बिजनेस स्टैंडर्ड - आईओसी का उत्पादन 80 प्रतिशत पर
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आईओसी का उत्पादन 80 प्रतिशत पर

अमृता पिल्लई / मुंबई June 10, 2020

सरकारी क्षेत्र की तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) ने बुधवार को कहा कि पेट्रोलियम उत्पादों की मांग में वापसी होने से उसकी रिफाइनरियों में उत्पादन 80 फीसदी के पार पहुंच गया है। 

कंपनी ने एक बयान में कहा, 'इंडियन ऑयल रिफाइनरियों का कच्चा तेल उत्पादन अब तक 80 फीसदी के पार जा चुका है। इसकी वजह है कि सभी तरह के पेट्रोलियम उत्पादों की खपत को मिला दें तो मई 2020 में यह अप्रैल 2020 के खपत स्तर से लगभग दोगुने पर पहुंच गया है।'    

मई में कंपनी का उत्पादन उसकी निर्धारित क्षमता से 55 फीसदी पर थी जो मई के अंत तक 78 फीसदी पर पहुंच गई। कंपनी ने एक वक्तव्य में कहा, 'अप्रैल के आरंभ में रिफाइनरियों की क्षमता उपयोगिता कम होकर 39 फीसदी रह गई थी।'

अपने नियोजित पूंजी व्यय को लेकर आईओसी ने कहा कि कंपनी वित्त वर्ष 2021 के लिए मंजूर किए गए 26,143 करोड़ रुपये खर्च करने की ओर बढ़ रही है।    हालांकि, सभी तेल कंपनियां अपनी पूंजी व्यय योजनाओं को आगे नहीं बढ़ा रही हैं। उदाहरण के लिए भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (बीपीसीएल) 8,000 करोड़ रुपये से 8,500 करोड़ रुपये खर्च करने पर विचार कर रही है जो कि सामान्य तौर पर उसके सालाना 11,000 करोड़ रुपये के व्यय से कम है। बीपीसीएल ने लॉकडाउन के कारण परियोजना गतिविधि में कमी आने और कम लाभ के कारण पूंजीगत व्यय घटा दिया है। 

बुधवार को रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (एचपीसीएल) ने श्रमिकों की किल्लत और मॉनसून के चलते अपने विशाखापत्तनम रिफाइनरी को पूरी तरह से तैयार करने के काम को कम से कम अक्टूबर-नवंबर तक के लिए रोक दिया है।      

आईओसी ने कहा, मरम्मत के लिए बंद रखे गए गुवाहाटी रिफाइनरी के ऑनलाइन हो जाने से, इंडियन ऑयल की रिफाइनरी इस महीने अपनी 90 फीसदी क्षमता के साथ परिचालन करेंगी। कंपनी ने कहा कि रणनीतिक उत्पाद निर्यातों के साथ ही बाजार में उत्पाद बढ़ गए हैं।  

उत्पादों के आधार पर आईओसी ने कहा कि इस साल अप्रैल के मुकाबले मई में पेट्रोल की मांग 70 फीसदी और डीजल की मांग 59 फीसदी अधिक रही। देशबंदी में लोगों की आवाजाही पर नियंत्रण के कारण अप्रैल में पेट्रोल और डीजल की मांग घटकर सामान्य दिनों के मुकाबले 30 फीसदी पर चली गई थी। 

हालांकि सालाना आधार पर तुलना करें तो इन उत्पादों की मांग अब भी कमजोर बनी हुई है।

कंपनी ने कहा, 'मई 2019 या लॉकडाउन से पूर्व मौजूदा साल के आरंभिक महीनों के मुकाबले सभी उत्पादों के लिए वृद्धि का प्रतिशत अभी भी 24 से 26 फीसदी पर पहुंचना बाकी है। एलपीजी के मामले में कॉर्पोरेशन प्रतिदिन करीब 25 लाख सिलिंडरों को भर रही है, औसत विलंब एक दिन से कम हो गया है।' 

आईओसी ने कहा कि विमान ईंधन (एटीएफ) की मांग अब भी कम है। यह सामान्य मांग के मुकाबले 24 फीसदी है। आईओसी ने कहा, 'ब्लैक ऑयल विशेष तौर पर ईंधन तेल, डामर, पेटकोक और गंधक की मांग में भी सुधार नजर आया है जिससे रिफाइनरों को उत्पादन बढ़ाने में मदद मिल रही है।'      

अब तक मांग में आई कमी से भारतीय रिफाइनरों के मार्जिन पर आगे भी असर पडऩे के आसार हैं। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने अपनी अप्रैल की रिपोर्ट में कहा कि मांग में बाधा आने से वित्त वर्ष 2021 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में सकल रिफाइनिंग मार्जिन (जीआरएम) में कमी आने के आसार हैं। 

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