बिजनेस स्टैंडर्ड - जीएसटी रिटर्न में देरी पर अब थोड़ी राहत
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Thursday, July 16, 2020 06:33 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम अर्थव्यवस्था खबर

जीएसटी रिटर्न में देरी पर अब थोड़ी राहत

दिलाशा सेठ / नई दिल्ली June 12, 2020

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद ने विलंब शुल्क में कमी और ब्याज दर का बोझ आधा कर छोटे कारोबारों को राहत दी है। कोविड-19 महामारी के बाद देश में तालाबंदी के बाद शुक्रवार को पहली बार जीएसजी परिषद की बैठक आयोजित की गई। करीब चार घंटे तक चली इस बैठक में जीएसटी दरों को लेकर चर्चा नहीं हुई, लेकिन परिधान के मामले में इन्वर्टेंड शुल्क ढांचे में सुधार पर बात हुई। हालांकि इस पर निर्णय फिलहाल टाल दिया गया है। इन्वर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर की स्थिति में तैयार माल के मुकाबले इसके उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल पर कर अधिक लगता है।

जीएसटी संग्रह में गिरावट के बाद राज्यों के मुआवजा दिए जाने के तल्ख मुद्दे पर अगले महीने होने वाली एक अलग बैठक में चर्चा होगी। इस बैठक में बाजार से उधार लेने के विकल्प पर भी चर्चा होगी। रिटर्न दाखिल करने के विचाराधीन मामले तेजी से निपटाने के विषय पर परिषद ने शून्य देनदारी के मामले में जीएसटीआर 3बी नहीं दाखिल करने पर विलंब शुल्क से छूट दे दी है। कर देनदारी के मामले में विलंब शुल्क प्रति रिटर्न 500 रुपये तय कर दिया गया है, जो जुलाई 2017 से जनवरी 2020 तक के लिए प्रभावी होगा। घटी हुई दर 1 जुलाई से 30 सितंबर के बीच दाखिल सभी जीएसटीआर 3बी रिटर्न पर लागू होगी।

परिषद ने 5 करोड़ रुपये तक कारोबार करने वाली इकाइयों के लिए विलंब से कर दाखिल करने पर ब्याज दर घटाकर 9 प्रतिशत कर दी है। यह प्रावधान फरवरी, मार्च और अप्रैल के लिए लागू होगा और 30 सितंबर तक अमल में लाया जा सकेगा। सितंबर तक जीएसटीआर 3बी रिटर्न दाखिल किए जाने की स्थिति में मई, जून और जुलाई के लिए विलंब शुल्क  और ब्याज से छूट दे दी गई। 

जीएसटी परिषद के बैठक में लिए गए निर्णय पर डेलॉयट इंडिया के एम एस मणि ने कहा,'जरूरत पडऩे पर सितंबर के बाद की अवधि के लिए भी नियमों के अनुपालन से राहत देना आवश्यक है। इस समय सरकार की नजर कारोबार दोबारा पटरी पर लाने और क्रियाशील पूंजी प्रबंधन से जुड़ा है।' जो करदाता रद्द हुए जीएसटी पंजीकरण समय पर सक्रिय नहीं करा पाए हैं उन्हें 30 सितंबर तक का समय दिया जाएगा।

जीएसटी परिषद ने राज्यों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजा उपकर प्रणाली पर चर्चा

के लिए एक सूत्री बैठक करने का निर्णय लिया। इस बारे में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, 'हम इस पर चर्चा करेंगे कि मुआवजा उपकरण प्रणाली के लिए बाजार से उधार लेने की जरूरत पेश आएगी या नहीं। अगर जरूरत पेश आई तो इस पर विचार होगा कि इसका भुगतान कौन करेगा।'

केरल के वित्त मंत्री थॉमस आइजैक ने सोशल मीडिया ट्विटर पर कहा, 'जीएसटी मुआवजा और तेज से कम हो रहे उपकर संग्रह का समाधान खोजने के लिए जीएसटी परिषद को रकम उधार लेनी होगी और उपकर अवधि एक या दो वर्ष के लिए बढ़ानी होगी।' अप्रैल और मई में सरकार जीएसटी संग्रह के मद में मात्र 95,000 करोड़ रुपये जुटा पाई है।

परिषद में परिधान के संबंध में इन्वर्टेंड ड्यूटी संरचना पर भी चर्चा हुई, लेकिन इस पर निर्णय टाल दिया गया।

Keyword: GST Council, Relief, Taxpayer, Interest Rate, GSTR, रिटर्न, जीएसटी परिषद, विलंब शुल्क, राहत, जीएसटीआर,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या जियो-गूगल के साथ आने से देश में तकनीक का होगा तेज विकास?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.