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लक्ष्य से पहले ऋणमुक्त होगी रिलायंस

सुरजीत दास गुप्ता / नई दिल्ली June 08, 2020

मुकेश अंबानी इसी साल दिसंबर तक रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) को ऋण मुक्त कंपनी बनाने के लिए बिल्कुल सही राह पर अग्रसर हैं। कंपनी करीबी सूत्रों के अनुसार, कंपनी को ऋण मुक्त बनाने के लिए शेयरधारकों को सार्वजनिक तौर पर जो समय-सीमा बताई गई थी, उसके मुकाबले करीब तीन महीने पहले ही वह लक्ष्य हासिल हो जाएगा।

ऐसे समय में जब अधिकतर कंपनियां कोरोवायरस प्रकोप से निपटने के लिए जूझ रही हैं, आरआईएल ने अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक इकाई जियो प्लेटफॉम्र्स (जेपीएल) में हिस्सेदारी बिक्री और आरआईएल में राइट्स इश्यू के जरिये महज छह सप्ताह में 1.05 लाख करोड़ रुपये जुटाए हैं। आरआईएल के राइट्स इश्यू को 1.59 गुना अभिदान मिला।

आरआईएल ने छह निवेशकों से 92,203 करोड़ रुपये जुटाए जिसमें जियो प्लेटफॉम्र्स में 19.9 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने वाली फेसबुक जैसी प्रमुख निवेशक भी शामिल है। जियो प्लेटफॉम्र्स रिलायंस जियो के साथ-साथ विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म को नियंत्रित करती है। इसके अलावा कंपनी ने राइट्स इश्यू के जरिये भी 53,125 करोड़ रुपये जुटाए जहां शेयरधारकों ने केवल 25 फीसदी अग्रिम रकम का भुगतान किया। शेष रकम का भुगतान अगले डेढ वर्षों के दौरान किस्तों में किया जाएगा। इतना ही नहीं, रिलायंस ने अपने खुदरा पेट्रोलियम कारोबार में बीपी को 49 फीसदी हिस्सेदारी बेचकर 7,000 करोड़ रुपये जुटाए।

कंपनी के करीबी सूत्रों ने कहा कि पिछले साल के नकदी सृजन के आधार पर आरआईएल इस साल दिसंबर के अंत तक (नौ महीनों की अवधि में) 53,000 करोड़ रुपये से अधिक नकद मुनाफा सृजित करने की उम्मीद कर रही है जिससे कंपनी दिसंबर तक ऋण मुक्त हो जाएगी। हालांकि आरआईएल ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार किया।

हालांकि विश्लेषकों का कहना है कि रिलायंस के लिए पिछले साल के नकद मुनाफा स्तर तक पहुंचना मुश्किल होगा क्योंकि कोविड-19 के प्रकोप के कारण रिफाइनिंग कारोबार के साथ-साथ पेट्रोकेमिकल की मांग में काफी गिरावट दिख रही है।

परिणामस्वरूप ऋणमुक्त की स्थिति तक पहुंचने में थोड़ी देरी हो सकती है। कंपनी के करीबी लोगों ने कहा कि सबसे खराब स्थिति में भी कंपनी दिसंबर नहीं तो अपने लक्ष्य के अनुरूप मार्च में नकद मुनाफे के उस स्तर तक पहुंच जाएगी। इस प्रकार कंपनी किसी भी सूरत में अपने लक्ष्य को हासिल कर लेगी। सूत्रों ने कहा कि आरआईएल के तेल से लेकर रसायन कारोबार कारोबार में 15 अरब डॉलर यानी करीब 1.18 लाख करोड़ रुपये में 20 फीसदी हिस्सेदारी हासिल करने के लिए सऊदी अरब की प्रमुख तेल कंपनी अरामको जांख-परख की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है। यदि यह सौदा पूरा हो गया तो इस इस बात की पूरी संभावना दिख रही है कि आरआईएल अपने लक्ष्य से पहले दिसंबर में ही ऋण मुक्त कंपनी बन जाएगी।

अरामको सौदा (यदि पूरा हुआ तो) और राइट्स इश्यू के शेष हिस्से (शेयरधारकों द्वारा भुगतान होने वाली 75 फीसदी रकम) को मिलाकर करीब 1.58 लाख करोड़ रुपये से अधिक की नकदी सृजित होगी। इस प्रकार आरआईएल के पास अतिरिक्त नकदी भंडार होगा जिसका इस्तेमाल वृद्धि के अगले चरण में किया जा सकता है और उसके लिए उसे ऋण लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

रिलायंस को 5जी स्पेक्ट्रम खरीदने, नेटवर्क में विस्तार करने और फिक्स्ड ब्रॉडबैंड कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए काफी रकम की जरूरत होगी। उसकी नकदी का आकार दूरसंचार में आरआईएल ने अब तक जो करीब 3 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया है, उसका लगभग आधा होगा। इसके अलावा ई-रिटेल क्षेत्र में भी आक्रामक कारोबार के लिए निवेश करने की जरूरत होगी जहां उसे एमेजॉन और वॉलमार्ट के स्वामित्व वाली फ्लिपकार्ट जैसी प्रमुख प्रतिस्पर्धियों का सामना करना पड़ रहा है।

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