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आरआईएल ने समय से पहले उतार दिया कर्ज

अनीश फड़णीश और अमृता पिल्लै / मुंबई June 19, 2020

रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) अब पूरी तरह कर्ज मुक्त कंपनी बन गई है। कंपनी के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने शुक्रवार को इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा कि अगली कुछ तिमाहियों में समूह अपने उपभोक्ता एवं खुदरा कारोबार में नए निवेशकों को लेकर आएगी। आरआईएल ने मार्च 2021 तक कर्ज मुक्त होने का लक्ष्य रखा था, लेकिन कंपनी ने काफी पहले ही यह कारनामा कर दिखाया।

मार्च 2020 तक रिलायंस पर 1.61 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध कर्ज था। कंपनी ने हाल में ही जियो में 24.7 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचकर और अपने राइट इश्यू के जरिये 1.68 लाख करोड़ रु पये जुटाए हैं। आरआईएल ने इस रकम का इस्तेमाल अपने ऊपर कर्ज उतारने के लिए किया है। पिछले दो महीने के दौरान कंपनी की डिजिटल सेवा इकाई जियो प्लेटफॉम्र्स ने 24.7 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचकर 1.15 लाख करोड़ रुपये जुटाए हैं। जिन कंपनियों ने जियो प्लेटफॉम्र्स में हिस्सेदारी खरीदी हैं, उनमें फेसबुक, निजी इक्विटी कंपनियां और कई सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के सॉवरिन वेल्थ फंड आदि शामिल हैं।

आरआईएल ने राइट इश्यू के जरिये आने वाली 53,124 रुपये रकम भी 1.68 लाख करोड़ रुपये में शामिल की है। कंपनी को चालू वित्त वर्ष में राइट इश्यू से मात्र 25 प्रतिशत (13,281 करोड़ रुपये) रकम ही मिली है और शेष 75 प्रतिशत रकम वित्त वर्ष 2022 में हासिल होगी।

आरआईएल के एक अधिकारी ने बताया कि कंपनी ने जियो प्लेटफॉम्र्स में हिस्सेदारी बेचने के सौदे किए हैं और शेयरधारकों ने राइट इश्यू में हिस्सेदारी खरीदने का वादा किया है। अधिकारी ने कहा कि आवश्यक अनुमति मिलने के बाद और निर्धारित अवधि में रकम का इस्तेमाल होगा।

कंपनी ने कहा कि पेट्रो-खुदरा संयुक्त उद्यम में बीपी को हिस्सेदारी बेचने के अलावा जुटाई जाने वाली कुल रकम 1.75 लाख करोड़ रुपये से अधिक होगी। कंपनी ने कहा कि अगले पांच वर्षों में खुदरा कारोबार और जियो के आईपीओ लाए जाने की योजना है। मार्च 2020 तक कंपनी पर 3.36 लाख करोड़ रुपये का सकल कर्ज और नकदी एवं इसके समतूल्य के रूप में 1.75 लाख करोड़ रुपये रकम थी।

अंबानी ने एक बयान में कहा,'शेयरधारकों और अन्य संबंधित पक्षों को उनकी अपेक्षा से अधिक देना आरआईएल की परंपरा रही है। लिहाजा कर्ज मुक्त बनने के इस मौके पर मैं उन्हें आश्वासन देना चाहता हूं कि रिलायंस अपने स्वर्णिम समय में कारोबार वृद्धि के और महत्त्वकांक्षी लक्ष्य तय करेगी और उन्हें हासिल भी करेगी।'

हालांकि कंपनी ने पिछले दो महीने में जिस तरह रकम जुटाई है उससे नए उद्यम की योजना बनाने और उन्हें पूरा करने का अवसर जरूर दे रही है। इस बारे में एसबीआईकैप सिक्योरिटीज के राजीव शर्मा ने कहा,'निर्धारित अवधि से पहले रिलायंस का कर्ज मुक्त हो जाना एक सकारात्मक संकेत है और इससे मूल्यांकन मौजूदा स्तर पर बनाए रखने में आसानी होगी। 1.68 लाख करोड़ रुपये जुटाने के बाद कंपनी नई कारोबारी श्रेणियों में आराम से दांव खेल सकती है।

नए अवसरों का लाभ उठाने में रिलायंस किसी भी दूसरी देसी कंपनियों के मुकाबले बेहतर स्थिति में है।' आरआईएल ने 2012 और 2018 के बीच बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश किया था। कंपनी ने दूरसंचार और डिजिटल कारोबार में जमकर निवेश किया था और 16 अरब डॉलर रकम पेट्रो रसायन कारोबार में झोंकी थी। पिछले वर्ष अगस्त में अंबानी ने शेयरधारकों से कहा था कि आरआईएल मार्च 2021 से पहले कर्ज मुक्त कंपनी बन जाएगी। उस समय आरआईएल पेट्रो-रसायन कारोबार में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने का प्रस्ताव दिया था, जो कर्ज मुक्त होने की मुहिम के लिहाज से अहम था। हालांकि कोविड-19 महामारी के बाद सऊदी आरामको के साथ इस प्रस्तावित सौदे पर आशंका के बादल मंडराने लगे थे।

अधिक कर्ज का अनुमान

हालांकि कुछ विश्लेषकों का अनुमान है कि आरआईएल का शुद्ध कर्ज मार्च 2020 के 1.61 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े से अधिक है। कोटक इंस्टीट््यूशनल इक्विटीज का अनुमान है कि पूंजीगत खर्च ऋणदाताओं, आस्थगित भुगतान देनदारियों और अन्य वित्तीय देनदारियों समेत प्रभावी शुद्ध प्रभावी कर्ज 2.49 लाख करोड़ रुपये है। इसी तरह आईआईएफएल ने 2.38 लाख करोड़ रुपये का अनुमान जताया है। बन्र्सटीन ने 2.61 लाख करोड़ रुपये और सीएलएसए ने 1.88 लाख करोड़ रुपये का अनुमान जताया है।

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