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क्षेत्रीय फिल्मों से ओटीटी के दर्शक बढ़े

टी ई नरसिम्हन /  June 14, 2020

इस वक्त जब लोग कोरोनावायरस महामारी की वजह से घर में ज्यादातर वक्त गुजार रहे हैं, ऐसे में ज्यादातर लोगों ने टेलीविजन स्क्रीन पर गुजराती कॉमेडी, तेलुगू की प्रेम कहानी, बांग्ला क्राइम थ्रिलर और सभी भाषाओं में हॉरर कहानियों को देखना पसंद किया है। स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म के मुताबिक ज्यादातर लोगों ने भाषाई शो (गैर हिंदी और गैर-अंग्रेजी) को देखना पसंद किया। वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि डेटा और डिजिटाइजेशन की लागत से अधिक सामग्री के बलबूते देश में एमेजॉन प्राइम, ज़ी5, हॉटस्टार और नेटफ्लिक्स जैसे सबस्क्रिप्शन आधारित वीडियो-ऑन-डिमांड विकल्पों में तेजी दिख सकती है।

वक्त की नजाकत को देखते हुए डिजिटल तरीके से मनोरंजन के साधन मुहैया कराने वाले मंचों ने दर्शकों का उत्साह बढ़ाने के लिए अपनी कोशिशें तेज कर दी हैं। देश में ओटीटी मंचों द्वारा टेलीविजन पर दी गई विज्ञापन अवधि (मात्रा) में कैलेंडर वर्ष की पहली तिमाही में सालाना 31 प्रतिशत की वृद्धि हुई। विज्ञापनदाता भी उन पर ज्यादा ध्यान भी दे रहे हैं और टैम के एडेक्स डेटा के अनुसार ओटीटी के सक्रिय विज्ञापनदाताओं की संख्या में 45 फीसदी की वृद्धि हुई जो 2019 की पहली तिमाही के 24 से बढ़कर 2020 की पहली तिमाही में यह तादाद 35 हो गई।

टैम ने कहा, 'ओटीटी मंचों पर विज्ञापन में अप्रैल 2020 से काफी तेजी देखी गई है। मार्च 2020 में जब महामारी का प्रसार ज्यादा नहीं था उसके मुकाबले अप्रैल 2020 में कई मंचों पर विज्ञापन श्रेणियों और ब्रांडों की तादाद में गिरावट आई।'

भाषाई मनोरंजन विकल्पों की वजह से स्थानीय विज्ञापनदाताओं का आकर्षण इसमें बढ़ा क्योंकि इस तरह के मंचों की वजह से उनकी पहुंच व्यापक हो जाती है। कोविड-19 के दौर से पहले की तुलना में इस अवधि के दौरान स्थानीय भाषा सामग्री में बढ़ोतरी की वजह से इन मंचों पर क्षेत्रीय कंपनियों के विज्ञापनों में चार गुना वृद्धि हुई। राष्ट्रीय ब्रांडों के विज्ञापन में भी तेजी आई लेकिन अब पूरा खेल स्थानीय और अति स्थानीय ब्रांडों की दुनिया में खेला जा रहा है जो मंचों के मुताबिक एक बड़ी पारी की ओर इशारा करता है।

राष्ट्रीय स्तर के ब्रांडों के बीच हिंदुस्तान यूनिलीवर ओटीटी पर सबसे बड़ा विज्ञापनदाता था और क्षेत्रीय खिलाडिय़ों की सूची (अप्रैल 2020) में सिंबियॉसिस सोसाइटी सबसे ऊपर थी। दिलचस्प बात यह है कि राष्ट्रीय स्तर के खिलाडिय़ों के बीच खाद्य एवं पेय पदार्थ क्षेत्र के विज्ञापनों का 40 प्रतिशत से अधिक का योगदान रहा जबकि क्षेत्रीय खिलाडिय़ों में शिक्षा क्षेत्र का योगदान 95 प्रतिशत से अधिक  रहा। सिंबायोसिस सोसाइटी के अलावा श्री विलेपारले केलावाणी मंडल, सत्यभामा विश्वविद्यालय, चाइनीज यूनिवर्सिटी ऑफ हॉन्गकॉन्ग और एकेडमी ऑफ फैशन ऐंड डिजाइन स्थानीय ब्रांडों के बीच शीर्ष विज्ञापनदाता के तौर पर मौजूद थे। टैम एक्सिस की वरिष्ठ उपाध्यक्ष विनीता शाह ने कहा कि ओटीटी मंचों पर विज्ञापन देने की दर  अप्रैल 2020 में पिछले महीने (मार्च) की तुलना में दोगुनी और फरवरी 2020 के बाद से तीन गुना हो गई। इस तेज वृद्धि में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति से जुड़े विज्ञापनों का योगदान रहा। अप्रैल 2020 में 10 श्रेणियों की शीर्ष सूची, मुख्य रूप से लॉकडाउन अवधि के दौरान रोजाना की जरूरतों से जुड़े सामानों से जुड़ी थी और ओटीटी मंचों पर विज्ञापन देने में इनकी लगभग 70 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।

दर्शकों की संख्या बढऩे से  विज्ञापनदाताओं की दिलचस्पी भी बढ़ी और ऐसे में  क्षेत्रीय फिल्मों की रिलीज के साथ ही इन मंचों पर मूल सामग्री में भी वृद्धि हुई। गोलकेरी (गुजराती), सूफियम सुजातायम (मलयालम), रविवार (बांग्ला) भी स्ट्रीमिंग मंच पर ही रिलीज की गई। केपीएमजी के एक अध्ययन से पता चला है कि लगभग 30 प्रतिशत भारतीय अपनी पसंदीदा भाषा में ओटीटी पर सामग्री देखते हैं, जो अंग्रेजी और हिंदी के अलावा है । जीई5 इंडिया की प्रोग्रामिंग प्रमुख  अपर्णा आचरेकर का कहना है कि उन्होंने दर्शकों के रुझान में एक अलग तरह का बदलाव देखा है जिसका अंदाजा उनके द्वारा देखी जा रही सामग्री से पता चलता है। इस सकारात्मक वृद्धि में लॉकडाउन के साथ-साथ कंपनी की कई पहल योगदान है ताकि दर्शकों को लगातार बिना किसी बाधा के मनोरंजन दिया जा सके। ज़ी 5 की महानगरों में वृद्धि दिखी जो करीब 50 प्रतिशत तक थी (बेंगलूरु-146 प्रतिशत, मुंबई-48 प्रतिशत, चेन्नई-55 प्रतिशत और हैदराबाद-47 प्रतिशत) वहीं टियर-2 शहरों में यह वृद्धि 30 प्रतिशत तक रही। वहीं ओटीटी मंच ने भी इस अवधि में पेड दर्शकों में बढ़ोतरी के संकेत दिए।

आचरेकर ने कहा, 'हमने पिछले दो महीनों में अपने रोजाना के सक्रिय उपयोगकर्ताओं में 20 प्रतिशत की तेजी देखी है और इसके साथ ही हमारे विज्ञापन करने वाले ब्रांडों की संख्या में स्पष्ट रूप से तेजी आई है। हमने अपनी विज्ञापन दरों में कमी नहीं की है और विज्ञापन की मात्रा अभी भी बढ़ी है और इस प्रक्रिया में विज्ञापन राजस्व में तेजी आई है।'

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