बिजनेस स?टैंडर?ड - एटलस साइकिल के थम गए पहिये
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, December 06, 2022 09:20 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम कंपनिया खबर

एटलस साइकिल के थम गए पहिये

टी ई नरसिम्हन /  June 08, 2020

बिजनेस स?टैंडर?ड एटलस साइकिल के थम गए पहियेकभी भारतीय सड़कों पर राज करने वाली तथा राष्ट्रीयता का प्रतीक माने जाने वाली एटलस साइकिल ने अपने 70वें जन्मदिन के एक साल पहले ही हार मान ली। हालांकि कंपनी का कहना है कि उसने अस्थायी तौर पर उत्पादन को रोका है और यह अंतिम निर्णय नहीं है। लेकिन सच्चाई यह है कि ब्रांड काफी समय से बाजार में बने रहने के लिए जद्दोजहद कर रहा है और र्वतमान स्थिति अच्छी नहीं कही जा सकती।

पहले एटलस साइकिल इंडस्ट्रीज (एसीआईएल) के नाम वाली एटलस साइकिल्स (हरियाणा) लिमिटेड ने साल 1851 में साइकिल की गद्दी बनाने से कारोबार की शुरुआत की थी। एक साल बाद कारोबारी जानकी दास कपूर ने एक साहसी कदम उठाते हुए हरियाणा के सोनीपत में एक साइकिल फैक्टरी स्थापित की। उन्होंने धैर्य तथा साहस के प्रतीक को दर्शाते हुए इसका नामकरण किया।

दिलचस्प बात यह रही कि कपूर के प्रतिस्पर्धी भी धैर्य तथा साहस वाली छवि के साथ ही आगे बढ़े। मुरुगप्पा ग्रुप के मालिकाना हक वाली टीआई साइकिल्स ने अपने ब्रांड का नाम हरक्यूलिस रखा तो वहीं मुंजाल ने हीरो साइकिल की स्थापना की। विडंबना यह है कि जैसे जैसे बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ती गई, एटलस को सड़क पर पकड़ बनाए रखने में काफी जद्दोजहद करनी पड़ी। आखिरकार, 3 जून 2020 को विश्व साइकिल दिवस पर जब इसके प्रतिद्वंद्वी सोशल मीडिया पर अपने ब्रांडों को बढ़ावा देने में व्यस्त थे, एटलस साइकिल ने घोषणा की कि कंपनी उत्तर प्रदेश के साहिबाबाद में स्थित साइकिल निर्माण कारखाने को बंद कर रही है। रिपोर्ट बताती है कि 2,00,000 से अधिक साइकिलों के मासिक उत्पादन की क्षमता के साथ यह कंपनी का अंतिम परिचालन संयंत्र था।

वरिष्ठ उद्योग पेशेवरों का कहना है कि एटलस कई सालों से चुनौतियों से जूझ रही थी। टीआई साइकिल्स ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष के.आर. चंद्रशेखरन ने कहा, 'मूल समस्या यह थी कि एटलस लगातार बाजार के एक ऐसे खंड पर ध्यान केंद्रित कर रहा था जहां मांग लगातार घट रही थी तथा कंपनी के लाभ में कमी आ रही थी।'

उनका मानना है कि कंपनी समय के साथ बाजार की भावनाओं को समझने में नाकाम रही और उसने विविधता के साथ लाभदायक अवसरों को खो दिया।

एक राष्ट्रीय साइकिल ब्रांड के मुख्य कार्याधिकारी ने कहा कि एटलस को बेहतर ब्रांड होने का लाभ उठाना चाहिए। एटलस से काफी समय बाद बाजार में आए हीरो जैसे ब्रांड बदलाव को स्वीकार करते गए तथा उभरते हुए रुझानों के साथ प्रीमियम, फिटनेस जैसी कई श्रेणियों में आगे बढ़े। उन्होंने कहा, 'ये अधिक मांग वाले बाजार नहीं हैं लेकिन यहां मार्जिन अच्छा मिल जाता है।' बाजार की एक रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों से प्रतिस्पर्धा के बावजूद हीरो की घरेलू बाजार में 47 फीसदी तथा प्रीमियम बाजार में 43 फीसदी हिस्सेदारी है। बाजार का मानना है कि अगर एटलस अपने ब्रांड के साथ अधिक कल्पनाशील होता तथा हीरो के नजरिये से बाजार को देखता तो ब्रांड इससे बेहतर कर सकता था। ब्रांडबिल्डिंग डॉट कॉम के संस्थापक अंबी परमेश्वरन ने कहा, 'बीएसए, हरक्यूलिस और हीरो ने हमेशा मार्केटिंग में बेहतर काम किया है। जो कंपनियां साइकिल में बदलाव पर अधिक ध्यान केंद्रित करने तथा उनका प्रबंधन करने में सफल रहीं, उन्होंने बहुत बेहतर काम किया।' इसके अलावा, एटलस ने पर्याप्त नवाचार नहीं किया। कंपनी एटलस पोर्टफोलियो के तहत कई उप-ब्रांड बना सकती थी जिससे बाजार में पैठ बनाई जा सके। सोनीपत, साहिबाबाद, रसोई और गुरुग्राम में इकाइयों के साथ एटलस की कुल विनिर्माण क्षमता 31 लाख साइकिल सालाना रही।

तो एटलस का पहिया क्यों थम गया? आंतरिक सूत्रों का कहना है कि कंपनी को बदनाम किया गया। एक सूत्र ने नाम गोपनीय रखने के साथ कहा, 'एटलस विस्तार नहीं कर सकी जिसके पीछे प्रमुख वजह आंतरिक (पारिवारिक) मामले रहे।' खराब प्रबंधन ने भी ब्रांड को रेड जोन में धकेल दिया। वर्ष 2019-20 में कंपनी का घाटा 45.81 करोड़ रुपये था और कंपनी की सालाना रिपोर्ट में इसका दोष चीन से सामान डंपिंग तथा स्थानीय विनिर्माण की बढ़ती लागत को दिया गया।

Keyword: Atlas Cycle, ACIL, Brand, Hercules, Hero, एटलस साइकिल, ब्रांड, फैक्टरी, हरक्यूलिस, हीरो,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 जेबी फार्मा की पहल के बाद हृदयरोग की दवा होगी और सस्ती
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.