बिजनेस स्टैंडर्ड - कोविड का असर: मॉल और रेस्तरां खुले मगर ग्राहक न मिले
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कोविड का असर: मॉल और रेस्तरां खुले मगर ग्राहक न मिले

निकिता पुरी, अमृता सिंह और वीर अर्जुन सिंह / बेंगलूरु/नई दिल्ली 06 14, 2020

बाजार का हाल

लोग बाहर आने में बरत रहे सतर्कता
सरकार ने एक सप्ताह पहले मॉल और खरीद केंद्र खोलने की दी थी अनुमति
खान-पान एवं खरीदारी केंद्रों पर कम संख्या में आ रहे लोग
कर्ई छोटे रिटेलर अपनी दुकानें बंद करने के इच्छुक

बिजनेस स्टैंडर्ड कोविड का असर: मॉल और रेस्तरां खुले मगर ग्राहक न मिलेलॉकडाउन से पहले और इसके बाद जीवन और इसके रंग-ढंग दोनों बदले नजर आ रहे हैं। कोविड-19 महामारी फैलने से पहले बेंगलूरु के मावाली टिफिन रूम (एमटीआर) में नाश्ता करने के लिए लोगों को अपनी बारी आने तक कम से कम एक घंटे तक इंतजार करना पड़ता था। एमटीआर एक फिर खुल गया है, लेकिन अब ग्राहकों की भीड़ नहीं उमड़ रही है।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा लोगों के मन से कोविड-19 का भय निकालने के लिए शनिवार को स्वयं एमटीआर के लालबाग स्टोर पहुंचे थे। परिवार के साथ खान-पान का शौक रखने वाले से लेकर स्वयं को चुस्त-दुरस्त रखने के शौकीन लोग जिम के बाद डोसा के साथ घी का मजा लेने के लिए सीधे एमटीआर पहुंच जाते थे, लेकिन अब ऐसी बात नहीं रह गई है।

लॉकडाउन के बाद घर से बाहर निकलते ही जमीन पर बने गोल घेरे दिख जाते हैं, जो हमें एक दूसरे से पर्याप्त सामाजिक दूरी बरतने की याद दिलाते रहते हैं। हालांकि इनके अलावा कई दूसरी चीजें भी हैं, जो इस बात का एहसास दिलाती हैं कि हमें अब वायरस के साथ जीना है। कुछ जगह पर इस कदर सन्नाटा पसरा है जो मानो यह कह रहा है कि कोविड-19 वायरस के अलावा शायद कुछ बचा ही नहीं है। मिसाल के तौर पर गुडग़ांव के सेक्टर 29 में चारों तरफ से ऊंची इमारतों से घिरा एक खुला पार्क पहले अपनी चकाचौंध के लिए जाना मशहूर था, लेकिन अब यहां खालीपन है।

सूने पड़े बार और ढाबे पर काम करने वाले सुरक्षाकर्मियों का कहना है कि पूरी दिन ऐसा ही खाली बीतता है और ऐसा लगता नहीं कि पिछले एक सप्ताह में हालत सुधरी है। शुक्रवार शाम को दो मंजिला बिकानेर सहित कुछ अन्य स्टोर खुले थे, लेकिन कुछ मुठ्ठी भर लोग ही थे। गुरुग्राम में आम तौर पर व्यस्त रहने वाला से-ला वी रेस्तरां की जुलाई से पहले ग्राहकों का स्वागत करने की कोई योजना नहीं है। मेडिसन और पाइक जैसे रेस्तरां ग्राहकों तक किसी तरह भोजन पहुंचा रहे हैं।

दिल्ली में रेस्तरां कारोबार से जुड़े प्रियांक सुखीजा कहते हैं, 'सरकार ने हमें इसलिए  रेस्तरां खोलने की इजाजत नहीं दी कि अब सब कुछ ठीक हो गया है। दरअसल सरकार ने अर्थव्यवस्था को साधने के लिए यह निर्णय लिया है।' सुखीजा देश के चार शहरों में अपने 30 रेस्तरां चलाते हैं। उन्होंने दिल्ली या मुंबई में फिलहाल रेस्तरां नहीं खोलने का निर्णय लिया है। बड़े स्टोरों के मुकाबले एकल स्टोर कुछ बेहतर हालत में दिख रहे हैं। उदाहरण के लिए बेंगलूरु के इंदिरा नगर में इलेक्ट्रॉनिक स्टोर मी होम के आगे लोगों की लंबी कतारें देखी जा सकती हैं। हालांकि सभी शहरों में एकल स्टोर लोगों को खींच पा रहे हैं ऐसा भी नहीं है।

भुवनेश्वर में स्थानीय प्रशासन ने सामाजिक दूरी के नियमों का पालन नहीं करने के कुछ बाजारों और रेस्तरां बंद कर दिए हैं। पटना में खरीदारी केंद्रों पर भी भीड़ बिल्कुल नहीं दिख रही है। शहर में रहने वाली गृहिणी शैल देवी जब सगुना मोड़ पर एक स्टोर में जाने से हिचक रही थीं तो उन्हें देखकर एक दुकानदार ने मजाकिया लहजे में कहा, 'अगर आप खुद को सुरक्षित रखना चाहती थीं तो आपको घर पर रहना चाहिए था। अब आप घर से बाहर आ ही गईं तो ठीक से खरीदारी कर लें।'

कोच्चि और कोलकाता में मॉल एवं खरीदारी केंद्रों पर ग्राहक से अधिक कर्मचारी दिख रहे हैं, जो लोगों के बीच सामाजिक दूरी करने के लिए तैनात किए गए हैं। हालांकि दिल्ली के सलेक्ट सिटी मॉल में ग्राहकों की उमड़ी भीड़ देखकर लगा कि मानो कभी लॉकडाउन लगा ही नहीं था। बस एक ही अंतर था कि लोग मास्क लगाकर घूम रहे थे।

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