बिजनेस स्टैंडर्ड - मसाला में निवेशकों की दिलचस्पी
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मसाला में निवेशकों की दिलचस्पी

विवेट सुजन पिंटो / मुंबई June 01, 2020

रोजमर्रा के इस्तेमाल की वस्तुएं (एफएमसीजी) बनाने वाली कंपनियां और निजी इक्विटी (पीई) फर्म ब्रांडेड मसाला बाजार में काफी दिलचस्पी दिखा रही हैं। वे इस श्रेणी में मौजूद कंपनियों के साथ अधिग्रहण अथवा नियंत्रण योग्य हिस्सेदारी की खरीदारी के लिए बातचीत कर रही हैं।

इस सप्ताह के आरंभ में होटल से लेकर सिगरेट तक कारोबार करने वाली प्रमुख कंपनी आईटीसी ने सनराइज फूड्स के साथ एक शेयर खरीद समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत 2,000 करोड़ रुपये में सनराइज फूड्स के पूर्ण अधिग्रहण की योजना है। आईटीसी आशीर्वाद ब्रांड के तहत मसालों की बिक्री करती है। उसने कहा था कि यह सौदा कंपनी की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत एफएमसीजी कारोबार को तेजी से बढ़ाने की योजना बनाई गई है।

कंपनी ने कहा, 'प्रस्तावित अधिग्रहण हमारे उत्पाद पोर्टफोलियो को समृद्ध करेगा। यह हमारे मसाला कारोबार को बढ़ाने और देश में अपनी एक अलग पहचान बनाने की रणनीति के अनुरूप है।' आगामी सप्ताहों में एक अन्य सौदा होने की उम्मीद है। ईस्टर्न कॉन्डिमेंट्स के अधिग्रहण की दौड़ में नॉर्वे के कारोबारी समूह ओर्कला की सहायक इकाई एमटीआर फूड्स सबसे आगे चल रही है। निवेश बैंकिंग सूत्रों ने बताया कि यह सौदा करीब 1,800 करोड़ रुपये का हो सकता है।

मीरन परिवार द्वारा प्रवर्तित केरल की कंपनी ईस्टर्न कॉन्डिमेंट्स ने करीब एक दशक पहले अमेरिका की प्रमुख मसाला कंपनी मैककॉर्मिक को अपनी 26 फीसदी हिस्सेदारी बेची थी। कंपनी में परिवार की हिस्सेदारी फिलहाल 74 फीसदी है। निवेश बैंकिंग सूत्रों ने बताया कि मैककॉर्मिक को बाद में अपना निवेश समेटने का विकल्प दिया जा सकता है। आने वाले महीनों में ऐसे कई सौदे हो सकते हैं क्योंकि वारबर्ग पिंकस और जनरल अटलांटिक जैसी प्रकुख पीई कंपनियों की एवरेस्ट और बादशाह मसाला जैसी कंपनियों में दिलचस्पी बढ़ रही है। सूत्रों ने बताया कि महाराष्ट्र की मसाला कंपनी सुहाना मसाला भी निवेशक की तलाश कर रही है।

एवेंडस कैपिटल की सह प्रमुख (उपभोक्ता एवं वित्तीय सेवा) आभा अग्रवाल ने कहा कि उच्च वृद्धि, दमदार ब्रांड और ग्राहकों की सुविधा के मद्देनजर इस क्षेत्र में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ रही है। उन्होंने कहा, 'मसाले और स्नैक्स दो ऐसी श्रेणियां हैं जिन्हें हम फूड्स में निवेश के लिए हमेशा दिलचस्प श्रेणी बताते हैं। मसाला एक बड़ी श्रेणी है और उसमें बिना ब्रांड से ब्रांडेड उत्पादों की ओर ग्राहकों का रुझान तेजी से बढ़ रहा है।' वेंचर इंटेलिजेंस से प्राप्त आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले दो महीनों के दौरान देश के मसाला क्षेत्र में आठ पीई-वीसी सौदे हुए हैं। इन सौदों का कुल आकार 26.2 करोड़ डॉलर यानी करीब 1,900 करोड़ रुपये है।

पिछले एक साल के दौरान देश के मसाला क्षेत्र में तीन प्रमुख विलय-अधिग्रहण सौदे हुए जिनमें मई में आईटीसी- सनराइट सौदा, अक्टूबर 2019 में मुंबई कंपनी फूड्स ऐंड इन्स द्वारा कुसुम स्पाइसेज का अधिग्रहण (15 करोड़ रुपये में) और पिछले मई में स्विटजरलैंड की कंपनी फर्मेनिक द्वारा पीई फर्म ट्रू-नॉर्थ की स्वामित्व वाली कंपनी वीकेएल सीजनिंग में हिस्सेदारी खरीद (900 करोड़ रुपये) शामिल हैं।

फायरसाइड वेंचर्स के मैनेजिंग पार्टनर कंवलजीत सिंह का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान खुले बनाम पैकेटबंद के महत्त्व को समझा है। उन्होंने कहा, 'ब्रांडेड मसाला क्षेत्र में उतरने से कंपनियों को उपभोक्ताओं की रसोई त बेहतर पहुंच स्थापित करने में मदद मिल सकती है जिसमें पहले से तैयार भोजन, अचार आदि श्रेणियां शामिल हैं। इससे निवेशकों को अपना उत्पाद पोर्टफोलियो और बिक्री बढ़ाने में मदद मिलती है।'

ईक्यूब इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स के मैनेजिंग पार्टनर हरीश एचवी ने भी इसका समर्थन करते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान ब्रांडेड कंपनियों में तेजी आई है। उन्होंने कहा, 'मसाला श्रेणी में कई छोटी-बड़ी कंपनियां टेलीविजन पर प्रमुखता से विज्ञापन दे रही हैं। इसलिए लोगों के बीच उनकी पैठ बढ़ रही है। इसके अलावा उन क्षेत्रों में क्षेत्रीय मसालों के प्रति ग्राहकों का आकर्षण काफी है जहां बड़े पैमाने पर उसकी खपत होती है। इससे कंपनियों को बिक्री बरकरार रखने में मदद मिलती है।' पूर्व में सनराइज एक दमदार ब्रांड है। पश्चिम में एवरेस्ट, उत्तरी भारत में अशोक, कैच एवं गोल्डी मसाले दमदार ब्रांड हैं। इसी प्रकार दक्षिण भारत में एमटीआर का चलन काफी है। इसके अलावा एमडीएच और नेस्ले इंडिया का मैगी मसाले की पहुंच देश भर के बाजारों में है।

Keyword: Private Equity, FMCG, Spices, ITC, मसाला, निवेशक, एफएमसीजी, निजी इक्विटी, अधिग्रहण,
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