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गांवों में रोजगार के लिए चाहिए और धन

संजीव मुखर्जी / नई दिल्ली June 19, 2020

सरकार पीएम गरीब कल्याण रोजगार अभियान के माध्यम से अपने घर लौटे 1 करोड़ श्रमिकों में से 67 लाख श्रमिकों को रोजगार मुहैया कराने की तैयारी कर रही है। इसके बारे में विशेषज्ञ कहते हैं कि अतिरिक्त फंड का आवंटन किए बिना यह देखना होगा कि कितने नए रोजगार सृजित हो पाते हैं। शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिहार से इस योजना की औपचारिक शुरुआत करेंगे।

इसके अलावा, कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि अगले 125 दिनों या चार महीने से थोड़े अधिक दिनों में विभिन्न कार्यक्रमों के तहत 50,000 करोड़ रुपये समय से पहले ही खर्च करने की जो चर्चा की जा रही है, उसे मौजूदा नियमों के तहत किसी न किसी रूप में खर्च किया ही जाना था।  

इसका कारण यह है कि मौजूदा नियमों के मुताबिक मंत्रालयों को किसी भी वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में आवंटित बजट के 33 फीसदी से अधिक और वित्त वर्ष के अंतिम महीने में 15 फीसदी से अधिक खर्च करने की अनुमति नहीं है।  

मौजूदा नियमों के तहत आवास और ग्रामीण सड़क जैसी जिन 25 ग्रामीण केंद्रित रोजगार सृजन योजनाओं को मिलाकर सरकार 50,000 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बना रही है उसमें से कम से कम 33,500 करोड़ रुपये उसे दिसंबर तक खर्च करने थे। लेकिन अब समय से पहले पूरी रकम खर्च करने की योजना के तहत यदि इसकी शुरुआत जुलाई से हो जाती है तो इसे अक्टूबर या नवंबर के आरंभ तक खर्च कर दिया जाएगा। 

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर हिमांशु ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, 'मुझे नहीं पता कि समय से पहले व्यय करने वाली इसमें कौन सी बात है जबकि सामान्य स्थिति में इस रकम के बड़े हिस्से को जनवरी से पहले खर्च किया जाना था। लेकिन, हां यदि उसका कुछ भाग वे समय से पहले खर्च करते हैं तो यह कोई खराब बात नहीं है क्योंकि इससे लोगों के हाथ में पैसा आएगा।' 

उन्होंने कहा कि यह बहुत स्पष्ट नहीं है कि कितने राज्य इस योजना में हिस्सा लेने को इच्छुक हैं क्योंकि इनमें से कई योजनाओं जैसे कि आवास और सड़क में राज्यों की हिस्सेदारी बहुत अधिक है।

गरीब कल्याण रोजगार अभियान को केंद्र सरकार की मौजूदा 25 योजनाओं को मिलाकर एक वृहत योजना के तौर पर तैयार किया गया है जिसके माध्यम से 116 जिलों में वापस लौटे श्रमिकों में से करीब एक तिहाई को 125 दिनों का सार्थक रोजगार मुहैया कराया जाएगा। इन श्रमिकों में से अधिकांश कोविड-19 के कारण लगाए गए लॉकडाउन के कारण लौटे हैं। 

इस योजना में ग्रामीण सड़क कार्यक्रम, ग्रामीण आवासीय कार्यक्रम, आंगनवाड़ी केंद्रों के निर्माण के लिए कार्यक्रमों, सामुदायिक शौचालय के निर्माण, रेलवे के कार्य, रुर्बन मिशन, खेती के लिए तालाब, जानवरों के लिए शेड, बकरी के लिए शेड के निर्माण आदि कार्यक्रमों को शामिल किया गया है।

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