बिजनेस स्टैंडर्ड - क्या तीसरी बार भी भाग्यशाली होगा निफ्टी-50 इंडेक्स?
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Thursday, July 16, 2020 07:09 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विश्लेषण खबर

क्या तीसरी बार भी भाग्यशाली होगा निफ्टी-50 इंडेक्स?

सुंदर सेतुरामन /  June 21, 2020

निफ्टी के पिछला बंद स्तर 10,244 को (100 दिन के मूविंग एवरेज से ऊपर) अहम तकनीकी संकेतक माना जा रहा है। ज्यादातर ट्रेडर की निगाहें 10,350 पर जमी हुई है, एक ऐसा स्तर जहां से 50 शेयरों वाला इंडेक्स पिछले सप्ताह दो बार पीछे लौटा। तकनीकी विश्लेषकों ने कहा, अगर निफ्टी इस स्तर के पार जाने में कामयाब रहता है तो अगला स्तर 10,550 हो सकता है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि बैंकिंग शेयरों और दिग्गजों मसलन रिलायंस इंडस्ट्रीज की मजबूत रफ्तार निफ्टी को 10,350 के पिछले अवरोध को पार करने में मदद कर सकती है। एक विश्लेषक ने कहा, अगर एचडीएफसी और एचडीएफसी बैंक व आरआईएल की तेजी बनी रहती है तो बाजार तकनीकी अवरोध को पीछे छोड़ सकता है और अन्य शेयरों को आगे बढऩे के लिए सहारा दे सकता है। उच्च उतारचढ़ाव के बावजूद बेंचमार्क निफ्टी पिछले हफ्ते 2.7 फीसदी चढ़ा और इस तरह से मिडकैप सूचकांकों से उसका प्रदर्शन बेहतर रहा।


बॉन्डों की बिक्री के मामले में मिडकैप फर्मों की रफ्तार होगी धीमी

रेटिंग एजेंंसियों को लग रहा है कि मध्यम आकार वाली कंपनियों की तरफ से नए बॉन्ड की रफ्तार घट सकती है और ये कंपनियां महामारी व आर्थिक अनिश्चितता की पृष्ठभूमि में अपने पूंजीगत खर्च में देर कर सकती हैं। एक रेटिंग एजेंसी के वरिष्ठ विश्लेषक ने कहा, उस सीमा तक हम रेटिंग से संबंधित राजस्व के स्रोत पर कुछ असर देख सकते हैं। हालांकि बड़े आकार की फर्मों का रेटिंग एजेंसियों के साथ मोटे तौर पर गठजोड़ होता है। अप्रैल में वैसी ऋण प्रतिभूतियों की वैल्यू 5.14 लाख करोड़ रुपये रही, जहां रेटिंग या तो वापस ले लिया गया था या फिर उसे निलंबित किया गया था, जो मार्च के 2.12 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले दोगुने से ज्यादा है। विशेषज्ञों ने कहा कि इसकी आंशिक वजह यह हो सकती है कि छोटे आकार की फर्में बॉन्ड जारी करने के अपने कार्यक्रम पर विराम लगा रही हैं और रेटिंग की वापसी का अनुरोध कर रही हैं। जश कृपलानी


ओएफएस की खुदरा मांग में रही सुस्ती

एचडीएफसी ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी और एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस का ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) खुदरा श्रेणी में पूरा आवेदन पाने में नाकाम रहा जबकि संस्थागत निवेशकों की मांग मजबूत बनी रही। 2 लाख रुपये तक निवेश करने वाले खुदरा निवेश माने जाते हैं और ऐसे निवेशकों ने पूरे शेयरोंं के लिए बोली नहीं लगाई जबकि आर्बिट्रेज का फायदा सामने था। एचडीएफसी एएमसी और एसबीआई लाइफ की द्वितीयक बाजार में कीमत, ओएफएस के लिए तय आधार कीमत से ज्यादा थी। एक खुदरा ब्रोकरेज के अधिकारी ने कहा, खुदरा निवेशकों के बीच इस जानकारी का अभाव है कि ओएफएस में कैसे आवेदन किया जाता है और हमें किस कीमत पर बोली लगानी चाहिए। नियामक को प्रक्रिया आसान बनानी चाहिए। समी मोडक



Keyword: Share Market, Share, Stocks, Equity, शेयर, सेंसेक्स, इक्विटी बाजार, लार्जकैप शेयर,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या जियो-गूगल के साथ आने से देश में तकनीक का होगा तेज विकास?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.