बिजनेस स?टैंडर?ड - पुस्तक प्रकाशन कारोबार में भी दिखेंगे नए बदलाव
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पुस्तक प्रकाशन कारोबार में भी दिखेंगे नए बदलाव

पवन लाल /  06 14, 2020

बिजनेस स?टैंडर?ड पुस्तक प्रकाशन कारोबार में भी दिखेंगे नए बदलावपिछले दो महीनों से लगभग शून्य हो चुकी प्रिंट बिक्री के बाद अब छपाई उद्योग ङ्क्षप्रटर, आपूर्तिकर्ता, वेयरहाउस, वितरकों तथा थोक विक्रेताओं के लिए दिशानिर्देशों के साथ परिचालन दोबारा शुरू करने जा रहा है। भले ही अधिकांश बाजारों में लॉकडाउन लगभग समाप्त हो गया हो लेकिन इसके प्रभाव को अभी भी महसूस किया जा सकता है। नई दिल्ली का खान मार्केट स्थित मशहूर फुल सर्किल बुकस्टोर दो दशक तक परिचालन के बाद आखिरकार बंद हो गया। मुंबई में किताबखाना की मालिक अमृता सोमैया कहती हैं, 'यह हमारे लिए मुश्किल समय रहा है क्योंकि हमारे पास ऑनलाइन बिक्री मंच नहीं है और किताबों के अलावा कुछ भी नहीं बेचते।' वर्तमान में वह कुछ घंटों के स्टोर खोलती हैं लेकिन केवल किताबें बाहर से ही खरीदी जा सकती हैं या होम डिलिवरी उपलब्ध है। फिलहाल दुकान में अंदर जाकर किताबें नहीं देखी जा सकतीं।

अधिकांश प्रकाशकों ने ऑनलाइन बिक्री में तेजी देखी है और लॉकडाउन के चलते ऑफलाइन बिक्री शून्य हो गई। हैचेट इंडिया के मुख्य कार्याधिकारी थॉमस अब्राहम कहते हैं, 'यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि इस सेक्टर में वापसी कब होगी। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि उपभोक्ता आने वाले महीनों में किस तरह खर्च करते हैं क्योंकि हम आर्थिक गतिविधियों में तेजी लाने के प्रयास के साथ महामारी को नियंत्रित करने की दोहरी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।' पिछले कुछ महीनों में हैचेट की ऑनलाइन बिक्री में 90 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

हार्परकोलिंस इंडिया के मुख्य कार्याधिकारी अनंत पद्मनाभन बताते हैं कि उनकी ऑनलाइन बिक्री में 100 फीसदी का इजाफा हुआ। वह कहते हैं, 'हम किताबें सीधे ई-बुक के तौर पर प्रकाशित कर रहे हैं।' पूरे उद्योग में, प्रिंट बनाम डिजिटल का अनुपात 95 प्रतिशत और 5 प्रतिशत है। 

दूसरे प्रकाशक भी इसी तरह के बदलाव देख रहे हैं। वेस्टलैंड पब्लिकेशंस के सीईओ गौतम पद्मनाभन कहते हैं, 'लॉकडाउन के बाद मिली राहत में हमने विशेष रूप से बच्चों की किताबों की मांग में वृद्धि देखी है। लॉकडाउन के चरण 1-3 के दौरान, भौतिक पुस्तकों की बिक्री में एक ठहराव आ गया था। लॉकडाउन 4 के दौरान और हालिया चरणबद्ध तरीके से बाजार खोलने के प्रयासों के बाद हमने ऑफलाइन स्टोरों को क्रमिक तौर पर खोलना शुरू किया और रेड जोन में भी आपूर्ति शुरू की।'

हालांकि अधिकांश जून महीने के अंत तक कारोबार दोबारा शुरू करेंगे। पेंगुइन रैंडम हाउस के उपाध्यक्ष (बिक्री एवं उत्पाद) नंदन झा बताते हैं कि वह आमतौर पर एक वर्ष में 200-250 किताबें जारी करते हैं लेकिन अब से दिसंबर तक कुल रिलीज की संख्या 100 कर दी गई है। वह कहते हैं, इन किताबों में काल्पनिक काम से जुड़ी कई किताबें हैं जिसमें अरुंधती रॉय की 'आजादी' शीर्षक के साथ निबंधों का संग्रह तथा रस्किन बॉन्ड की न्यू मेमरीज शामिल हैं।

लॉकडाउन से ठीक पहले लॉन्च हुई किताबों का क्या हुआ? अब्राहम कहते हैं कि जनवरी के आखिरी दिनों से लेकर मार्च की शुरूआत तक लॉन्च की गई किताबों के प्रचार-प्रसार पर गंभीर असर पड़ा। उन्होंने कहा, 'तीन माह की देरी के बाद उनका एक बार फिर प्रचार-प्रसार होना चाहिए।'

क्या डिजिटल प्रिंट का स्थान ले लेगा? झा बताते हैं कि सभी प्रकाशकों के लिए प्रिंट बिक्री काफी अहम है और डिजिटल किताबों की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत से भी कम है। वह कहते हैं, पेंगुइन रैंडम हाउस ऑडिया तथा ई-बुक लॉन्च के साथ मार्केटिंग पर जोर दे रहा है। साथ ही, किताबों की दुकानें किताबें वितरित करने के लिए डंजो, स्विगी और जोमैटो जैसे प्लेटफार्मों के साथ साझेदारी करने पर विचार कर रहे हैं। एक उत्पाद के तौर पर किताबें काफी पुरानी हो चली हैं और अब किताबों के लिए ऑनलाइन ब्राउजिंग अनुभव उपलब्ध है। शॉपर्स स्टॉप में मुख्य विपणन एवं ग्राहक अधिकारी उमा तलरेजा कहती हैं, भविष्य में प्रकाशकों को डिजिटल मार्केटिंग के बारे में सोचना होगा, जिस तरह नेटफ्लिक्स पर किसी फिल्म या शो की मार्केटिंग की जाए। साथ ही, नए फॉर्मेट में ऑडियो पुस्तकें, पॉडकास्ट आदि भी शामिल किए जाएं। मुंबई इंटरनैशनल लिटरेचर फैस्टिवल के संस्थापक एवं निदेशक अनिल धाकड़ को उम्मीद है कि साल के अंत तक उद्योग में तेजी आएगी।

 

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