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पिछले साल 94 इक्विटी योजनाओं का हुआ बंटाधार
रौनक शाह /  April 06, 2009

वित्त वर्ष 2008-09 म्युचुअल फंड उद्योग के लिए काफी बुरा साबित हुआ।

लगभग सभी इक्विटी योजनाओं ने इस दौरान 20 से 50 फीसदी तक का ऋणात्मक प्रतिफल दर्ज किया है। यानी उनको घाटा हुआ है।

एक तरफ जहां निवेशकों ने इनसे धन को निकाल लिया, वहीं सोने ने निवेशकों को खुश कर दिया। इस अवधि में गोल्ड ईटीएफ का रिटर्न 22 से 24 प्रतिशत का रहा है।

सेक्टरल फंडों में सबसे बुरी हालत तकनीकी फंडों का रहा। सभी तकनीकी योजनाओं के शुध्द परिसंपत्ति मूल्य में औसतन 47 प्रतिशत की गिरावट आई। विशाखित यानी डाइवर्सिफाइड श्रेणी, जिसके अंतर्गत सभी परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियों की 500 से अधिक योजनाएं शामिल हैं, ने 40 प्रतिशत की गिरावट दिखाई है।

बैंकिंग और टैक्स प्लानिंग योजनाओं के शुध्द परिसंपत्ति मूल्य (एनएवी) औसतन 39 प्रतिशत घटे जबकि इंडेक्स फंडों में 37 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई जो बेचमार्क सूचकांकों जैसे सेंसेक्स, एस ऐंड पी और सीएनएक्स निफ्टी में आई गिरावट के अनुरूप ही थी।

अन्य फंडों की बात करें तो विशिष्ट फंडों के एनएवी में 34 प्रतिशत और ऑटो फंडों के एनएवी में 33 प्रतिशत की गिरावट आई। एफएमसीजी, फार्माख् परिसंपत्ति आवंटन और हाइब्रिड फंडों के एनएवी में 20 से 25 प्रतिशत तक की गिरावट आई।

इक्विटी योजनाओं के धराशायी होने के पीछे इन योजनाओं से पैसे निकालना वजह नहीं थी। वास्तव में, पिछले वित्त वर्ष में इक्विटी से जुड़ी सभी योजनाओं का मूल्य 81,000 करोड़ रुपये से अधिक घटा। इक्विटी योजनाओं से पैसे बहुत कम निकाले गए। शेयरों की कीमत घटने से सभी श्रेणी की योजनाओं के मूल्य में भारी कमी आई। विशाखित फंडों के मूल्य में 55,000 करोड़ रुपये की कमी आई।

स्पेशियाल्टी फंडों के मूल्य में 5,000 करोड़ रुपये और इंडेक्स फंड में 2,900 करोड़ रुपये, टैक्स प्लानिंग में 2,600 करोड़ रुपये, हाइब्रिड इक्विटी फंडों में 2,000 करोड़ रुपये तथा ऑटो, बैंकिंग, एफएमसीजी, फार्मा और तकनीकी फंडों में कुल मिलाकर 700 रुपये की गिरावट आई। वर्तमान में 800 इक्विटी योजनाएं बाजार में उपलब्ध हैं। इनमें से 750 फंडों ने ऋणात्मक प्रतिफल यानी घाटा दिया है।

कुछ योजनाओं में 70 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई जैसे जेएम स्मॉल और मिडकैप फंड ने सर्वाधिक 76 प्रतिशत, जेएम कोर 11 फंड ने 75 प्रतिशत का घाटा और जेएम इमर्जिंग लीडर्स फंड ने 72 प्रतिशत का ऋणात्मक प्रतिफल दिया। इसके अलावा तकरीबन 300 ऐसे फंड हैं जिनका प्रदर्शन अपने बेचमार्क सूचकांकों की तुलना में बुरा रहा है।

रिलायंस म्युचुअल फंड की इक्विटी योजनाओं की परिसंपत्तियों में सर्वाधिक लगभग 10,000 करोड़ रुपये की कमी आई है और उसके बाद बारी आती है आईसीआईसीआई प्रूडेन्शियल और एसबीआई की जिनने क्रमश: 7,600 करोड़ रुपये और 5,700 करोड़ रुपये गंवाए हैं।

फ्रैंकलिन टेम्पलटन और यूटीआई की इक्विटी परिसंपत्तियों में भी क्रमश: 5,300 करोड़ रुपये और 5,200 करोड़ रुपये की कमी आई है। अन्य बड़े फंउ हाउस जैसे एचडीएफसी, डीएसपी ब्लैकरॉक, जेएम फाइनैंशियल, फिडेलिटी और सुंदरम बीएनपी पारिबा प्रत्येक की इक्विटी परिसंपत्ति में 3,000 करोड़ रुपये से अधिक की कमी आई है।

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