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आसान नहीं होगी महाराष्ट्र में प्रवासी मजदूरों की वापसी

सुशील मिश्र /  May 31, 2020

महाराष्ट्र सरकार ने पूरे राज्य में 30 जून तक लॉकडाउन बढ़ा दिया है। ज्यादातर उद्योग धंधों को शर्तो के साथ काम करने की छूट दी गई है। लेकिन उद्योग जगत के सामने सबसे बड़ी समस्या मजदूरों की है क्योंकि राज्य से करीब 70 फीसदी मजदूर पलायन कर चुके हैं। उद्योग जगत के लोगों का अनुमान है कि मजदूरों की वापसी में करीब छह महीने का समय लगेगा और जब तक मजदूर वापस नहीं होते तब तक उद्योग धंधे रफ्तार नहीं पकड़ पाएंगे। मजूदरों की कमी को सत्तारूढ़ शिवसेना भूमिपुत्रों के बल पर पूरा करने की योजना तैयार कर रही है। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने राज्य के सभी जिलाधिकारियों से कहा है कि वे अपने इलाके के उद्योग-घंधों में मजदूरों की कमी का पता लगाएं और वहां मजदूरों की कमी को पूरा करने के लिए स्थानीय युवाओं को काम दिलाएं। उन्होंने भूमिपुत्रों से भी भावनात्मक रूप से अपील की है कि वे रोजगार के लिए इस बेहतर अवसर का लाभ उठाएं।

प्रदेश के उद्योग मंत्री सुभाष देसाई ने कहा कि जो कामगार लॉकडाउन की वजह से अपने-अपने प्रदेश को लौट चुके हैं उन्हें महाराष्ट्र में दोबारा आने पर पंजीकरण कराना होगा। देसाई ने कहा कि प्रवासी कामगार केवल अपने कपड़ों के साथ लौटे हैं। वे कुछ समय बाद लौटेंगे। मौजूदा समय में उद्योगों को आपूर्ति के लिए पर्याप्त श्रमबल है।

देसाई ने कहा कि सरकार असंगठित क्षेत्र और मजदूरों को मदद करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि कोरोना संकट के कारण उद्योग क्षेत्र में मराठी युवाओं के लिए नए अवसर पैदा हुए हैं। इसलिए मराठी नौजवान नए मौके का फायदा उठाएं। उद्योग विभाग ने नीतियां और योजना तैयार की है। इसका फायदा मराठी भाषी उठाएं। चैंबर ऑफ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री (आईएमसी) के अध्यक्ष आशिष वैद्य ने कहा कि प्रवासी मजदूरों के लगातार जाने से निर्माण कार्य, औद्योगिक कारखाने, ऑटो मोबाइल कंपनियों, सीमेंट उद्योग, सेवा क्षेत्र, फार्मा कंपनियों, छोटे-मोटे उद्योगों में मजदूरों की कमी हो गई है। असंगठित मजदूर भी बड़ी संख्या में महाराष्ट्र छोड़ रहे हैं। लेकिन हमें उम्मीद है कि कुछ महीने बाद जब सब कुछ ठीक होगा तो ये मजदूर वापस आएंगे। महाराष्ट्र के श्रम आयुक्त महेंद्र कल्याणपुरकर कहते हैं कि संगठित क्षेत्र में साढ़े 28 लाख श्रमिक हैं, जहां कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन प्रवासियों के पलायन से असंगठित क्षेत्र में दिक्कतें हो सकती हैं। बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के आनंद गुप्ता ने कहा कि रियल एस्टेट और इन्फ्रास्ट्रक्चर उद्योग काफी तकलीफ में है। राज्य में करीब 30 लाख प्रवासी श्रमिक काम करते हैं। इनके पलायन से दिक्कतें बढ़ी हैं।

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