बिजनेस स्टैंडर्ड - थर्मल-सोलर में चीन की फर्मो का वर्चस्व
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थर्मल-सोलर में चीन की फर्मो का वर्चस्व

श्रेया जय / नई दिल्ली June 17, 2020

इस महीने देश के सबसे बड़े सोलर सेल विनिर्माण की निविदा जीतने के बाद अदाणी एंटरप्राइजेज के चेयरमैन गौतम अदाणी ने कथित तौर पर कहा था कि वह अगले 3 से 5 साल में चीन के सौर उत्पादों को बाहर निकाल देंगे। यह काम काफी बड़ा है क्योंंकि अभी चीन के सौर उपकरण विनिर्माताओं का भारत के सौर बिजली परियोजना के बाजार में 78 फीसदी हिस्सेदारी है।

मजबूत आपूर्ति शृंखला और अपेक्षाकृत कम कीमत के कारण चीन करीब दो दशक से भारत के बिजली क्षेत्र को रफ्तार दे रहा है - यानी कोयला आधारित इकाइयों से लेकर अब सौर बिजली उत्पादन वाली इकाइयों तक।

कुछ को छोड़कर निजी स्वामित्व वाली ताप विद्युत इकाइयों की क्षमता करीब 40,000 मेगावॉट है, जो पिछले दशक में तैयार हुआ है और वह भी चीन के उपकरणों पर। सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयां अपनी बिजली उत्पादन इकाइयों के लिए देश में बीएचईएल की तरफ से बॉयलर-टर्बाइन-जेनरेटर (बीटीजी) की आपूर्ति पर आश्रित है। हालांकि अग्रणी निजी कंपनियों मसलन एस्सार पावर, अदाणी पारव, रिलायंस पावर, इंडियाबुल्स, जीएमआर एनर्जी आदि की ताप विद्युत इकाइयों की बीटीजी आपूर्तिकर्ता चीन की कंपनियां हैं। यह जानकारी केंद्रीय बिजली प्राधिकरण के आंकड़ों से मिली।

चीन का सोलर सेल व मॉड््यूल की बढ़त में भारतीय सौर ऊर्जा उत्पादन की बढ़त का अहम योगदान रहा है और इसकी वजह भारतीय सौर आपूर्ति शृंखला का अभाव है। यह कहना है दिल्ली के एक सौर ऊर्जा परियोजना विकसित करने वालों का। भारत में सोलर सेल विनिर्माण क्षमता 3 गीगावॉट है और मॉड््यूल (तैयार उत्पाद) 5 गीगावॉट का है, वहीं देश में सौर बिजली उत्पादन की क्षमता 32 मेगावॉट की है।

एक बिजली उत्पादक ने कहा, देसी उत्पादन क्षमता मेगा सोलर प्रोजेक्ट को आपूर्ति के लिए पर्याप्त नहीं है। दो मसले हैं, पहला है गुणवत्ता और दूसरा लागत। अगर सेल व मॉड््यूल भारत में बनाए जाते हैं तो इसके लिए कलपुर्जे चीन से आएंगे। कीमत के लिहाज से भारतीय उत्पाद चीन के उत्पादों के सामने कहीं नहीं ठहरते।

चीन का सौर आयात 2013-14 में 596 फीसदी उछल गया जब भारत में सौर ऊर्जा परियोजना में निविदा की गतिविधियोंं ने जोर पकड़ा। 2017-18 तक चीन से आयात में बढ़ोतरी दर्ज की गई जबकि 2018 के बाद से इसमेंं नरमी आई। परियोजना देने में सुस्ती और चीन के सौर उत्पादों पर सेफगार्ड ड्यूटी से सौर आयात में 24 फीसदी की गिरावट आई।

विश्लेषकों की रिपोर्ट मेंं कहा गया है कि चीन सोलर फोटोवॉल्टेयिक पैनल की बेंचमार्क कीमतों में 9 फीसदी की कमी की योजना बना रहा है, ऐसे में पैनल की कीमत 35-28 डॉलर प्रति किलोवॉट हो जाएगी। यह वैश्विक स्तर पर सोलर पैनल की सबसे कम कीमत होगी। परियोजना विकसित करने वाले चीन से आयात में बढ़ोतरी की संभावना जता रहे हैं क्योंकि लॉकडाउन में ढील दी गई है और आपूर्ति शृंखला बहाल हुई है।

इसके साथ ही इलेक्ट्रिकल व इलेक्ट्रनिक विनिर्माताओं की शिकायत लंबे समय से है कि चीन की कंपनियां भारत में काफी कम कीमतें रखती हैं और उसके साथ सुरक्षा संबंधी चिंता भी है। इसके बावजूद आयात लगातार बढ़ रहा है। पिछले दशक में चीन के इलेक्ट्रिकल उपकरणों का आयात 19 फीसदी बढ़ा और यह जानकारी इंडियन इलेक्ट्रिकल ऐंड इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन से मिली।

एसोसिएशन के एक अधिकारी ने कहा, भारत और चीन के बीच कीमत का अंतर है। चीन के मुकाबले भारत में इसे लाने की लागत और वित्त काफी ऊंची है। भारत के कीमत संवेदी बाजार को देखते हुए राज्य की यूटिलिटीज व कॉन्ट्रैक्टर चीन के सस्ते माल को प्राथमिकता देते हैं।

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