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'चीन के ऐप का बहिष्कार' तेज

पीरजादा अबरार और नेहा अलावधी /  06 19, 2020

भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव से चीन के ऐप समेत सभी उत्पादों के बहिष्कार के अभियान ने जोर पकड़ लिया है। इनमें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग ऐप जूम, शॉर्ट वीडियो ऐप टिकटॉक, यूसी ब्राउजर, फाइल शेयरिंग ऐप शेयरइट और बैटल गेमिंग ऐप पबजी जैसे कई लोकप्रिय प्लेटफॉर्म भी शामिल हैं। यहां तक कि 'रीमूव चाइनीज ऐप' जैसे ऐप भी आ गए हैं, जो चीन के ऐप की पहचान करने और अनइन्सटॉल करने में मदद दे रहे हैं। इस बहिष्कार अभियान के अलावा भारतीय खुफिया एजेंसियों ने भी 50 से अधिक चीन से संबंधित ऐप को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया है। इस बात की चिंताएं जताई जा रही हैं कि ये ऐप सुरक्षित नहीं थे, इसलिए बड़ी तादाद में डेटा भारत से बाहर ले गए हैं।

विशेषज्ञों ने कहा कि सरकार चीन के ऐप या घरेलू या अन्य बाजारों के उन ऐप पर रोक लगा सकती है, जिन्हें वह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा मानती है। विदेश नीति विशेषज्ञ समूह गेटवे हाउस के निदेशक ब्लैज फर्नांडिस ने कहा, 'अगर वे (ऐप्स) ऐसी गलत सूचना या प्रोपेगेंडा फैलाकर ऐसी सांप्रदायिक हिंसा भड़का रहे हैं या डर पैदा कर रहे हैं, जिससे सीमावर्ती राज्यों में बगावत को बढ़ावा मिल सकता है तो सरकार को आईटी ऐक्ट की धारा 69ए का लगाने का अधिकार है।'

विशेषज्ञों और उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक भारत में 40 करोड़ से अधिक स्मार्टफोन हैं, इसलिए ऐप्स को जोडऩे या हटाने की किसी गतिविधि का इन प्लेटफॉर्मों के वैश्विक मूल्यांकन पर असर पड़ता है। यह घटनाक्रम इसलिए अहम है क्योंकि देश पिछले कुुछ वर्षों के दौरान विश्व का सबसे तेजी से बढ़ता मोबाइल ऐप्लीकेशन बाजार बन गया है, जहां 1.3 अरब संभावित ग्राहक हैं।

फर्नांडिस ने कहा, 'विभिन्न स्थानीय संगठनों ने चीन के ऐप को डिलीट करने का आह्वान किया है, इसलिए निश्चित रूप से असर पड़ेगा।' उन्होंने कहा, 'उनमें सभी आखिरकार आईपीओ (आरंभिक सार्वजनिक निर्गम) लेकर आएंगे, इसलिए उन पर आर्थिक असर भी पड़ेगा।' पेशेवर सेवा कंपनी डीवीएस एडवाइजर्स एलएलपी के संस्थापक और प्रबंध साझेदार दिवाकर विजयसारथी ने कहा कि चीन के उत्पादों के बहिष्कार का आह्वान इस सोच के साथ किया जा रहा है कि 'दुखती रग पर चोट करो'।

विजयसारथी ने कहा, 'चीन का भारत के साथ व्यापार अधिशेष 60 अरब डॉलर से अधिक है और यह अभियान सफल रहा तो चीन के उत्पादों के बहिष्कार का बड़ा असर पड़ेगा।'

लेकिन विशेषज्ञों ने कहा कि यह समझना भी जरूरी है कि चीन के 100 फीसदी उत्पादों का बहिष्कार करना व्यावहारिक नहीं है। नई दिल्ली की स्पेशलिस्ट टेक्नोलॉजी लॉ फर्म टेकलेजिस एडवोकेट्स ऐंड सॉलिसिटर्स में प्रबंध साझेदार सलमान वारिस के मुताबिक इस बहिष्कार से भारत में इन ऐप के उपयोगकर्ताओं की संख्या पर कुछ समय के लिए ही असर पड़ेगा। वारिस ने कहा, 'हालांकि यह उम्मीद करना नासमझी होगी कि इसका भूराजनीतिक नजरिये से कोई असर होगा।' उन्होंने कहा, 'कंपनियां और देश अल्पावधि की रणनीति नहीं अपनाते हैं।'

