बिजनेस स्टैंडर्ड - ड्रोन को वैध बनाने की दिशा में पहला कदम
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ड्रोन को वैध बनाने की दिशा में पहला कदम

अरिंदम मजूमदार /  06 05, 2020

बिजनेस स्टैंडर्ड ड्रोन को वैध बनाने की दिशा में पहला कदमवर्ष 2014 में मुंबई के एक पिज्जा रेस्टोरेंट फ्रांसेस्कोज ने अपने ग्राहक को ड्रोन से पिज्जा पहुंचाकर लोगों का ध्यान खींचने की कोशिश की। ड्रोन की यह उड़ान 20 मिनट की थी मगर एक घंटे के भीतर पुलिस पिज्जा रेस्टोरेंट में पहुंच गई और कर्मचारियों से पूछताछ की। उन्होंने ऐसा करने की कोई मंजूरी नहीं ली थी। इसके चलते कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया गया।

अब छह साल बाद भारत ने ड्रोन को वैध बनाने की दिशा में पहला आधिकारिक कदम उठाया है। सरकार ने आधिकारिक राज-पत्र में ड्रोन परिचालन के नियमों का प्रारूप प्रकाशित किया है। इन नियमों को मानव रहित वायुयान प्रणाली नियम, 2020 नाम दिया गया है। ये 30 दिन तक सार्वजनिक चर्चा के लिए खुले हैं।

इन प्रारूप नियमों को नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने पेश किया है, जो ऐसे वाहनों की नियामक एजेंसी होगी। इन नियमों के मुताबिक ड्रोन को अपने वजन के हिसाब से चार श्रेणियों में बांटा गया है। सबसे हल्की श्रेणी नैनो यानी 250 ग्राम तक का ड्रोन है, जो अधिकतम 50 फुट की ऊंचाई पर उड़ सकता है। इसके लिए परिचालन एजेंसी को एकबारगी ही पंजीकरण कराना होगा।

पहली प्रणाली के नियमों में ड्रोन के कारोबार को मान्यता दी गई है। इन्हें लेकर ड्रोन कंपनियों के कार्याधिकारियों का कहना है कि इनसे देश में ड्रोन की आपूर्ति शृंखला प्रणाली को प्रोत्साहन मिलेगा। प्रारूप नियमों में यह उल्लेख किया गया है कि कौन ड्रोन का विनिर्माण, आयात एवं परिचालन कर सकता है और किस हवाई क्षेत्र में इनका परिचालन किया जा सकता है।

प्रारूप नियमों में कहा गया है, 'स्वीकृत क्षेत्रों में ही ड्रोन का आयात और ड्रोन हवाई क्षेत्र बनाया जा सकता है।' हालांकि उद्योग का कहना है कि इसे लागू करने की प्रक्रिया की रफ्तार तेज की जाए क्योंकि पहले ही इंतजार काफी लंबा हो चुका है। ड्रोन क्षेत्र को वैध बनाने के लिए विचार-विमर्श 2017 में शुरू हुआ था, जिसके लिए पहल पूर्व नागरिक उड्डयन राज्यमंत्री जयंत सिन्हा ने की थी। मगर यह आधिकारिक इसलिए नहीं बन पाया क्योंकि आम चुनावों की वजह से प्रक्रिया रुक गई।

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि प्रधानमंत्री कार्यालय और नीति आयोग ने इस उद्योग पर विशेष ध्यान देने को कहा है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय में अब इस उद्योग को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष प्रकोष्ठ है।

ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया के निदेशक (साझेदारी) स्मिथ शाह ने कहा, 'अभी उद्योग को वैध बनाने के प्रारूप नियम बने हैं। लेकिन यह सभी भागीदारों, उद्योग, नीति-निर्माताओं के हित में है कि वे इसे जल्द और प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए एक-दूसरे से बात करें।'

इस फेडरेशन का गठन 2017 में हुआ था। अब अदाणी और टाटा जैसी बड़ी भारतीय कंपनियां भी इसकी सदस्य हैं। वहीं 2,000 से अधिक स्टार्टअप भी फेडरेशन से जुड़ी हैं। इन स्टार्टअप को मुख्य रूप से उन युवा इंजीनियर स्नातकों ने शुरू किया है, जो नियमित नौकरी के बजाय उद्यमिता को वरीयता देते हैं

