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कर लायक आमदनी नहीं तो भी भरना होगा रिटर्न

संजय कुमार सिंह /  June 15, 2020

हाल में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने आकलन वर्ष 2020-21 के लिए सात आयकर रिटर्न (आईटीआर) फॉर्म जारी किए हैं। वित्त अधिनियम 2019 में बदलावों की वजह से इस साल के फॉर्मों में कुछ नई चीजें जोड़ी गई हैं। इन फॉर्र्मों में कुछ फेरबदल इसलिए भी किए गए हैं ताकि सरकार द्वारा कोरोनावायरस को मद्देनजर रखते हुए करदाताओं को दी गई रियायतों को समायोजित किया जा सके।

आईटीआर 1 और 4 को जनवरी में जारी किया गया था। उस समय एक प्रतिबंध लगाया गया था। जिन लोगों के पास केवल एक आवास परिसंपत्ति है मगर वह संयुक्त नाम से है तो उन्हें इन दो आसान फॉर्मों के इस्तेमाल की मंजूरी नहीं दी गई थी। मगर अब वह प्रतिबंध हटा लिया गया है। अगर किसी करदाता के पास एक आवास परिसंपत्ति है तो वह इन फॉर्मों का इस्तेमाल कर सकता है, भले ही प्रॉपर्टी संयुक्त नाम से हो।

आम तौर पर बहुत से लोगों को कर रिटर्न इसलिए नहीं भरना पड़ता है क्योंकि उनकी आमदनी कर योग्य सीमा से कम होती है। वित्त अधिनियम 2019 की धारा 139 में यह प्रावधान जोड़ा गया है कि अगर किसी व्यक्ति ने बिजली बिल पर एक लाख रुपये से अधिक, खुद या अन्य किसी व्यक्ति की विदेश यात्रा पर दो लाख रुपये से अधिक या एक या अधिक चालू खातों में एक करोड़ रुपये से अधिक राशि जमा कराई है तो  उसे कर रिटर्न भरना पड़ेगा। टैक्समैन डॉट कॉम के डिप्टी जनरल मैनेजर नवीन वाधवा ने कहा, 'इसका मकसद यह है कि बड़ी राशि के लेनदेन करने वाले लोग कर रिटर्न भरें।' अब इन शर्तों को आईटीआर रिटर्न फॉर्मों में शामिल कर दिया गया है। अरीति कंसल्टेंट्स एलएलपी में पार्टनर रूपाली सिंघानिया ने कहा, 'ऐसे बहुत से लोग, जो पहले कर रिटर्न नहीं भरते थे, उन्हें अब यह देखना चाहिए कि इन मापदंडों से कोई उन पर तो लागू नहीं होता है। अगर ऐसा है तो उन्हें इस साल रिटर्न भरना होगा।'

अगर किसी करदाता की जमाएं या खर्च निर्धारित सीमा को पार करता है तो उसे कर रिटर्न भरते समय 2019-20 के दौरान जमा या खर्च की गई कुल राशि की जानकारी देनी होगी।

क्लियरटैक्स के संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी अर्चित गुप्ता ने कहा, 'करदाता पर घोषणा एवं अनुपालना का बोझ बढ़ेगा। करदाताओं को अपनी आय एवं निवेश के ब्योरे रखने के अलावा निजी एवं विदेश यात्राओं पर खर्च का भी ब्योरा रखना चाहिए। उन्हें अपने कारोबारी लेनदेन के दौरान बैंकों में जमा कराई गई नकदी का भी विवरण रखना चाहिए।'

करदाताओं को पिछले वित्त वर्ष के लिए कटौतियों का लाभ लेने के लिए चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में निवेश करने की मंजूरी दी गई थी। आईटीआर फॉर्मों में एक नया शेड्युल डीआई जोड़ा गया है, जहां करदाता अपने निवेश की जानकारी भर सकते हैं। वाधवा ने इस बात पर जोर दिया कि निवेश के लिए समयसीमा तीन महीने बढ़ाई गई है मगर संबंधित धाराओं के तहत उपलब्ध सीमा में कोई बदलाव नहीं किया गया है। वह कहते हैं, 'उदाहरण के लिए अगर कोई करदाता धारा 80सी के तहत कटौती का दावा कर रहा है तो 1 अप्रैल 2019 से लेकर 31 मार्च 2020 और 1 अप्रैल 2020 से 30 जूून 2020 तक की अतिरिक्त अवधि में निवेश या भुगतान के लिए कटौती की कुल राशि 1.5 लाख रुपये से अधिक नहीं होगी।' करदाताओं को एक ही निवेश पर दो बार कटौती का दावा करने से भी बचना चाहिए। सिंघानिया ने कहा, 'अगर किसी करदाता ने 2020-21 की पहली तिमाही में निवेश किया है और इस पर 2019-20 के लिए कटौती का दावा कर दिया तो उसे इसके लिए 2020-21 में कटौती का दावा नहीं करना चाहिए।'

हालांकि रिटर्न भरने की अंतिम तारीख बढ़ाकर 30 नवंबर कर दी गई है, लेकिन ज्यादा व्यापक विवरण देने की जरूरत को मद्देनजर रखते हुए अंतिम तारीख तक इंतजार न करें। तत्काल विवरण जुटाना शुरू कर दें और ज्यों ही यूटीलिटीज उपलब्ध हों, तत्काल यह काम कर लें। यूटीलिटीज आईटीआर फॉर्म के जावा एवं एक्सेल वर्जन हैं, जिनमें रिटर्न इलेक्ट्रॉनिक रूप से भरे जा सकते हैं। इस समय केवल आईटीआर 1 और 4 के लिए यूटीलिटीज उपलब्ध हैं।

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