बिजनेस स्टैंडर्ड - बैंकों का जोखिम से बचना आश्चर्यजनक है
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बैंकों का जोखिम से बचना आश्चर्यजनक है

सुरजीत दास गुप्ता /  May 29, 2020

बीएस बातचीत

देश की सबसे बड़ी एनबीएफसी बजाज फिनसर्व के सीएमडी संजीव बजाज अपने शब्दों पर कायम हैं। संजीव बजाज ने सुरजीत दासगुप्ता के साथ साक्षात्कार में कहा कि यह अस्वीकार्य है कि बैंक एनबीएफसी को उधारी से परहेज करें। उन्हें इसे लेकर आशंका है कि ईएमआई रोक के विस्तार से कर्जदार का दृष्टिकोण बदल सकता है। अगर ईएमआई रोक का लाभ 1 मार्च से मंजूर ऋणों पर भी दिया जाता है तो इससे बैंकों द्वारा उधारी वृद्घि पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। बजाज का यह भी मानना है कि देशों की सॉवरिन रेटिंग घटने की आशंका बनी हुई है। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश:


क्या आप यह मानते हैं कि ईएमआई ऋण रोक तीन महीने और बढ़ाना उद्योग के लिए पर्याप्त है?

शुरू में कर्जदारों को ईएमआई को लेकर तीन महीने की छूट दी गई थी जो लॉकडाउन को देखते हुए जरूरी थी। हालांकि अर्थव्यवस्था के कई हिस्सों को अब धीरे-धीरे खोला जा रहा है। सभी के लिए इस रोक को अन्य तीन महीने तक बढ़ाने के बजाय, बेहतर यह होता कि बैंकों को सिर्फ उन्हीं ग्राहकों के लिए एकमुश्त पुनर्गठन की सुविधा देने की अनुमति मिलनी चाहिए थी जिन्हें इसकी जरूरत हो। सभी को यह छूट बढ़ाने से कर्जदार के दृष्टिकोण में बदलाव आने का जोखिम पैदा हुआ है, क्योंकि उन्हें 6 महीने तक कोई ईएमआई नहीं चुकानी होगी। मेरा मानना है कि यह छूट दीर्घावधि या बड़ी वैल्यू वाले ऋणें पर बढ़ाई जा सकती थी। 1 मार्च 2020 के बाद दिए गए ऋणों पर यह छूट दी जाएगी या नहीं इसे लेकर अनिश्चितता बनी हुई है जिससे उद्योग को उधारी गतिविधियां तुरंत शुरू करने की राह प्रभावित होगी, इसलिए आरबीआई को इसे स्पष्ट करना चाहिए।


लॉकडाउन से एनबीएफसी किस तरह से प्रभावित हुई हैं?

मौजूदा हालात में एनबीएफसी की सहायता करने की सरकार और आरबीआई की मंशा स्पष्ट है। ये एनबीएफसी एमएसएमई, उपभोक्ता और रियल एस्टेट क्षेत्रों के लिए पूंजी के मुख्य स्रोत हैं। हालांकि कई बैंकों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति आश्चर्यजनक है। मेरा मानना है कि प्रत्येक एनबीएफसी को अच्छी गुणवत्ता वाला व्यवसाय खड़ा करना होगा और इसलिए कुछ जोखिमों को समझना जरूरी है, लेकिन उनकी पूरी तरह से अनदेखी स्वीकार्य नहीं है। बैंकों को यह याद रखना चाहिए कि वे उधारी व्यवसाय में हैं।


क्या आप मानते हैं कि वित्तीय राहत पैकेज पर्याप्त है या यह लोगों के हाथ में प्रत्यक्ष रूप से पूंजी पहुंचाकर मांग पैदा करने में विफल रहा है?

वित्तीय राहत के जरिये ज्यादा प्रभावित, गरीब वर्ग के हाथ में भोजन और पैसा आया है, और यह जरूरी था। इसके अलावा, व्यवस्था (बैंकों, एनबीएफसी, आवासीय और एमएसएमई क्षेत्र के लिए) में नकदी बढ़ाने के लिए कई अहम घोषणाएं की गईं हैं। जिसका अभाव है वह है मांग में तेजी नहीं आना। पिछले दो महीनों में लॉकडाउन से मांग और वस्तु एवं सेवाओं की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है। वेतनभोगी वर्ग को भुगतान तो मिला है, लेकिन उसने ज्यादा खर्च नहीं किया है। यदि हम नीतिगत उपायों के जरिये आगे बढ़ते हैं तो इसकी ज्यादा संभावना है कि हमारी अर्थव्यवस्था पुन: पटरी पर लौटेगी। इसके लिए मांग और आपूर्ति से संबंधित प्रोत्साहन की जरूरत है।


क्या लंबे लॉकडाउन के बाद अर्थव्यवस्था को तुरंत खोलने की जरूरत है?

अमेरिका से प्राप्त ताजा रिपोर्टों से संकेत मिला है कि कोरोना वायरस से मौतों की दर पूर्व के अनुमानों की तुलना में कम है। जहां अधिकारी संवेदनशील इलाकों में अस्पताल क्षमता बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं, वहीं हमें सोशल डिस्टेंसिंग पर भी ध्यान देने के साथ साथ बुजुर्गों और कमजोर लोगों को सुरक्षित बनाए रखने की जरूरत है। हमें धीरे धीरे और आत्मविश्वास के साथ आर्थिक गतिविधि पुन: शुरू करनी चाहिए।


क्या सरकार को बड़ी मात्रा में व्यवसायों की सहायता करनी चाहिए?

इस लॉकडाउन से दो महीने से ज्यादा समय तक सभी प्रमुख व्यवसाय बंद रहे हैं। महामारी बरकरार रहने से ट्रैवल, लीजर, हॉस्पिटैलिटी, और एंटरटेनमेंट जैसे क्षेत्र दूसरों की तुलना में ज्यादा प्रभावित होंगे। आपको यह याद रखना चाहिए कि यह सहायता अल्पावधि में बेहद जरूरी है और साथ ही व्यावसायिक समुदाय में फिर से विश्वास पैदा किए जाने की जरूरत है।

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