इन कंपनियों के कार्याधिकारियों ने कहा कि सबसे बड़ी अड़चन सरकार का वह दूरदर्शी कदम है, जिनमेें कहा गया है कि अगर ड्रोन ऑपरेटरों के पास मंजूरी नहीं है तो वे उड़ान नहीं भर सकते। हालांकि आरव अनमैन्ड सिस्टम्स के सीईओ विपुल सिन्हा ने कहा कि भारी प्रतिबंधों वाली नीति से भारत में 90 फीसदी ड्रोन ऑपरेटर अयोग्य हो गए हैं। इस नीति में कहा गया है कि हर तरह का ड्रोन डीजीसीए से स्वीकृत होना चाहिए। आरव अनमैन्ड सिस्टम्स उन कुछ कंपनियों में से एक है, जो राज्य सरकारों और सुरक्षा एजेंसियों के लिए ड्रोन का विनिर्माण और परिचालन करती है।

हालांकि देश में ड्रोन विनिर्माण की क्षमता नगण्य है, इसलिए भारत में 90 फीसदी ड्रोन डीजेआई ड्रोन बनाती है।

एनपीएनटी प्रोटोकॉल को पूरा करने के लिए उन्हें हार्डवेयर में बदलाव करना होगा ताकि वे नियामकीय मानकों को पूरा किया जा सके। डीजेआई ने बदलाव करने से इनकार कर दिया है। ऐसा इसलिए है क्योंकि भारतीय बाजार ने कस्टमाइज ड्रोन के लिए कोई पुष्ट संख्या नहीं दी है। इस साल की शुरुआत में एक बार पंजीकरण कराने वाले विंडो के जरिये सरकार ने 19, 553 ड्रोन का पंजीकरण किया है। अभी तक सिर्फ दो कंपनियों के परमिट की मंजूरी मिली है।

सिंह कहते हैं, 'मैं कहूंगा कि उद्योग बदलाव के दौर से गुजर रहा है। हर बदलाव एक विशेष अवधि के लिए चुनौतियां लेकर आता है। अब बदलाव यह है इसको लेकर एक स्पष्ट विचार आ चुका है कि आप कैसे काम कर सकते हैं, आप कहां काम कर सकते है और आप कहां काम नहीं कर सकते। इससे काम करने के एक संगठित तरीके का अंदाजा हो जाता है।'

सरकार में ड्रोन सेल का हिस्सा रहे एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि पंजीकरण विंडो ने इस प्रक्रिया को औपचारिक रूप देने की अनुमति दे दी है।

उनका कहना है कि देश में कोरोनावायरस से जुड़ी स्थिति की निगरानी कर रही प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली समिति भी इस बात से प्रोत्साहित है कि कैसे ड्रोन का इस्तेमाल वायरस और टिड्डी की समस्या से निपटने के लिए किया गया।

एक अधिकारी कहते हैं, 'इस प्रक्रिया को कारगर बनाने और ड्रोन के वाणिज्यिक इस्तेमाल को बेहतर बनाने की दिशा में कई प्रयोग चल रहे हैं। एक तरफ, हम उद्योग को औपचारिक रूप दे रहे हैं वहीं दूसरी तरफ वाणिज्यिक इस्तेमाल के लिए परीक्षण का नियम बनाया जा रहा है।' वह जोमैटो, स्विगी, डंजो जैसी डिलिवरी कंपनियों के लिए विजुअल सीमा से परे ड्रोन परिचालन के आधिकारिक मंजूरी की ओर इशारा करते हैं।

वह कहते हैं, 'दुनिया में कहीं भी ड्रोन द्वारा डिलिवरी की अनुमति नहीं है लेकिन भारत ने ऐसा करने के लिए पहला कदम उठाया है।  कंपनियों द्वारा किए जा रहे इन संचालन से हम उस पर नीतियां बनाने के लिए डेटा जुटाएंगे।'

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