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अमेरिका में असमानता एवं अलगाव की वजह

पार्थसारथि शोम /  June 19, 2020

मशहूर अमनपसंद उपदेशक और मार्टिन लूथर किंग के करीबी सहयोगी जोसेफ लूव्रे ने दो माह पहले अपने निधन के वक्त कल्पना भी नहीं की होगी कि किंग का 'समता' का सपना इतनी जल्दी दम तोड़ देगा। हां, ओबामा, व्हाइट हाउस के उत्तर में 16वीं स्ट्रीट में रहने वाले पेशेवरों, अटलांटा के उच्च वर्ग या फिर उस दास परिवार के रूप में अश्वेतों की सफलता की कहानियां भी मौजूद हैं जिसका पितृत्व सन 1776 में अमेरिकी आजादी का घोषणा लिखने वाले थॉमस जेफरसन पर साबित हुआ और उसे मान्यता दी गई। जेफरसन ने अश्वेतों के शरीर को लेकर अपमानजनक टिप्पणियां की थीं लेकिन इसके बावजूद उनका अपनी अश्वेत दासी सैली हेमिंग्स के साथ रिश्ता था और उसने उनकी कई संतानों को जन्म दिया। उन सभी को आज जेफरसन के विस्तारित परिवार का हिस्सा माना जाता है। परंतु अमेरिका में अश्वेतों के सामाजिक दर्जे में गिरावट की प्रक्रिया सदियों से जारी है।

सन 1861-65 के बीच गृह युद्ध के बाद के और दास प्रथा के समापन के बाद अश्वेतों ने उद्यमिता और कृषि कौशल के साथ अपनी स्थिति बेहतर की। हालांकि जल्दी ही दक्षिणी रिचमंड-अटलांटा इलाके में अश्वेतों के स्वामित्व वाले बैंक बंद होने लगे। सामाजिक आर्थिक कार्यक्रमों से अश्वेतों को बाहर किया जाने लगा। बाल्टीमोर तथा पूर्वी इलाकों में अश्वेतों को ऋण नहीं मिलता था। अल्बामा और लुइजियाना जैसी जगहों पर नस्ली भेदभाव स्पष्ट था। अश्वेतों को भीड़ द्वारा मारे जाने और जिंदा जलाए जाने की घटनाएं लगातार घट रही थीं।

इससे स्पष्ट होता है कि कैसे पिछली डेढ़ सदी में आय और संपत्ति के स्तर पर भारी असमानता पैदा हुई। बीते 50 वर्ष में हालत और खराब हुई और कोविड-19 महामारी ने तो इसे पूरी तरह उजागर कर दिया। गुस्सा उबल रहा था और जॉर्ज फ्लॉयड के साथ पुलिसिया ज्यादती ने उत्प्रेरक का काम किया।

मैं सर्वेक्षण और आंकड़ों के लिए प्रसिद्ध प्यू रिसर्च सेंटर का सहारा लेते हुए पहले असमानता और फिर नस्लीय भेदभाव की बात करूंगा। मध्य आय वर्ग वाले परिवारों की बात करें तो तीन लोगों के परिवार के लिए इसका दायरा 40,100 डॉलर से 120,400 डॉलर तक है। इससे ऊपर और नीचे की आय वाले लोग क्रमश: उच्च और निम्र आय वर्ग के दायरे में आते हैं। इसका मध्य बिंदु उसे माना जा सकता है जहां सर्वाधिक परिवार हैं। बीते 50 वर्षों के दौरान विभिन्न समूहों के बीच असमान आय वृद्धि देखने को मिली। शीर्ष 5 प्रतिशत लोगों की आय सबसे तेज गति से बढ़ी। शीर्ष पर अश्वेतों की मौजूदगी दुर्लभ है जबकि निचले सिरे पर उनकी भरमार है। सन 2018 में फॉच्र्यून 500 की 1.45 करोड़ डॉलर से अधिक आय वाले सीईओ की सूची में केवल चार अश्वेत थे। यदि कोई अश्वेत व्यक्ति सालाना 60,000 डॉलर कमाता है तो ही वह अपने वर्ग के शीर्ष 10 प्रतिशत में आ सकता है। श्वेतों के लिए यह राशि 118,000 डॉलर तथा एशियाइयों के लिए 135,000 डॉलर है। इससे पता चलता है कि श्वेतों का शीर्ष 10 फीसदी अश्वेतों के शीर्ष 10 फीसदी से दोगुना कमाता है।

संपत्ति के मामले में भी बात काफी हद तक ऐसी ही है। बीते तीन दशक में नस्लीय आधार पर संपत्ति विभाजन बढ़ा है। एक अश्वेत परिवार की औसत संपत्ति सन 1983 में जहां 7,323 डॉलर थी वहीं 2016 में वह घटकर 3,557 डॉलर रह गई। श्वेत परिवारों में यह आंकड़ा 110,160 डॉलर से बढ़कर 146,984 डॉलर हो गया यानी अश्वेतों से 41 गुना अधिक। सन 2010 से 2019 के बीच अश्वेतों की बेरोजगारी दर श्वेतों के मुकाबले दोगुनी रही।

