट्स ऐंड सॉलिसिटर्स के संस्थापक एवं प्रबंध साझेदार समीर जैन ने कहा, 'बहुत सी अदालतों ने समय-समय पर एजेंटों द्वारा जोर-जबरदस्ती से वसूली को अवैध करार दिया है। अगर बैंक की तरफ से रिकवरी एजेंटों के जरिये ऐसी कोई कोशिश की जाती है तो ग्राहक निषेधाज्ञा के लिए तत्काल अदालत से संपर्क कर सकते हैं।' वह कहते हैं कि अदालतों के मौजूदा माहौल में कर्जदारों के प्रति सहानुभूति बरतने के आसार हैं और स्टे हासिल करने में ज्यादा समय नहीं लगेगा।

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