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सीएलएसए इंडिया के परिचालन पर पड़ा असर

समी मोडक / मुंबई June 17, 2020

सीएलएसए इंडिया इस साल निवेश बैंकिंग लीग में जगह बनाने की तैयारी कर रही है। सूत्रों का कहना है कि पैतृक सिटिक सिक्योरिटीज द्वारा पुनर्गठन पहल के साथ साथ भारत-चीन के बीच संबंधों में आई खटास से कंपनी का परिचालन प्रभावित हुआ है।

चीन सरकार के स्वामित्व वाली सिटिक प्रमुख व्यवसायों पर पूरा नियंत्रण हासिल कर हॉन्गकॉन्ग की इस ब्रोकरेज फर्म पर अपना दबदबा बढ़ाने की संभावना तलाश रही है।

सीएलएसए के एक अधिकारी ने कहा, 'सिटिक सिक्योरिटीज ने अपनी बाजार पहुंच मजबूत बनाने के लिए सीएलएसए के कॉरपोरेट फाइनैंस और पूंजीगत बाजार व्यवसायों को अपने साथ मिलाने का निर्णय लिया है। सीएलएसए के अन्य सभी व्यवसाय सीएलएसए के तौर पर परिचालन बरकरार रखेंगे।'

ब्लूमबर्ग के आंकड़े के अनुसार, इस साल घरेलू तौर पर सभी 32 निर्गमों के जरिये 90,000 करोड़ रुपये मूल्य से ज्यादा के इक्विटी शेयरों की बिक्री हुई। इसमें, सीएलएसए एक भी सौदा करने में सफल नहीं रही। पिछले तीन वर्षों के दौरान, सेबी के साथ पंजीकृत निवेश बैंक सीएलएसए ने हर साल औसत पांच सौदों पर काम किया है। निवेश बैंक ने कभी भी इस लीग के शीर्ष-10 में जगह नहीं बनाई, हालांकि उसने कुछ प्रमुख कंपनियों की शेयर बिक्री पर काम किया है।

सीएलएसए ने भारत में करीब एक दर्जन वरिष्ठ अधिकारियों का पलायन दर्ज किया है। उद्योग के जानकारों का कहना है कि इससे सौदे करने की क्षमता प्रभावित हुई है क्योंकि उसका व्यवसाय काफी हद तक लोगों पर केंद्रित है। वैश्विक तौर पर भी सीएलएसए ने चीन की सबसे बड़ी ब्रोकरेज सिटिक द्वारा शुरू की गई पुनर्गठन पहल के बीच बड़ी तादाद में कर्मियों का पलायन दर्ज किया है।

सीएलएसए 2013 में सिटिक की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक इकाई बन गई थी। 2016 से, सिटिक के अंतरराष्ट्रीय परिचालन को सीएलएसए ब्रांड नाम के तहत संचालित किया जा रहा है। अब चीन के बढ़ते दबदबे के साथ, सिटिक अपनी स्वयं की पहचान बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

बाजार कारोबारियों का कहना है कि भारत में कंपनी की यह रणनीति कारगर साबित नहीं हो सकती है।

एक निवेश बैंकर ने कहा, 'सीमा पर तनाव गहराने की वजह से चीन के प्रति धारणा कमजोर हुई है। इसके अलावा, सरकार और सेबी ने चीन से निवेश के संबंध में सख्त ढांचे पर अमल किया है। इसकी वजह से चीन-केंद्रित निवेश बैंक की वैल्यू घटी है।'

इस साल के शुरू में सरकार ने चीन, हांगकांग और अन्य पड़ोसी देशों से निवेश की जांच सख्त बना दी। सिटिक के अलावा, हैटॉन्ग सिक्योरिटीज भारत में परिचालन कर रही चीन की अन्य प्रमुख ब्रोकरेज है। शांघाई स्थित इस कंपनी ने ऐस्पिरिटो सैंटो के घरेलू व्यवसाय का अधिग्रहण कर भारत में अपनी उपस्थिति बनाई थी।

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