यही वजह है कि भारत के तकनीक स्टार्टअप क्षेत्र में चीन ने पिछले पांच साल के दौरान 8 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है। भारत उन देशों में से एक है, जहां चीन का सबसे अधिक निवेश आ रहा है। वारिस ने कहा, 'भारतीय अर्थव्यवस्था में चीन के डिजिटल एवं मोबाइल दबदबे की गहरी पैठ है।' भारत और चीन के बीच भूराजनीतिक मुद्दों के बावजूद दोनों के बीच 87 अरब डॉलर का भारी-भरकम कारोबार होता है। चीन के शॉर्ट वीडियो ऐप टिकटॉकक ने अक्टूबर-दिसंबर 2019 तिमाही में करीब 25 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है। इसने सितंबर 2020 तक भारत में अपना राजस्व 100 करोड़ रुपये करने का लक्ष्य तय किया है। सॉफ्टवेयर फ्रीडम लॉ सेंटर, इंडिया (एसएफएलसी) में विधि निदेशक प्रशांत सुुगथान का मानना है कि चीन के ऐप और उत्पादों का बहिष्कार इस समय चीन के खिलाफ माहौल होने की तात्कालिक प्रतिक्रिया है। सुगथान ने कहा, 'इन ऐप पर लघु अवधि में कुछ असर पड़ सकता है, लेकिन यदि यूजर इन ऐप को उपयोगी मानते हैं तो वे उन्हें फिर से अपना लेंगे ' उन्होंने कहा, 'चीन की कंपनियों ने भारत में जिस तरह निवेश किया है, उससे देखते हुए यह स्थिति लंबे समय नहीं रहेगी।'

हालांकि सुगथान ने कहा कि अगर ऐप के सर्वर चीन में स्थित हैं और वे वित्तीय सूचनाओं समेत संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा को संभाल रहे हैं तो उन्हें ज्यादा सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी। इंटरनेट डेमोक्रेसी प्रोजेक्ट की वकील और शोधार्थी तृप्ति जैन ने कहा कि जब तक देश में व्यक्तिग डेटा सुरक्षा की व्यापक रूपरेखा तैयार नहीं होगी, तब तक निजता के मौलिक अधिकार और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों पर जोखिम बने रहेंगे। जैन ने कहा, 'सोशल मीडिया ऐप और ऑनलाइन ऐप्लीकेशन सर्विलांस कैपिटलिज्म के मॉडल पर बनी हैं और डेटा सुरक्षा के कानूनों के अभाव में निजता के उल्लंघन और राष्ट्रीय सुरक्षा की चिंता बनी रहेंगी।'



97 प्रतिशत भारतीय नहीं खरीदेंगे चीनी सामान

चीन के खिलाफ बुलंद होती आवाज के बीच चीन से आयात के संबंध में एक हालिया सर्वेक्षण से पता चलता है कि काफी बड़ी संख्या में भारतीय इस पड़ोसी देश के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई चाहते हैं। लोकलसर्कल द्वारा 235 जिलों में 32,000 से अधिक भारतीयों पर किए गए सर्वेक्षण से जानकारी मिलती है कि भारतीय एक साल के लिए चीन की कंपनियों का देश से बहिष्कार करते हुए चीन की अर्थव्यवस्था को झटका देने की योजना बना रहे हैं। चीन से आने वाली सभी वस्तुओं और सेवाओं पर भारतीय न केवल 200 प्रतिशत का आयात शुल्क चाहते हैं, बल्कि वे भारत के विनियामकों द्वारा चीन के उत्पादों की अनिवार्य लेबलिंग भी चाहते हैं ताकि वे उनके मूल स्थान के आधार पर उन्हें अलग कर सकें। अलबत्ता कई भारतीय विनिर्माताओं ने यह स्वीकार किया कि चीनी विनिर्माण दक्षता भारत से काफी आगे है और इसलिए आयात शुल्क केवल तैयार माल तक ही सीमित रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे भारत को चीन के साथ अपना 3.71 लाख करोड़ रुपये का व्यापार घाटा (वर्ष 2019-20 में) कम करने में मदद मिलेगी। बीएस


भारत का कोई सैनिक हिरासत में नहीं : चीन

चीन ने गलवान घाटी में 15 जून की हिंसक झड़प के बाद कुछ भारतीय बलों को बंधक बनाकर रखे जाने की खबरों के बीच शुक्रवार को कहा कि वर्तमान में कोई भारतीय सैनिक उसकी हिरासत में नहीं है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान के इस बयान से एक दिन पहले भारतीय सेना ने कहा था कि पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी बलों के साथ जिन भारतीय जवानों की झड़प हुई थी, उनमें से कोई लापता नहीं है। झाओ ने कहा, 'जहां तक मेरी जानकारी है, इस समय कोई भारतीय सैनिक चीन की हिरासत में नहीं है।' यह पूछे जाने पर कि क्या भारत ने किसी चीनी जवान को हिरासत में लिया है, उन्होंने कहा, 'चीन और भारत राजनयिक एवं सैन्य माध्यमों से मामले को सुलझाने के लिए संवाद कर रहे हैं। इस समय मेरे पास आपको देने के लिए कोई जानकारी नहीं है।' झाओ ने कहा, 'मैं गलवान घाटी में गंभीर स्थिति के बारे में दोहराना चाहूंगा कि सही और गलत बहुत स्पष्ट है और जिम्मेदारी पूरी तरह भारतीय पक्ष की बनती है।' घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले लोगों ने कहा कि चीनी सेना ने तीन दिन तक वार्ता के बाद दो मेजर समेत 10 भारतीय सैनिकों को गुरुवार शाम को रिहा किया। भाषा

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