बिजनेस स्टैंडर्ड - बैंकों का होगा 'कोविड टेस्ट'
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बैंकों का होगा 'कोविड टेस्ट'

रघु मोहन / मुंबई June 21, 2020

कोविड-19 महामारी के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंकों को भी अपनी सेहत का ध्यान रखने के लिए कहा है। आरबीआई ने बैंकों को इस बात की पड़ताल करने के लिए कहा है कि कोविड-19 से पैदा हुए हालात का उनके बहीखातों पर कितना असर हुआ है। आरबीआई ने उन्हें जरूरत पडऩे पर निदेशक मंडल की अनुमति के साथ रकम जुटाने की योजना तैयार रखने के लिए कहा है। बैंकों के बहीखातों की हालत टटोलने के लिए नियामक स्तर पर उठाया गया यह पहला कदम है। इस कदम का उद्देश्य महामारी के बाद पनपे हालात के बीच बैंकों को वित्तीय तौर पर तंदुरुस्त रखना है।

आरबीआई ने बैंकों के मुख्य कार्याधिकारियों को 19 जून को भेजे एक पत्र में कहा कि बहीखाते की जांच में तीन परिस्थितियों - शुरुआती दबाव, मध्यम दबाव और अत्यंत दबाव- पर विचार किया जाएगा। पत्र के अनुसार इनमें बहीखाते की गुणवत्ता से जुड़े सभी मानक शामिल होंगे। स्थिति का जायजा लेने के बाद किसी तरह की पूंजी की आवश्यकता महसूस होती है तो बैंकों को रकम जुटाने के लिए अपने निदेशक मंडलों की मंजूरी के साथ तैयार रहना चाहिए।

एक सूत्र ने कहा कि वैसे तो कोविड-19 के मद्देनजर एहतियात के तौर पर रकम का प्रावधान करने से जुड़ी बात का पत्र में जिक्र नहीं है, लेकिन इससे इनकार भी नहीं किया जा सकता। इतना ही नहीं, बैंकों द्वारा अधिक रकम जुटाए जाने की जरूरत और केंद्रीय बजट में बैंकों को पूंजी देने के लिए तय रकम पर तत्काल विचार भी किया जा सकता है।

केंद्रीय बैंकों ने बैंकों के लिए बहीखाते के आकलन की कोई समयसीमा तय नहीं की है मगर वरिष्ठ बैंक अधिकारियों ने कहा कि कुछ बैंकों ने इस विषय पर सोचना शुरू कर दिया था और सितंबर तक इस कवायद में और तेजी लाई जाएगी। सितंबर अंत में कर्ज भुगतान से राहत की अवधि समाप्त हो जाएगी और बहीखातों की स्थिति बैंकों के सामने साफ हो जाएगी। वित्तीय स्थायित्व रिपोर्ट (एफएसआर - दिसंबर 2019) में कहा गया था कि बैंकिंग क्षेत्र में स्थायित्व आने के संकेत मिलने लगे हैं, लेकिन सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रदर्शन में सुधार की जरूरत है और परिचालन से जुड़े किसी जोखिम से निपटने के लिए पर्याप्त पूंजी होनी चाहिए। आरबीआई की हालिया पहल को एफएसआर-दिसंबर 2019 से जोड़कर देखा जा सकता है।

एफएसआर-दिसंबर 2019 में बहीखाते की जांच में ऐसे संकेत मिले थे कि आर्थिक हालात में बदलाव, फंसे कर्ज में थोड़ी बढ़ोतरी आदि के कारण शुरुआत में सभी बैंकों की गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (जीएनपीए) का अनुपात सितंबर 2019 के 9.3 प्रतिशत के मुकाबले सितंबर 2020 में 9.9 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। अत्यधिक दबाव की स्थिति में जीएनपीए बढ़कर 10.5 प्रतिशत हो जाएगा और 52 बैंकों के लिए तो यह 9.4 प्रतिशत से बढ़कर 15.6 प्रतिशत तक हो जाएगा।

53 बैंकों का पूंजी पर्याप्तता अनुपात शुरुआती दबाव में कम होकर सितंबर 2020 तक 14.1 प्रतिशत रहने और अत्यधिक दबाव की स्थिति में 12.7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था। आरबीआई ने यह भी पाया था कि पूंजी नहीं डालने पर 3 बैंकों का पूंजी पर्याप्तता अनुपात सितंबर 2020 तक न्यूनतम 9 प्रतिशत से नीचे आ सकता है।

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