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पूर्वांचल से शुरू होगा बिजली का निजीकरण

श्रेया जय / नई दिल्ली June 08, 2020

उत्तर प्रदेश सरकार अपनी 5 बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) में से एक पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम (पीयूवीवीएनएल) के निजीकरण पर विचार कर रही है। यह वितरण कंपनी पूर्वी उत्तर प्रदेश में बिजली आपूर्ति का नियंत्रण व प्रबंधन करती है, जिसके क्षेत्र में राजनीतिक रूप से 2 महत्त्वपूर्ण शहर आते हैं। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के दायरे में आने वाले वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सांसद हैं, वहीं गोरखपुर राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का राजनीतिक कार्यक्षेत्र है।

वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि बिजली विभाग पीयूवीएनएनएल की पेशकश की योजना बना रहा है, जिससे नुकसान में कमी लाई जा सके और आपूॢत संबंधी बुनियादी ढांचे में सुधार किया जा सके। वाराणसी को इसके पहले शहरी बिजली सुधारों के लिए मॉडल सिटी के रूप में चिह्नित किया गया था। इसके तहत भूमिगत केबल बिछाने, स्मार्ट मीटर लगाने व आईटी सक्षम बिजली आपूर्ति के साथ अन्य काम शामिल है।

उत्तर प्रदेश में वितरण कंपनी का नुकसान वित्तीय व परिचालन दोनों हिसाब से देश में सबसे ज्यादा है। उदय पोर्टल के मुताबिक मार्च 2020 तक राज्य की 5 वितरण कंपनियों का कुल शुद्ध नुकसान 819 करोड़ रुपये रहा है।   राज्य का औसत सकल तकनीकी व वाणिज्यिक (एटीऐंडसी) नुकसान या दूसरे शब्दों ें कहें तो अपर्याप्त व्यवस्था के कारण बिजली आपूर्ति में होने वाला नुकसान 30 प्रतिशत था, जो राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है। राज्य की 5 वितरण कंपनियों में सिर्फ कानपुर इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कंपनी (केस्को) ही मुनाफे में है।

पीयूवीवीएनएल के प्रबंध निदेशक के बजाज ने इस मसले पर प्रतिक्रिया देने से इनकार किया है। उत्तर प्रदेश बिजली निगम लिमिटेड (यूपीपीसीएल) के चेयरमैन अरविंद कुुमार ने इस मसले पर भेजे गए मैसेज व कॉल का कोई जवाब नहीं दिया। यूपीपीसीएल सभी वितरण कंपनियों, बिजली उत्पादकों व पारेषण का नोडल निकाय है।

इस समय उत्तर प्रदेश के आगरा में निजी बिजली वितरण फ्रैंचाइजी है, जो टोरंट पावर के पास है।  2009 में केस्को को फ्रेंचाइजी मॉडल पर टोरंट को देने की पेशकश की गई थी। माना जा रहा था कि टोरंट बिलिंग, कनेक्शन और अतिरिक्त बुनियादी ढांचा बनाने का काम करेगी, जबकि केस्को उसकी मालिक बनी रहेगी। बहरहाल विपक्षी दलों, कर्मचारी संगठनों की ओर से बार बार विरोध प्रदर्शन के कारण केस्को ने इस मामले में हाथ नहीं डाला और यह सौदा 2015 में रद्द कर दिया गया।

2018 में उत्तर प्रदेश ने लखनऊ और वाराणसी सहित 5 शहरों के निजी वितरण फ्रैंचाइजी की पेशकश की, लेकिन यह मामला भी आगे नहीं बढ़ पाया।

फ्रैंचाइजी मॉडल के विपरीत वितरण कंपनियों के निजीकरण में निजी कारोबारी को मालिकाना दिया जाना शामिल होता है।  कंपनी बिजली खरीद का प्रबंधन, बुनियादी ढांचा बनाने का काम, बिलिंग का प्रबंधन और संग्रह और हानि को कम करने के पहले से तय लक्ष्य पर पहुंचने की कवायद करती है। दिल्ली और मुंबई में निजी क्षेत्र की वितरण कंपनियां बिजली वितरण का काम करती हैं। ओडिशा ने हाल ही में टाटा पावर को 4 सर्किल में बिजली वितरण का लाइसेंस दिया है।

एक अधिकारी ने नाम न दिए जाने की शर्त पर कहा, 'केंद्र सरकार नए मसौदा बिजली बिल के मुताबिक सुधार कर रही है और वह राज्यों पर भी निजी कंपनियों से हाथ मिलाने के लिए दबाव बना रही है। उत्तर प्रदेश बिजली वितरण के क्षेत्र में निवेश का स्वागत करना चाहता है। ज्यादा हानि के कारण पीयूवीवीएनएल को चुना गया है और इसमें बदलाव एक नजीर बनेगा।'

बहरहाल सूत्रों ने कहा कि यूपीपीसीएल इस विचार को लेकर उत्सुक नहीं है, जबकि राज्य सरकार इसे लेकर उत्साहित है। ऐसा माना जा रहा है कि यूपीपीसीएल ने नए मसौदा बिजली विधेयक के कुछ प्रावधानों को लेकर भी चिंता जताई है।

इस मामले से जुड़े एक अधिकारी ने कहा, 'विधेयक में सुझाव दिए गए फ्रैंचाइजी मॉडल को लेकर यूपीपीसीएल को आपत्ति है क्योंकि वह राज्य की वितरण कंपनियों के काम का दोहराव करता है। निगम बिजली क्षेत्र में प्रत्यक्ष नकद अंतरण के भी खिलाफ है और उसे डर है कि इससे बिजली के बिलिंग में तमाम खामियां आएंगी।'

पीयूवीवीएनएल के अंतर्गत वाराणसी, गाजीपुर, चंदौली, जौनपुर, संत रविदास नगर, मिर्जापुर, सोनभद्र, मऊ, आजमगढ़, बलिया, देवरिया, कुशीनगर, गोरखपुर, महराजगंज, संतकबीर नगर, सिद्धार्थनगर, बस्ती,  इलाहाबाद, प्रतापगढ़, फतेहपुर और कौशांबी आते हैं।

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