बिजनेस स्टैंडर्ड - कोरोना जांच : दो लैब पर लगाम
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कोरोना जांच : दो लैब पर लगाम

पवन लाल और सोहिनी दास /  06 12, 2020

बिजनेस स्टैंडर्ड कोरोना जांच : दो लैब पर लगाममुंबई और ठाणे में कोरोनावायरस संक्रमण की जांच की दर अब और भी कम हो सकती है क्योंकि उद्योग के खिलाडिय़ों का कहना है कि दो सबसे बड़े निजी डायग्नॉस्टिक्स लैब को कोविड-19 के नमूनों की जांच करने से रोक दिया गया है। महाराष्ट्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक राज्य में करीब 47 फीसदी जांच निजी प्रयोगशालाओं में की गई है। जबकि सूत्रों का दावा है कि कोरोनावायरस संक्रमण से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले मुंबई शहर में निजी प्रयोगशालाओं में की गई जांच 40 फीसदी से अधिक है। हालांकि जांच दर मई में रोजाना 4,000 के करीब रही और जून में भी जांच की दर इससे आगे नहीं बढ़ सकी।

महाराष्ट्र में संक्रमण की कुल पॉजिटिव दर करीब 16 प्रतिशत के आसपास थी लेकिन मुंबई के लिए यह दर लगभग दोगुनी करीब 30 फीसदी थी। अधिकारियों ने पहले कहा है कि यह कुछ क्लीनिक आदि में लक्षित जांच की वजह से ऐसा हुआ है। हालांकि उद्योग सूत्रों का आरोप है कि नगर प्रशासन जांच की दर कम रखना चाहता है ताकि संक्रमण के पॉजिटिव मामले न मिल सकें।

मुंबई में परिचालन करने वाली प्रयोगशाला की एक राष्ट्रीय चेन के सीईओ का कहना है, 'अधिक जांच का सीधा अर्थ यह है कि ज्यादा पॉजिटिव मामले सामने आएंगे और इससे स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे पर अधिक दबाव पड़ेगा। यह केवल निजी प्रयोगशालाओं की बात नहीं है कि कई बार रिपोर्ट देने में देरी होती है बल्कि कई बार हमसे सरकारी  प्रयोगशालाओं की तरफ से भी पूछा जाता है कि उनके यहां एक हफ्ते से अधिक समय से पड़े नमूनों की जांच हम कर सकते हैं या नहीं। हैरानी की बात यह है कि केवल बड़े निजी प्रयोगशालाओं को निशाना बनाया जाता है  जबकि छोटे स्तर के प्रयोगशाला की स्थिति ठीक है।' इस बीच, देश के सबसे बड़े निजी डायग्नॉस्टिक प्रयोगशालाओं को निर्धारित नियमों का अनुपालन न करने के लिए सरकारी दंड का भुक्तभोगी बनना पड़ रहा है जो कोविड जांच में लगने वाले समय के साथ-साथ भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) को मरीजों के डेटा की रिपोर्ट करने की प्रक्रिया से जुड़ा है।

हालांकि कुछ के अधिकारियों का कहना है कि इस तरह का दंड उचित नहीं है क्योंकि इनके बंद होने से वैसे मरीज परेशान हो रहे हैं जिन्हें डॉक्टरों ने जांच कराने के लिए कहा है। कई कोशिशों के बावजूद बृहन्मुंबई महानगरपालिका(बीएमसी) के अधिकारियों से इस बाबत कोई टिप्पणी नहीं मिल सकी।

मुंबई में मेट्रोपॉलिस हेल्थकेयर कुछ को हाल में राज्य ने कुछ ऐसी शिकायतों के बाद कोविड-19 जांच बंद करने का आदेश दिया है जिसके मुताबिक कुछ जांच रिपोर्ट देने में 24 घंटे से अधिक समय लगाती है। रोजाना कुछ हजार कोविड-19 मरीजों की जांच करने वाली कंपनी मेट्रोपॉलिस को 9 जून को मुंबई में एक महीने तक के लिए कोविड-19  नमूने की जांच करने से रोक दिया गया। कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक इसी वजह से अप्रैल में भी कुछ हफ्तों के लिए जांच बंद कर दी गई थी। मेट्रोपॉलिस केवल अकेली कंपनी नहीं है। इससे पहले, थायरोकेयर टेक्नोलॉजीज को भी देश भर में 15 पिन कोड में कोविड-19 के संभावित मामलों के नमूने एकत्र करना बंद करने के लिए कहा गया था। इसके अधिकारियों का कहना है कि कंपनी पर यह आरोप लगे कि यह कुछ बिना लक्षणों वाले मरीजों की जांच कर रही है और इसके अलावा जांच गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठाए गए।

अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली में भी एसआरएल डायग्नॉस्टिक्स को मई के अंत में कुछ दिनों के लिए कुछ श्रेणियों के मरीजों की जांच बंद करने के लिए कहा गया था। मेट्रोपॉलिस की प्रबंध निदेशक अमीरा शाह का कहना है कि उनकी कंपनी के कुछ कर्मचारी अस्वस्थ थे जिसके कारण डेटा संग्रह और संबंधित अधिकारियों के पास इसे जमा करने में देरी हुई जिसके कारण कारण बताओ नोटिस भेजने के साथ ही सेवा रोक दी गई। वह कहती हैं, 'मुंबई में कोविड-19 की जांच के लिए नमूने लेने से पूरी तरह मना कर दिया गया। इसका मतलब है कि शहर के निवासियों को शहर में जांच कराने के अधिकार से वंचित कर दिया गया  जो महामारी की स्थिति में सबके लिए परेशानी की बात है।' शाह कहती हैं, 'इसका समाधान यह है कि प्रत्येक नगर निगम यह तय करे कि कहां कोविड-19 के आंकड़े बढ़ रहे हैं, उसकी  समय सीमा का पता लगाते हुए फिर जवाबदेही तय करते हुए इसके उल्लंघन के हिसाब से दंड प्रक्रिया तय की जाए।'

उन्होंने यह भी कहा कि अधिकारियों की संतुष्टि के मुताबिक कम नमूने लेना ही एक विकल्प था। थायरोकेयर के प्रबंध निदेशक अरोकियास्वामी वेलुमणि का कहना है कि सबसे बड़े निजी प्रयोगशाला ज्यादा जांच कर रहे हैं जिसकी वजह से ज्यादा पॉजिटिव मामले सामने आ रहे हैं। वह कहते हैं, 'निजी प्रयोगशालाओं को पर्याप्त सबूत के बगैर दोषी ठहराया जा रहा है और उन्हें एकतरफा दोष देने के साथ ही उन पर प्रतिबंध लगाने से चीजें और खींची जा रही हैं।' उनका कहना है कि एक तीसरे पक्ष की जरूरत है जो जांच की गुणवत्ता का अंदाजा लगाए और यह एक स्वतंत्र एजेंसी होनी चाहिए।

हालांकि, जांच को बंद करने या धीमा करने का अब कोई तर्क नहीं है। एसआरएल डायग्नॉस्टिक्स के सीईओ अरिंदम हलदर का कहना है, 'विश्व स्तर पर यह चिकित्सा बिरादरी में यह बात स्पष्ट तौर पर उभरी है कि इस महामारी से लडऩे का सबसे प्रभावी तरीका सिर्फ और सिर्फ जांच है। ज्यादा लोगों में पॉजिटिव मामला आना भी ठीक है क्योंकि इसमें कुल मिलाकर मृत्यु दर कम है और आप अपना नतीजा जानने के बाद एहतियात बरतकर इलाज कर सकते हैं। इसके अलावा जब जांच अच्छी तरह होगी तब संपर्क सूत्रों का पता लगाना भी प्रभावी होगा।' वह कहते हैं, 'निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों को एक साथ काम करना चाहिए और ज्यादा बेहतर नतीजे देने के लिए इन्हें विरोधी के रूप में नजर नहीं आना चाहिए।'

दिल्ली प्रशासन के मुताबिक एक महीने से कम समय में मामलों में काफी तेजी का अनुमान लगाया है, जो करीब 5 लाख के आंकड़े को पार कर सकता है।  आश्चर्यजनक रूप से मुंबई से इस तरह के अनुमान नहीं दिखे। देश की सबसे ज्यादा घनी आबादी वाले शहर मुंबई में जहां 50,000 से अधिक संक्रमण के मामले हैं वहां महामारी के प्रसार की सीमा को जानने के लिए बड़े पैमाने पर जांच करने की जरूरत है।


गूगल में दिखेंगे कोविड-19 जांच केंद्र

सर्च इंजन गूगल ने शुक्रवार को कहा उसने अपनी सर्च, असिस्टेंट और मैप सेवाओं पर निकटतम कोविड-19 जांच केंद्र का पता बताने की सुविधा शुरू की है। गूगल ने एक बयान में कहा कि वह भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) और माईगव पोर्टल के साथ काम कर रही है। यह सेवा उपयोक्ताओं को अधिकृ कोविड-19 जांच केंद्र की जानकारी उपलब्ध कराएगी। कंपनी ने कहा कि उसकी यह नई सुविधा अंग्रेजी के साथ-साथ आठ भारतीय भाषाओं में भी उपलब्ध होगी। इसमें हिंदी, बांग्ला, तेलुगू, तमिल, मलयालम, कन्नड़, मराठी और गुजराती शामिल है। वर्तमान में गूगल ने देश के 300 से अधिक शहरों में 700 से ज्यादा कोविड-19 जांच केंद्रों की जानकारी अपने सर्च, असिस्टेंट और मैप पर जोड़ी है। भाषा

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