सवाल यह है कि क्या हालात बदल सकते हैं? प्यू के सितंबर 2019 में 6,878 वयस्कों पर किए गए सर्वे में 60 फीसदी अमेरिकियों ने माना कि बहुत अधिक असमानता है। परंतु 80 फीसदी डेमोक्रेट की तुलना में केवल 40 फीसदी रिपब्लिकन ने ऐसा माना। रिपब्लिकन को लगता है कि इसके लिए निजी वजहें अधिक जवाबदेह हैं जबकि डेमोक्रेट नस्ल भेद, अवसरों में असमानता, शिक्षा और कर व्यवस्था तथा कॉर्पोरेट नियमन को जवाबदेह मानते हैं। कुल मिलाकर दोनों के रुख में काफी अंतर है।

इसके अलावा कौशल हासिल करना, सबसे अमीरों पर कर लगाना और गरीबों को हस्तांतरण करना, कॉलेज शिक्षण शुल्क और कॉलेज कर समाप्त करना, चिकित्सा सुविधा बढ़ाना, न्यूनतम वेतन बढ़ाना और बड़े निगमों को भंग करने जैसे कदमों को रिपब्लिकन उतना महत्त्व नहीं देते जितना डेमोक्रेट देते हैं। बल्कि रिपब्लिकन के लिए अवैध आप्रवासन की समस्या कहीं अधिक खतरनाक है।

जब महामारी का आगमन हुआ तो हालात और विकट हो गए। प्रति एक लाख आबादी में 53 अफ्रीकी-अमेरिकी मारे गए। जबकि 25 हिस्पैनिक, 22 एशियाई और 20 श्वेतों की मृत्यु हुई। अश्वेतों की दोगुनी से अधिक की मृत्यु दर बताती है कि स्वास्थ्यगत जोखिमों के अलावा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, किराना दुकानों आदि में कम वेतन पर वे काम करते रहे इसके बावजूद अश्वेतों में बेरोजगारी दर अधिक थी।

सन 1972 से 2004 तक अमेरिका में रहने और 40 प्रांतों में समय बिताने तथा तमाम उतार-चढ़ाव और सामुदायिक आंदोलन देखने के बाद मेरा मानना है कि अमेरिका का नस्लीय पूर्वग्रह उसकी बुनियाद में निहित है।

इनसाइक्लोपीडिया ब्रिटानिका के मुताबिक जेफरसन ने कहा था कि सभी मनुष्य आजाद पैदा होते हैं और दासों को अफ्रीका या कैरेबियन द्वीप भेज दिया जाना चाहिए। लेकिन उन्हें इतने बड़े पैमाने पर लोगों को भेजना आर्थिक रूप से अव्यावहारिक लगता था इसलिए उनकी नजर में दास प्रथा का अंत अपरिहार्य था। जब उनका निधन हुआ तब उन्होंने अपने सैकड़ों दासों में से सात को आजाद किया।

क्या भारतीय इससे अलग हैं? मैं याद करता हूं कि कैसे मुझसे मिलने आने वाले भारतीय केवल दिन में आते थे क्योंकि उन्हें मैरीलैंड या वजीर्निया से शाम ढले वॉशिंगटन डीसी आने में डर लगता था। वे मेरी रहने की जगह को लेकर चिंतित रहते थे। भारत में रहने वाले अफ्रीकी नागरिकों के साथ का व्यवहार भी हम सभी जानते हैं। अनुपमा राव की पुस्तक द कास्ट क्वेश्चन- दलित ऐंड पॉलिटिक्स  पढि़ए, हमारे देश में आज भी अंतरजातीय विवाह करने पर हत्या हो सकती है। अमेरिका में भी अलग-अलग नस्लों के बीच रिश्तों को सामाजिक मंजूरी नहीं है।

अच्छी बात यह है कि मौजूदा विरोध प्रदर्शनों ने दुनिया भर का ध्यान खींचा है। क्या अमेरिकी कांग्रेस की स्पीकर नैंसी पेलोसी का ढांचागत बदलाव घटित होगा? जिस समय मैं यह लेख लिख रहा था उस वक्त अमेरिकी राष्ट्रपति के पूर्व रक्षा मंत्री और पूर्व सेना प्रमुख तथा माइक रूमनी जैसे रिपब्लिकन सीनेटरों ने सरकारी कदमों की निंदा की और एक सेवारत चार सितारा सैन्य अधिकारी ने माफी मांगी। इतना ही नहीं रक्षा मंत्री ने भी राष्ट्रपति से असहमति प्रकट की।

Keyword: American Society, Black People, Unemployment, अमेरिकी समाज, शिक्षण शुल्क, सामुदायिक आंदोलन,
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